डोनाल्ड ट्रंप की भारत–अमेरिका व्यापार डील संबंधी घोषणा पर कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। क्या भारत ने अपनी व्यापार घोषणाएँ ‘आउटसोर्स’ कर दी हैं? पढ़िए पूरे सौदे पर पार्टी ने क्या-क्या कहा।
भारत पाक सीजफायर की तरह भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा भी एकतरफ़ा तौर पर अमेरिका ने की! कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाया है कि भारत ने अपने व्यापार समझौतों की घोषणा कब से अमेरिका को सौंप दी है? यह सवाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करने के बाद उठा है। इसके साथ ही पार्टी ने पूरी ट्रेड डील पर ही सवाल खड़े किए और इसे आत्मसमर्पण क़रार दिया। पार्टी ने मांग की है कि पूरी डील की जानकारी मोदी सरकार संसद से साझा करे।
जयराम रमेश ने कहा कि भारत को अब अपने अहम राष्ट्रीय निर्णयों की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप या उनके अधिकारियों से मिलती है।कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने व्यापार घोषणाओं बड़ा सवाल किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'व्यापार समझौता...वाशिंगटन द्वारा घोषित! टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। भारत अमेरिका से ऊर्जा, तकनीक, कृषि और कोयला खरीदेगा। एक छोटा सा संवैधानिक सवाल बाकी है- भारत ने अपनी व्यापार घोषणाओं को कब से बाहर सौंप दिया? साहब की आधिकारिक बात अभी तक इंतज़ार में है।'
यह टिप्पणी सोमवार को ट्रंप द्वारा किए गए ऐलान के बाद आई। ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और दोनों देशों में व्यापार समझौता हो गया है। अमेरिका ने भारत के सामान पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। ट्रंप ने इसे दोस्ती और सम्मान के कारण बताया और कहा कि मोदी ने रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने पर सहमति जताई है।
'मोदी की रिक्वेस्ट' पर ट्रेड डील, जीरो टैरिफ़: कांग्रेस
कांग्रेस ने कहा, "सीजफायर की तरह ट्रेड डील की घोषणा भी ट्रंप की ओर से की गई। ये बताया गया कि 'मोदी की रिक्वेस्ट' पर ट्रेड डील की जा रही है। ट्रंप का कहना है कि भारत अमेरिका के ऊपर टैरिफ और नॉन टैरिफ बैरियर 0% तक घटाएगा। मतलब आपने अमेरिका के लिए पूरा बाजार खोल दिया। इससे भारतीय इंडस्ट्री का जबरदस्त नुकसान होगा। यहां के व्यापारी, यहां के किसान, सबका साथ छोड़ दिया आपने।"
कांग्रेस के तीन बड़े सवाल
- कृषि क्षेत्र को अमेरिका के लिए खोलने की बात है, आखिर क्या सौदा हुआ है? हमारे किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है या उनका साथ भी छोड़ दिया गया है? हमारे किसानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
- ये भी कहा गया कि मोदी रूस से तेल नहीं खरीदेंगे, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेंगे। क्या ट्रेड डील में मोदी सरकार रूस का साथ छोड़ने पर राजी हुई है?
- अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की बात भी कही है। अगर ऐसा है तो 'मेक इन इंडिया' का क्या हुआ?
कांग्रेस ने साफ़ तौर पर कहा है कि ट्रेड डील में किन बिंदुओं पर बात हुई, क्या तय हुआ - ये बात देश को जानने का हक है। मोदी सरकार को इस बारे में सारी जानकारी देश और संसद से साझा करनी चाहिए।
'वाशिंगटन में मोगंबो खुश है'
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने इसे 'ट्रंप-निर्भरता' कहा। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भारत को अब अपने अहम राष्ट्रीय निर्णयों की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप या उनके अधिकारियों से मिलती है। उन्होंने पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर और इस व्यापार समझौते का उदाहरण दिया। रमेश ने कहा कि मोदी और ट्रंप की बातचीत की जानकारी पहले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी, न कि भारतीय पक्ष ने। उन्होंने लिखा, 'वाशिंगटन में साफ तौर पर मोगंबो खुश है।' रमेश ने आरोप लगाया कि ट्रंप के पास मोदी पर कुछ दबाव है और मोदी आखिरकार झुक गए हैं।
वित्त मंत्री ने किया स्वागत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस समझौते का स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'मेड इन इंडिया उत्पादों के लिए अच्छी खबर। अब वे 18 प्रतिशत कम टैरिफ का सामना करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी और ट्रंप की लीडरशिप के लिए धन्यवाद। हमारे दोनों बड़े लोकतंत्रों के लोग फायदा उठाएंगे।'यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापार तनाव को कम करने वाला कदम माना जा रहा है। ट्रंप ने पहले भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए थे, जिसमें रूसी तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त 25 प्रतिशत शामिल था। अब यह घटकर 18 प्रतिशत रह गया है। समझौते के तहत भारत अमेरिका से ज्यादा ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद और कोयला खरीदने पर राजी हुआ है।
कांग्रेस का कहना है कि भारत को अपनी नीतियों और समझौतों की घोषणा खुद करनी चाहिए, न कि विदेशी नेता से। यह राजनीतिक विवाद बढ़ता दिख रहा है, जबकि सरकार और समर्थक इसे दोनों देशों के लिए फायदेमंद बता रहे हैं।