कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबले के पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखने संबंधी बयान पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने इसे होसबले की हालिया अमेरिका यात्रा से जोड़ते हुए आरएसएस पर अमेरिकी प्रभाव का आरोप लगाया है।
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने एक्स पर होसबले के पीटीआई वीडियो इंटरव्यू का क्लिप शेयर करते हुए लिखा, "ऐसा लगता है कि वो प्रधानमंत्री और अमेरिका की मर्जी के अनुसार काम कर रहे हैं। जिसने उन्हें और पूरे आरएसएस को प्रभावित कर दिया है। उनके सहयोगी ने ऐसा स्वीकार भी किया है।" कांग्रेस पार्टी लगातार कह रही है कि आरएसएस एक तरफ पाकिस्तान की आड़ में भारत में साम्प्रदायिक माहौल बनाता है तो दूसरी तरफ वो पाकिस्तान से बातचीत की भी वकालत करता है। जबकि पहलगाम हमले को अब भुलाने की कोशिश की जा रही है।
जयराम रमेश ने आगे कहा, "कल्पना कीजिए, अगर यह बयान किसी और ने दिया होता तो भक्त ब्रिगेड और विभिन्न टीवी चैनल कितना उबलते-चिल्लाते।"

होसबाले ने पाकिस्तान पर क्या कहा

होसबले ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा न होने के बावजूद भारत को संवाद के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। उन्होंने कहा, "देश की सुरक्षा और आत्मसम्मान की रक्षा करनी होगी और सरकार को इसका ध्यान रखना चाहिए। लेकिन साथ ही हमें दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। हमें हमेशा संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए।"
उन्होंने सिविल सोसाइटी, लोगों के बीच संपर्क, खेल, विज्ञान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे संपर्कों को "और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए"। होसबले ने पाकिस्तान को एक तरह का "पिनप्रिक" (चुभन) करार दिया लेकिन सुरक्षा के साथ-साथ संवाद की जरूरत पर बल दिया।
यह बयान आरएसएस के शताब्दी वर्ष में पश्चिमी देशों में आउटरीच के दौरान आया है। होसबले हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन की यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (सैन फ्रांसिस्को) और वॉशिंगटन के हडसन इंस्टीट्यूट में कार्यक्रमों को संबोधित किया। उन्होंने भारतीय डायस्पोरा, बुद्धिजीवियों और अकादमिक्स से मुलाकात की।

राम माधव के बयान पर राहुल ने हमला बोला था 

कांग्रेस ने पहले भी आरएसएस नेता राम माधव के अमेरिका में दिए बयानों पर हमला बोला था। राहुल गांधी ने आरएसएस को "राष्ट्रीय सरेंडर संघ" करार दिया था और आरोप लगाया था कि भारत में "फर्जी राष्ट्रवाद" और अमेरिका में "पूरी तरह सरेंडर" की मानसिकता दिखती है। माधव ने बाद में अपने बयान को "तथ्यात्मक रूप से गलत" बताते हुए माफी मांगी थी।
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी सवाल किया कि 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले (बैसरन घाटी) के बाद क्या बदल गया है कि पाकिस्तान के साथ संवाद की बात की जा रही है। तिवारी ने कहा, "पाकिस्तान ने पहले दिए वादों का पालन किया है कि वह आतंकवाद को राज्य नीति के रूप में इस्तेमाल नहीं करेगा? क्या कोई हाइपर पावर (अमेरिका) के दबाव के कारण यह बात हो रही है?"
उन्होंने लोगों के बीच संपर्क पर कहा कि पूर्ण स्पेक्ट्रम एंगेजमेंट की जरूरत है, लेकिन इससे पाकिस्तान की आतंक नीति में बदलाव नहीं आएगा।

विपक्ष का आरएसएस पर आरोप

विपक्षी दलों आरोप लगाते रहे हैं कि पाकिस्तान पर सख्त रुख दिखाकर आरएसएस-बीजेपी देश में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं। खासकर चुनाव में तो यह आम बात हो गई है। वे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का हवाला देकर भारत के मुस्लिम समुदाय को "देश-विरोधी" करार देने, "लव जिहाद", "घुसपैठ" जैसे मुद्दों को उछालकर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कराते हैं। चुनावों में "पाकिस्तान जिंदाबाद" के नारे, "घर-घर राम" बनाम "पाकिस्तान समर्थक" का नैरेटिव बनाकर हिंदू वोट बैंक को एकजुट करते हैं, जबकि वास्तविक मुद्दों जैसे रोजगार, महंगाई से ध्यान भटकाते हैं। आलोचकों का कहना है कि आरएसएस बीजेपी की पाकिस्तान पर रणनीति सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाती है और हिंदू-मुस्लिम नफरत को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है।