अरुणाचल प्रदेश में ITBP और चीनी सेना की झड़प की खबरों पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और राजनयिक जवाबदेही से जुड़े तीन सवाल पूछे हैं। पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी पर 'चीन के आगे सरेंडर' करने का आरोप लगाया।
अरुणाचल प्रदेश में ITBP और चीनी सेना के बीच लगातार झड़पों की खबरों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय सुरक्षा, चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे और कूटनीतिक बातचीत के नतीजों पर जवाब मांगा। वहीं, पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार चीन के सामने भारतीय हितों से समझौता कर रही है। कांग्रेस ने पूछा है कि अप्रैल 2020 से पहले जिन इलाकों में भारतीय सैनिक गश्त करते थे, क्या आज भी वहां गश्त कर पा रहे हैं? पार्टी का आरोप है कि सरकार चीन के साथ सीमा विवाद पर स्थिति साफ़ करने के बजाय उसे बार-बार क्लीन चिट देती रही है। यह पूरा विवाद तब सामने आया है जब ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश में चीन की सेना के साथ हमारे सैनिकों की झड़प लगातार जारी है।
खड़गे ने पूछे तीन सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चीन को बहुत ज्यादा क्लीन चिट दी जा चुकी है और अब प्रधानमंत्री मोदी को देश के सामने स्थिति साफ़ करनी चाहिए। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए के बीच कथित रूप से जारी आमने-सामने की तनातनी का ज़िक्र किया। खड़गे ने सवाल किया कि डोकलाम और गलवान के बाद क्या सीमा पर एक और गंभीर टकराव की स्थिति बन रही है?खड़गे के मुताबिक, अगस्त में अरुणाचल प्रदेश के तक्सिंग के आसपास चीनी घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी रहने की खबरें चिंताजनक हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या भारतीय सेना की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है और अगर ऐसा है तो देश को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है? खड़गे ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे संवेदनशील मामले में सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और संसद तथा देश को भरोसे में लेना चाहिए।
पहला सवाल: क्या भारतीय गश्त प्रभावित हुई?
कांग्रेस ने सीमा सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि क्या भारतीय सैनिक आज भी उन सभी स्थानों पर गश्त कर पा रहे हैं, जहां वे अप्रैल 2020 से पहले गश्त किया करते थे। पवन खेड़ा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यही सवाल दोहराया। उन्होंने कहा कि सरकार को साफ़-साफ़ बताना चाहिए कि चीन के साथ बातचीत के बाद भारत को क्या हासिल हुआ और क्या पहले की तरह गश्त करने की सुविधा बहाल हो गई है।खेड़ा ने आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के कथित बयान का हवाला देते हुए कहा कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ भारतीय जवानों की झड़पों की ख़बरों को सामान्य स्थिति बताकर खारिज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाक़ों के लोगों की ओर से सोशल मीडिया पर चिंता जताए जाने की ख़बरें भी सामने आई हैं। खेड़ा ने सवाल किया कि यदि सीमा पर सब कुछ सामान्य है तो स्थानीय लोगों की चिंताओं और आईटीबीपी से जुड़ी ख़बरों का जवाब कौन देगा?
गलवान के बाद मोदी के बयान पर फिर उठाए सवाल
कांग्रेस ने वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प का मुद्दा भी उठाया। इस संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारतीय क्षेत्र में न कोई घुसा है और न कोई घुसा हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि इस बयान से चीन को राजनीतिक रूप से राहत मिली और सीमा विवाद पर सरकार की जवाबदेही कमजोर हुई। खेड़ा ने यह भी दावा किया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के एक सम्मेलन में 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट पर भारतीय नियंत्रण नहीं रहने की बात कही गई थी। कांग्रेस का तर्क है कि सीमा पर भारत की स्थिति और गश्त के अधिकारों को लेकर सरकार को साफ़ जानकारी देनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि चीन के साथ संबंधों को सामान्य दिखाने की कोशिश में सीमा से जुड़े गंभीर सवालों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।
दूसरा सवाल: चीन से व्यापार घाटा बढ़ा, फिर रियायतें क्यों?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 के बाद से चीन से भारत का आयात 102 प्रतिशत बढ़ गया है, जबकि चीन के साथ व्यापार घाटा 155 प्रतिशत बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है। खड़गे ने सवाल किया कि गलवान संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद भी भारत की आर्थिक निर्भरता चीन पर क्यों बढ़ती गई?उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के चीन की ओर से भारतीय निर्यात में बाधा आने संबंधी कथित स्वीकारोक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर भारतीय कंपनियों को चीन के साथ व्यापार में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, दूसरी ओर सरकार चीन से जुड़े निवेश पर प्रतिबंधों में ढील देने और पात्र कंपनियों को उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना यानी PLI का लाभ देने पर विचार कर रही है। खड़गे ने सवाल किया, 'क्या मेक इन इंडिया अब इंपोर्ट फ्रॉम चाइना बन गया है?' कांग्रेस का कहना है कि चीन के साथ आर्थिक संबंधों में बदलाव करते समय सरकार को यह बताना चाहिए कि भारतीय उद्योगों, रोजगार और घरेलू विनिर्माण को इससे क्या फायदा मिल रहा है।
व्यापार और वीजा नीति पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा करीब 99 अरब डॉलर से बढ़कर 112 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चीन से जुड़े निवेश प्रतिबंधों, यात्रा संबंधी पाबंदियों और चीनी कर्मचारियों को वीजा देने के मामले में रियायतें दी हैं, लेकिन इसके बदले भारत को कोई ठोस लाभ नहीं मिला। खेड़ा ने प्रेस नोट-3 का भी जिक्र किया। यह व्यवस्था चीन सहित पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर लागू प्रतिबंधों से जुड़ी है। खेड़ा का आरोप है कि चीन की मांग के अनुरूप इन प्रतिबंधों में बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि चीन से जुड़े निवेश और वीजा नीति में बदलाव से भारतीय कंपनियों और छोटे उद्योगों को क्या फायदा हुआ है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चीन से प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी MSME पर दबाव बढ़ रहा है।
तीसरा सवाल: मोदी-शी मुलाकातों से क्या हासिल?
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने भारत और चीन के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठकों और कूटनीतिक बातचीत के नतीजों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 मुलाकातों और संवादों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जुड़े विशेष प्रतिनिधियों की 25 बैठकों तथा WMCC यानी सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने कार्यकारी तंत्र की 36 बैठकों का ज़िक्र किया।
खड़गे ने पूछा कि इतनी बैठकों और शिखर सम्मेलनों के बावजूद भारत को जमीनी स्तर पर क्या हासिल हुआ है? क्या मई 2020 से पहले की गश्त के अधिकार पूरी तरह बहाल हो गए हैं?
कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि कूटनीतिक बातचीत का मूल्यांकन केवल नेताओं की मुलाकातों या साझा तस्वीरों से नहीं किया जा सकता है। सरकार को यह बताना चाहिए कि सीमा पर वास्तविक स्थिति में क्या बदलाव आया है और भारत के सुरक्षा हित किस हद तक सुरक्षित हुए हैं।
खड़गे ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों पर कांग्रेस को पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही ज़रूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से विपक्ष पर हमला करने के बजाय संसद और देश को भरोसे में लेने की मांग की।
चीन के सामने सरेंडर हो रही सरकार: खेड़ा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार की चीन नीति को लेकर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भारत चीन की शर्तें मानता जा रहा है, जबकि सीमा पर तनाव, व्यापार घाटे और भारतीय उद्योगों से जुड़े सवाल बने हुए हैं। खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन के सामने सख्त रुख दिखाने के बजाय विपक्ष पर हमला करते हैं। उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच कई मुलाकातों के बावजूद लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील मुद्दों पर क्या ठोस परिणाम निकले हैं।
उन्होंने सरकार की चीन नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पर क्या स्थिति है और भारत के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि चीन से जुड़े मुद्दों पर जानकारी सामने आने के बाद सरकार की ओर से स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की जाती है। उन्होंने ITBP के महानिदेशक के कथित बयान के बाद आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किए जाने की संभावित चर्चा का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि सरकार सीमा की स्थिति पर खुलकर जानकारी क्यों नहीं देती।
टनल बोरिंग मशीनों के मामले में भी चीन पर आरोप
पवन खेड़ा ने चीन से जुड़े एक अन्य आर्थिक और तकनीकी मामले का ज़िक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक जर्मन कंपनी को भारत के लिए टनल बोरिंग मशीनें भेजने से रोका गया। टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। खेड़ा के मुताबिक, चीन ने कथित तौर पर जर्मन कंपनी की फैक्ट्री पर दबाव डालकर भारत को इन मशीनों की आपूर्ति रुकवा दी, जिससे भारत को नुकसान हुआ।राष्ट्रीय सुरक्षा पर संसद में जवाब दे सरकार: कांग्रेस
कांग्रेस ने अरुणाचल प्रदेश में कथित झड़पों और सीमा पर गश्त को लेकर उठे सवालों को केवल सैन्य मामला नहीं, बल्कि सरकार की राजनीतिक और कूटनीतिक जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बताया है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश की सुरक्षा के सवालों पर सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
पवन खेड़ा ने भी कहा कि कांग्रेस ITBP और सीमा पर तैनात सभी जवानों की बहादुरी को सलाम करती है। उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि चीन के साथ बातचीत और आर्थिक संबंधों में बदलाव किए गए हैं तो उनके बदले भारत को क्या हासिल हुआ है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी इससे पहले केंद्र सरकार पर चीन के सामने रियायतें देने और सीमा पर तनाव को लेकर चुप्पी साधने का आरोप लगाया था। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में गश्त के कुछ बिंदुओं पर भारत की पहुंच प्रभावित होने का दावा किया।