कांग्रेस ने वेनेजुएला पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर गंभीर चिंता जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करार दिया है। पढ़िए, इसने पूरा क्या कहा है।
पटना कांग्रेस की बैठक के लिए तैयार
कांग्रेस ने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई एकतरफा सैन्य कार्रवाई पर गहरी चिंता जताई है। कांग्रेस ने इसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून का साफ़ उल्लंघन बताया और कहा कि ऐसे क़दम दुनिया की स्थिरता को ख़तरे में डाल सकते हैं। यह बयान कांग्रेस के विदेश विभाग की ओर से सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी किया गया।
कांग्रेस ने कहा, 'पिछले 48 घंटों में अमेरिका ने वेनेजुएला में जो एकतरफ़ा कार्रवाई की है, उस पर हम गहरी चिंता जताते हैं। यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर और कई अंतरराष्ट्रीय संधियों में लिखे अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के स्थापित सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।'
बयान में आगे कहा गया, "राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने नियम-आधारित विश्व व्यवस्था की नींव हैं। बिना संयुक्त राष्ट्र की साफ़ मंजूरी के कोई भी सैन्य कार्रवाई इन सिद्धांतों को कमजोर करती है। इससे पुराने जमाने के 'जंगल का कानून' जैसे नियम फिर लौट सकते हैं और पूरी दुनिया की स्थिरता ख़तरे में पड़ सकती है।'
कांग्रेस ने मांग की कि वेनेजुएला के लोगों की इच्छा को सबसे ऊपर रखा जाए। इसने कहा है कि देश के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल सिर्फ वेनेजुएला के लोगों के भले के लिए हो।
क्यों जारी हुआ यह बयान?
यह बयान अमेरिका की उस सैन्य कार्रवाई के जवाब में आया है, जिसमें 3 जनवरी की रात अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में छापा मारकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया। मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर ड्रग तस्करी और आतंकवाद से जुड़े पुराने आरोपों में मुकदमा चलेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे कानूनी कार्रवाई बताया, लेकिन कई देशों ने इसे 'एक संप्रभु देश के राष्ट्रपति का अपहरण' कहा है। दुनिया के कई हिस्सों में इसका विरोध हो रहा है।
कांग्रेस भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी है और विदेश नीति पर अक्सर सरकार से अलग राय रखती है। इस बयान से कांग्रेस ने साफ़ किया कि वह संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थानों का समर्थन करती है और किसी देश की एकतरफा सैन्य कार्रवाई को गलत मानती है। पार्टी ने वेनेजुएला के लोगों के अधिकारों और उनके संसाधनों पर उनके हक की बात की, जो विकासशील देशों के लिए अहम मुद्दा है।
वेनेजुएला में अब अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज हैं, जो अमेरिका से सहयोग की बात कर रही हैं। लेकिन मादुरो की गिरफ्तारी से लैटिन अमेरिका में तनाव बढ़ गया है। भारत जैसे देश शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन चाहते हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय का बयान
वैसे, वेनेजुएला संकट अब वैश्विक मुद्दा बन चुका है और भारत ने भी इसमें अपनी राय रखी है। भारत ने वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य हमले और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि वेनेजुएला में हो रही घटनाओं पर भारत नजर रख रहा है। भारत ने वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई का समर्थन दोहराया है और सभी पक्षों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करके इलाके में शांति और स्थिरता बनाए रखें। हालाँकि, रूस और चीन सहित कई देशों ने सीधे-सीधे अमेरिका की कार्रवाई को आक्रामकता क़रार देते हुए उसकी निंदा की है।भारत की प्रतिक्रिया संतुलित है। भारत ने न तो अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन किया और न ही सीधी निंदा। बल्कि शांति और बातचीत पर जोर दिया। इससे पहले भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें वेनेजुएला की गैर-जरूरी यात्रा से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई। काराकस में भारतीय दूतावास वहाँ रह रहे भारतीय समुदाय से संपर्क में है और हर संभव मदद मुहैया करा रहा है।