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फोटो साभार: संसद टीवी/वीडियो ग्रैब

पहले माइक म्यूट होता था, अब संसद को ही 'म्यूट' कर दिया: कांग्रेस

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर 'लोकतंत्र पर हमले' किए जाने का आरोप और तेज कर दिया है। इसने कहा है कि पहले तो संसद सदस्यों के माइक बंद किये जाते थे लेकिन अब सदन की कार्यवाही को ही 'म्यूट' कर दिया गया। 

कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा की कार्यवाही के एक छोटे से हिस्से के वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, 'पहले माइक बंद होता था, आज सदन की कार्यवाही म्यूट कर दी गई है। पीएम मोदी के दोस्त के लिए सदन म्यूट है।' इसने एक अन्य ट्वीट में कहा है कि 'राहुल जी को बोलने दो...' के नारे लगते रहे और सदन म्यूट हो गया!

इस पर प्रतिक्रिया में कांग्रेस नेता और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है, 'जनता द्वारा चुने गए सांसदों को संसद में बोलने का अवसर ना देना एवं लोकसभा की कार्यवाही म्यूट करवाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। यह देशवासियों की आवाज शांत करने का प्रयास है। क्या इसे स्वस्थ लोकतंत्र कहा जा सकता है? इन्हीं मुद्दों को लेकर राहुल जी ने भारत जोड़ो यात्रा की थी।'

राहुल आज लोकसभा पहुँचे थे। ब्रिटेन में अपनी लोकतंत्र संबंधी टिप्पणी के बाद यह लगातार दूसरी बार था। लेकिन उन्हें आज भी बोलने का मौक़ा नहीं मिला। संसद के दोनों सदनों को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस मुद्दे पर लगातार पांचवें दिन गतिरोध जारी रहा। भाजपा ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की है। 

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राहुल गांधी गुरुवार को भी लोकसभा में पहुँचे थे, लेकिन उनको बोलने का मौक़ा नहीं मिला था। कल प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा था, 'मैंने स्पीकर से कहा कि मैं संसद में बोलना चाहता हूँ। अपनी बात रखना चाहता हूँ। सरकार के चार मंत्रियों ने मेरे ऊपर आरोप लगाया है, सदन में आरोप लगाया है तो मेरा हक है कि संसद भवन में मुझे अपनी बात रखनी देनी चाहिए।... मेरे आने के बाद एक मिनट के अंदर उन्होंने सदन को स्थगित कर दिया।'
राहुल ने गुरुवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि शुक्रवार को मौक़ा मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। लोकसभा में शुक्रवार को हंगामा होता रहा। इसी दौरान एक घटना का ज़िक्र करते हुए कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा की दो वीडियो क्लिपिंग लगाई है और दावा किया है कि 'माइक ही म्यूट नहीं होता है बल्कि संसद ही म्यूट है'।

पीएम मोदी के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव

इस बीच, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस नेताओं- सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया है। 

अडानी मामले में जेपीसी जाँच की मांग

इधर, कांग्रेस ने अडानी मामले की संयुक्त संसदीय समिति जेपीसी से जाँच कराने की मांग की है। विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, रोहुल गांधी सहित सभी सांसद शामिल हुए। 

बता दें कि राहुल गांधी के ब्रिटेन में दिए गए लेक्चर और भाषणों पर देश में हंगामा मचा है। संसद में मोदी सरकार के मंत्रियों ने ही राहुल के भाषणों को देश विरोधी क़रार देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल ने वहाँ कहा था कि भारत के लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। 

बीजेपी राहुल के बयान को देश विरोधी बयान बता रही है। वह आरोप लगा रही है कि 'राहुल अमेरिका और यूरोप से भारत में दखल देने की मांग कर रहे हैं'। कांग्रेस नेता की टिप्पणी को लेकर उनसे बीजेपी माफ़ी की मांग कर रही है।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी 'राष्ट्र-विरोधी टूलकिट' का 'स्थायी हिस्सा' बन गए हैं। केंद्रीय क़ानून मंत्री किरण रिजिजू ने गुरुवार को कहा है, 'बीजेपी राहुल गांधी के मुद्दे को बहुत गंभीर मानती है और यह एक विशेषाधिकार के मुद्दे से परे है। इसलिए हम चाहते हैं कि इसे गंभीरता से लिया जाए।' उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि मामला 'विशेषाधिकार से परे' है और पार्टी सभी उपलब्ध उपकरणों, नियमों और परंपराओं का इस्तेमाल करने की कोशिश करेगी।

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बीजेपी ने सदन में माफी नहीं मांगने पर राहुल को लोकसभा से निलंबित कराने की पहल शुरू की है। राहुल को सदन से निलंबित करने की संभावना तलाशने के लिए बीजेपी ने लोकसभा स्पीकर से संपर्क कर एक विशेष समिति बनाने की मांग की है।

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे लोकसभा स्पीकर से मुलाक़ात कर इस मामले में कार्रवाई के लिए प्रयास में जुटे हैं। उनकी पार्टी का तर्क है कि राहुल ने ब्रिटेन के कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में अपनी टिप्पणी से संसद, लोकतंत्र और देश के संस्थानों का अपमान किया है। सांसद दुबे ने कहा है कि इस मामले में विशेष कमेटी बनायी जाए जिसे राहुल की लोकसभा सदस्यता को निलंबित करने में मदद करनी चाहिए।

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क़मर वहीद नक़वी
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