नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में फास्ट-ट्रैक अदालत की पहली ही सुनवाई सीबीआई की गैरमौजूदगी की वजह से टल गई तो पीएम मोदी कांग्रेस के निशाने पर आ गए। कांग्रेस ने कहा कि नीट फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर 'पीएम मोदी की लफ्फाजी का यही सच' है। नीट पेपर लीक के ख़िलाफ़ जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने दो दिन पहले ही फास्ट-ट्रैक कोर्ट में पेपर लीक के दोषियों को जल्द सजा दिलाने की बात कही थी। और केंद्रीय एजेंसी सीबीआई के वकील की गैरमौजूदगी की वजह से पहली ही सुनवाई टालनी पड़ी। इसको लेकर कांग्रेस ने पीएम पर बड़ा हमला किया। 

पहली ही सुनवाई में नहीं पहुंचा CBI का वकील

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत में सोमवार को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की पहली सुनवाई हुई। अदालत आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

लेकिन सीबीआई की ओर से कोई सरकारी वकील उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने सीबीआई के डायरेक्टर ऑफ़ प्रॉसिक्यूशन को निर्देश दिया कि मामले के लिए जल्द से जल्द एक लोक अभियोजक नियुक्त किया जाए। सीबीआई की ओर से कोई पक्ष नहीं रखे जाने के कारण अदालत ने सुनवाई 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।
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23 जुलाई को बनी थी विशेष अदालत

यह वही विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत है, जिसका गठन 23 जुलाई को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत किया गया था। इसका मक़सद पेपर लीक और सरकारी परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई करना है। इस अदालत के गठन को सरकार ने परीक्षा सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया था।

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक किया गया था। सभी आरोपी फिलहाल 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले 17 जुलाई को अदालत ने उनकी जमानत याचिकाओं पर सीबीआई से जवाब मांगा था।

कांग्रेस ने साधा मोदी सरकार पर निशाना

पहली ही सुनवाई टलने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने बयान जारी कर कहा, 'आज नीट पेपर लीक मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट की पहली ही सुनवाई इसलिए टल गई क्योंकि सीबीआई का वकील अदालत में नहीं पहुंचा। यही नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की असलियत है। सरकार सिर्फ रील बनाने और प्रचार करने में व्यस्त है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने में बिल्कुल गंभीर नहीं है।'
कांग्रेस का कहना है कि सरकार एक ओर पेपर लीक रोकने और तेज न्याय का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर अदालत में अपना वकील तक समय पर पेश नहीं कर पाती।

जयराम रमेश ने भी उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी एक्स पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि 23 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई थी ताकि नीट पेपर लीक मामले की तेजी से सुनवाई हो सके। लेकिन पहली ही सुनवाई में सीबीआई का कोई क़ानूनी प्रतिनिधि अदालत में मौजूद नहीं था, जिसके कारण मामला तुरंत टालना पड़ा।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इससे साफ़ होता है कि सरकार परीक्षा घोटालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर जितने बड़े दावे करती है, जमीन पर उतनी गंभीर दिखाई नहीं देती।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित हैं लाखों मामले

देश में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स और पोक्सो कोर्ट्स महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराधों के त्वरित निपटारे के लिए बनाए गए थे, लेकिन सचाई अलग है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार 2023 में क़रीब 76 हज़ार केस निपटाए गए तो क़रीब 2 लाख केस पेंडिंग रहे। 2024 में क़रीब 85 हज़ार केस निपटाए गए तो पेंडिंग केस भी मामूली बढ़कर 2 लाख से थोड़े ज़्यादा हुए। 2025 में क़रीब 66 हज़ार केस निपटाए गए जबकि पेंडिंग मामले बढ़कर 2.45 लाख हो गए।
रिपोर्टें हैं कि अदालतों में वैकेंसी, स्टाफ की कमी और भारी केस लोड के कारण पेंडिंग मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नतीजतन, न्याय में देरी आम बात है। लाखों पीड़ितों को इंसाफ मिलने में सालों लग जाते हैं।

सरकार लगातार कर रही है सुधारों का दावा

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई बड़े कदमों की घोषणा की है। सरकार ने हाल ही में परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई है। पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई के लिए कानून में संशोधन लाने की घोषणा की है।

इसके अलावा सरकार ने समयबद्ध जांच और सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित की हैं। परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए कड़ी सजा और विशेष अदालतों की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और छात्रों का भरोसा बहाल करना है।
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राजनीतिक विवाद और गहराया

नीट पेपर लीक मामला पिछले कई महीनों से देश का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रही है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कानूनी तथा तकनीकी दोनों स्तरों पर व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

फिलहाल, फास्ट-ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई बिना किसी ठोस कार्यवाही के टल जाने से सरकार और जांच एजेंसी दोनों विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं।