कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट चुप्पी तोड़िए! देश जानना चाहता है कि चंदा चोर कौन हैं? भागीदार कौन-कौन हैं? सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में निष्पक्ष जाँच क्यों नहीं?'
कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में चंदा चोरी के मामले को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार और बीजेपी पर हमला बोला और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जाँच कराने की मांग की। पार्टी ने कहा कि चंदा चोरों को जवाबदेही से नहीं बचाया जा सकता है। देश भक्तों के चंदे का हिसाब माँग रहा है। आस्था किसी को जवाबदेही से भागने का अधिकार नहीं देती। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधा सवाल किया और उनपर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
कांग्रेस का आरोप है कि ऑडिट में 2020 में ही प्रबंधन की कमियों और चंदे के रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की ओर ध्यान दिलाया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पार्टी ने सवाल उठाया है कि सीसीटीवी कैमरों में दर्ज 105 घटनाओं के बावजूद पूरे मामले का सच सामने क्यों नहीं आया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने लिखा, 'चंदा चोरी, आस्था धोखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट– चुप्पी तोड़िए! देश जानना चाहता है कि चंदा चोर कौन हैं? उनके भागीदार कौन-कौन हैं? सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में निष्पक्ष जाँच क्यों नहीं हो रही?'
चेतावनी के बावजूद चोरी कैसे जारी रही?
जयराम रमेश ने कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बार-बार चेतावनी के बावजूद चोरी कैसे जारी रही? जिम्मेदार कौन है? बड़े दोषियों को क्यों बचाया जा रहा है? ऑडिट फ़र्म की सलाह को क्यों कूड़ेदान में फेंक दिया गया? उन्होंने याद दिलाया कि ट्रस्ट बनने के कुछ महीनों बाद नवंबर 2020 में एक प्राइवेट ऑडिट फर्म ने 'इंटरनल ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट' पर सलाह दी थी। फर्म ने साफ़ कहा था कि प्रबंधन बहुत अनप्रोफेशनल है, व्यक्तियों की जिम्मेदारियों की कोई साफ परिभाषा नहीं है, चंदे का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है। फर्म ने अनप्रोफेशनल स्टाफिंग और खराब डेटा प्रबंधन के बारे में भी चेतावनी दी थी। उसने डेटा हैंडलिंग, कर्मियों और चंदे के स्टॉक रजिस्टर के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी लागू करने की सिफारिश की थी। रमेश ने आरोप लगाया कि सालों बाद भी कोई एसओपी लागू नहीं की गई।
इसका नतीजा यह हुआ कि सरकार द्वारा 2026 में गठित एसआईटी को भी मानना पड़ा कि गिनती कक्ष से 105 बार नकदी निकाली गई। कर्मचारी जानबूझकर कैमरों के सामने खड़े होकर वीडियो कैप्चर होने से रोकते रहे। हालाँकि, कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एसआईटी भी वास्तविक दोषियों को बचाने के लिए बनाई गयी। जयराम रमेश ने एक इंजीनियर का ज़िक्र भी किया। मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्होंने चंपत राय को बताया था कि ठेकों में 40 प्रतिशत कमीशन लिया जा रहा है, 'घोस्ट स्टाफ' दिखाए जा रहे हैं और बिल में सामग्री की मात्रा बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही है। शिकायत करने के बाद उन्हें हटा दिया गया।
कांग्रेस ने क़ीमती चंदे के रसीद न मिलने का मुद्दा भी उठाया। जाँच में कई ऐसे मामले सामने आए जहाँ भक्तों ने बहुत कीमती सामान दान किए, लेकिन उन्हें कोई रसीद नहीं दी गई।
जयराम रमेश ने पूछा, '2020 में ही लिखित रूप में जोखिम बताए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? शिकायत करने वाले को ही क्यों हटाया गया? भक्तों के कीमती दान की रसीद क्यों नहीं दी गई?' उन्होंने आरोप लगाया कि चोर चोरी करते रहे, जबकि आरएसएस-बीजेपी से जुड़े लोग, जो कभी 'मैं भी चौकीदार' कहते थे, गहरी नींद में सोए रहे। यह महज संयोग नहीं हो सकता।
कांग्रेस का कहना है कि मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा और ट्रस्ट की निगरानी की जिम्मेदारी जिन लोगों पर थी, उन्होंने जानबूझकर ऐसी स्थिति बनाए रखी जिससे चंदे और कीमती दान की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठते हैं। क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या चोरों को बचाया जा रहा था? निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए कि किसे बचाया जा रहा था और कौन-कौन बड़े लोग इसमें शामिल या भागीदार थे।
SIT जाँच पर भरोसा नहीं: कांग्रेस
जयराम रमेश ने साफ कहा कि देश के लोगों को सरकार की एसआईटी की जाँच पर भरोसा नहीं है। चेतावनी, औपचारिक शिकायत और सीसीटीवी में कैद 105 घटनाओं के बावजूद उच्च पदों पर बैठे लोगों की भूमिका पर सवाल बने हुए हैं। सिर्फ कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके पूरा मामला कैसे निपटाया जा सकता है?
कांग्रेस की माँग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। ऑडिट में दी गई चेतावनियाँ, ठेकों में कथित कमीशन, गबन की पूरी सीमा और सभी कीमती दान का पूरा हिसाब सामने आना चाहिए। छह साल से चल रही इस चोरी का पूरा खुलासा होना चाहिए। हर जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका जाँची जाए और दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले।
इससे पहले भी कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री मोदी चोरों के पाप छिपाने का रास्ता चुन रहे हैं, व्यापक जाँच शुरू करने के बजाय। पार्टी ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय जैसे लोगों को बचाने का आरोप लगाया है और पूछा है कि 4 जून को चंपत राय तक चोरी का वीडियो पहुँचने के बाद FIR दर्ज करने में 21 दिन की देरी क्यों हुई। पार्टी कह रही है कि देश राम के नाम पर दिए गए चंदे का हिसाब माँग रहा है और भक्तों की आस्था किसी को जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं देती।