कांग्रेस ने खाने-पीने की ज़रूरी चीजों की बढ़ती क़ीमतों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। इसने दावा किया है कि पिछले एक महीने में खाने पीने की चीजें क़रीब 30 फीसदी तक बढ़ गई हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा है कि अरहर दाल 100 से बढ़कर 130 रुपये, चना दाल 70 से 100 रुपये और उड़द दाल 120 से 140 रुपये किलो हो गई है। प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 1 जून के 29.50 रुपये से बढ़कर 17 सितंबर को 53.78 रुपये किलो हो गई। सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्टों में प्याज की इस बढ़ोतरी को 82.3 प्रतिशत बताया गया है। कांग्रेस का आरोप है कि महंगाई ने पिछले साल की जीएसटी दर कटौती से मिले संभावित लाभ को काफी हद तक कम कर दिया है। इसके साथ ही इसने पीएम मोदी से पूछा कि 'अच्छे दिन कहाँ गए?'

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दाल, मसाले, खाद्य तेल और प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और गरीब तथा मध्यम वर्ग के परिवारों पर इसका बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर महंगाई के मुद्दे पर चुप रहने का आरोप लगाया और 1977 की फिल्म 'हम किसी से कम नहीं' के मशहूर गीत 'क्या हुआ तेरा वादा?' के ज़रिए सरकार पर राजनीतिक तंज कसा। प्रधानमंत्री मोदी ने 'अच्छे दिन आएँगे' का वादा किया था।
ताज़ा ख़बरें
कांग्रेस नेता ने लखनऊ की एक मीडिया रिपोर्ट को साझा किया है जिसमें स्थानीय खुदरा बाज़ार में दालों की क़ीमतों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट है। जयराम रमेश ने इन रिपोर्टों के आधार पर कहा है कि अरहर दाल और चना दाल 30 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई जबकि उड़द दाल 120 रुपये से बढ़कर 140 रुपये प्रति किलो हो गई।

प्याज के दाम में क़रीब 82% बढ़ोतरी

प्याज की कीमतों को लेकर सामने आए आंकड़े भी चर्चा में हैं। सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 जून को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 29.50 रुपये प्रति किलो थी। 17 सितंबर तक यह बढ़कर 53.78 रुपये प्रति किलो हो गई। इस तरह करीब साढ़े तीन महीने में औसत खुदरा कीमत में 82.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। थोक बाजार में भी इसी अवधि में कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। 1 जून को औसत थोक कीमत 22.60 रुपये किलो थी, जो 10 सितंबर को 46.20 रुपये और 17 सितंबर को 45.68 रुपये किलो दर्ज की गई। रिपोर्ट में प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे महाराष्ट्र में फसल को हुए नुकसान और वहां से आवक कम होने के साथ-साथ कर्नाटक से कम आपूर्ति और नई खरीफ फसल की आवक में देरी को प्रमुख कारणों में बताया गया है।

मसालों के दाम भी बढ़ने का दावा

जयराम रमेश ने केवल दाल और प्याज ही नहीं, बल्कि मसालों की कीमतों में भी तेजी का दावा किया। उनके मुताबिक पिछले एक महीने में कुछ मसालों के दाम 10 से 25 फीसदी तक बढ़े हैं। उन्होंने जिन कीमतों का उल्लेख किया, उनमें हरी इलायची 4000 से बढ़कर 4400 रुपये किलो, बड़ी इलायची 2400 से बढ़कर 2800 रुपये किलो, जीरा 360 से बढ़कर 400 रुपये किलो, जावित्री 2500 से बढ़कर 3000 रुपये प्रति किलो शामिल हैं। जयराम रमेश का कहना है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली इन चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ाया है।

जयराम रमेश के मुताबिक़ सरसों तेल 190 रुपये से बढ़कर 210 रुपये प्रति लीटर और सफोला तेल 240 रुपये से बढ़कर 280 रुपये प्रति लीटर हो गया है। कांग्रेस का तर्क है कि जब दाल, तेल और मसाले जैसी कई जरूरी चीजें एक साथ महंगी होती हैं तो परिवारों के कुल मासिक रसोई बजट पर इसका असर पड़ता है।

‘GST कटौती का फायदा महंगाई ने खत्म कर दिया’

महंगाई को लेकर कांग्रेस ने जीएसटी दरों में पिछले साल की गई कटौती को भी बहस के केंद्र में रखा है। जयराम रमेश ने सोमवार को एक अन्य पोस्ट में कहा कि सितंबर 2025 में की गई जीएसटी दर कटौती को सरकार ने बड़ा बदलाव बताया था, लेकिन बढ़ती महंगाई ने उसके संभावित लाभ को काफी हद तक कम कर दिया है।

उनका दावा है कि कई उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें जीएसटी कटौती से पहले के स्तर के करीब लौट गई हैं और इसके बावजूद खपत में कोई बड़ा उछाल नहीं आया। कांग्रेस ने इसे तेज गति से बढ़ती महंगाई का असर बताया है।

GST कटौती के बाद क्या हुआ?

जीएसटी दरों में बदलाव के करीब एक साल बाद सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में टैक्स दर कम की गई थी, वहां शुरुआती तौर पर कई उत्पादों की कीमतों में कमी आई। लेकिन बाद में कच्चे माल, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने के कारण कंपनियों ने कुछ कीमतें फिर बढ़ाईं।
देश से और खबरें
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कई जरूरी एफ़एमसीजी वस्तुओं पर जीएसटी दर 12 या 18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किए जाने के बाद शुरुआती औसत कीमत कटौती करीब 10 फीसदी रही। लेकिन बाद में कंपनियों ने बढ़ती लागत का सामना करने के लिए कीमतों में लगभग 6-7 फीसदी तक बढ़ोतरी की। एक तथ्य यह भी है कि जीएसटी दर घटने का पूरा लाभ हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं रहा।

रिपोर्ट के अनुसार एफएमसीजी सेक्टर में जीएसटी कटौती के बाद शुरुआती क़ीमत कटौती का कुछ लाभ उपभोक्ताओं को मिला, लेकिन बाद में कच्चे माल, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से कंपनियों ने कीमतों में दोबारा बढ़ोतरी की। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में पार्ले प्रोडक्ट्स के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि उपभोक्ता अभी भी जीएसटी कटौती से 2-3 फीसदी लाभ की स्थिति में हैं, हालांकि आगे लागत बढ़ने पर कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं।

कांग्रेस का सवाल- ‘अच्छे दिन कहां गए?’

महंगाई को लेकर कांग्रेस ने सरकार के पुराने ‘अच्छे दिन’ के राजनीतिक नारे को निशाना बनाया। जयराम रमेश ने पूछा कि अगर रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं तो आम लोगों के लिए राहत कहां है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए दाल, तेल और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमत चिंता का विषय है।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें
इसी संदर्भ में उन्होंने 1977 की एक फिल्म के गीत 'क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम, वो इरादा?' का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर तंज किया।

खाद्य महंगाई में कई अलग-अलग कारण काम करते हैं। किसी वस्तु की कीमत बढ़ने के पीछे उत्पादन, मौसम, फसल की स्थिति, मंडी में आवक, भंडारण, परिवहन, वैश्विक कीमतों और मांग-सप्लाई का संतुलन जैसे कई कारक हो सकते हैं।

फिलहाल कांग्रेस ने केंद्र से महंगाई पर तत्काल कदम उठाने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है।