राज्‍यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को कांग्रेस ने गैर-कानूनी और पक्षपाती क़रार दिया है। इसने कहा है कि दो साल से ज़्यादा सजा वाले और आरोप तय हुए मामलों में ही हलफनामे में इसका ज़िक्र किया जाना ज़रूरी है। कांग्रेस ने कहा कि नटराजन के ख़िलाफ़ कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं होने के बावजूद उनकी उम्मीदवारी रद्द की गई। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात में तुरंत यह फैसला वापस लेने की मांग की है। इसने कहा है कि कांग्रेस को चुनाव आयोग द्वारा आश्वस्त किया गया है कि ईसीआई इस मामले को देखेगा।

चुनाव आयोग से मुलाक़ात के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन पर कोई आपराधिक केस दर्ज ही नहीं है, जिसे उन्हें घोषित करना था। उन्होंने कहा है कि नटराजन को सिर्फ हैदराबाद की एक अदालत से नोटिस आया था, जो कि केस का शुरुआती स्टेज भी नहीं है।
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सिंघवी ने क़ानूनी प्रक्रिया समझाते हुए कहा, 'चुनाव आयोग के ही अपने कानून- रिप्रजेंटेशन ऑफ़ द पीपल्स एक्ट की धारा 33ए के अनुसार, केवल उन मामलों में केस का खुलासा करना ज़रूरी है जहाँ चार्ज फ्रेम हो चुके हों और सजा 2 साल से ज़्यादा हो सकती हो। नटराजन को सिर्फ नोटिस मिला था। अदालत ने अभी संज्ञान तक नहीं लिया है। इसलिए कोई आपराधिक मामला अस्तित्व में ही नहीं है।' सिंघवी ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी का फैसला पूरी तरह गलत और पक्षपाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग को विस्तार से सबूत देकर बताया है कि यह फ़ैसला बदला जाना चाहिए।

नामांकन रद्द करने को गैर कानूनी बताने का आधार क्या?

सिंघवी ने कहा, 'चार्ज फ्रेम करना कोर्ट का काम है, जज करता है। जैसा कि कोई भी छोटा बच्चा या पहले साल का क़ानून का छात्र जानता है- सबसे पहले कोई प्राइवेट शिकायत करता है। वो शिकायत बेबुनियाद भी हो सकती है। दूसरा चरण है- मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना, जो एक स्वतंत्र न्यायिक प्रक्रिया है। श्रीमती नटराजन को सिर्फ नोटिस मिला था कि कोर्ट में आकर बताएँ कि उन पर संज्ञान क्यों न लिया जाए। यानी संज्ञान लेने से पहले का नोटिस था। संज्ञान लिए बिना कोई आपराधिक केस ही नहीं बनता। सिर्फ किसी ने कोई आरोप लगा दिया, इसका मतलब केस शुरू हो गया- ऐसा नहीं है। फिर भी RO ने नटरजन जी का नामांकन रद्द कर दिया, जबकि संज्ञान तक नहीं लिया गया था। यानी कोई केस ही नहीं था जिसका खुलासा करना होता।'
कांग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि धारा 33ए साफ़ कहती है कि संज्ञान के बाद ही जांच होती है, फिर चार्जशीट आती है। उन्होंने कहा कि RO के आदेश में खुद 'संज्ञान' शब्द इस्तेमाल किया गया है। लेकिन संज्ञान लिया ही नहीं गया था। उन्होंने कहा, 'हमने चुनाव आयोग को बताया कि उसके पास आर्टिकल 324 के तहत बहुत बड़ी शक्ति है। यह संवैधानिक, असीमित और न्याय करने की शक्ति है, इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए। यही हमारी मांग है।'

नामांकन में छुपाने वाली कोई बात नहीं: वेणुगोपाल

के.सी. वेणुगोपाल ने कहा है कि नामांकन में कोई ग़लती या छुपाने वाली बात नहीं है। यह बीजेपी की साज़िश है, जो कांग्रेस की सीट हड़पना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग द्वारा आश्वस्त किया गया है कि वह इस मामले को देखेगा।

बीजेपी ने रद्द कराया नामांकन

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मध्य प्रदेश में बीजेपी उम्मीदवार राहुल कोठारी की शिकायत पर रद्द किया गया। बीजेपी का आरोप था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में हैदराबाद कोर्ट का नोटिस छुपाया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीनाक्षी के नामांकन रद्द होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नटराजन आपराधिक रिकॉर्ड छुपा रही थीं।

इस फ़ैसले के बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर धरना दिया। मीनाक्षी नटराजन ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी पर संविधान और लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद विवेक तन्खा ने बुधवार को कहा था, 'अब वोट चोरी से नेक्स्ट लेवल पर सीट चोरी का सिलसिला शुरू हो गया है। मीनाक्षी जी का राज्य सभा का नामांकन निरस्त नहीं हुआ है। प्रजातंत्र की हत्या हुई है। यह लोकतंत्र की हत्या के अलावा कुछ नहीं है।'
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मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा, "एक गांधीवादी नारी से डर गई बीजेपी! कांग्रेस की जीत और एक ईमानदार महिला प्रत्याशी की बढ़ती स्वीकार्यता से घबराई भाजपा का असली चेहरा आज मध्यप्रदेश विधानसभा में बेनकाब हो गया। जब कांग्रेस की जीत स्पष्ट दिखाई दे रही है, तब बीजेपी हर प्रकार के साम, दाम, दंड, भेद का सहारा लेकर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। बीजेपी के गुंडों ने आज लोकतंत्र के मंदिर को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की कोशिश की। नारा 'नारी वंदन' का, लेकिन चरित्र 'नारी अपमान' का, यही बीजेपी की असली पहचान है। अब देखते हैं कि बीजेपी लोकतंत्र की इस लड़ाई को कितनी दूर तक गुंडागर्दी और दबाव की राजनीति के सहारे लड़ना चाहती है। कांग्रेस एकजुट है, लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ मजबूती से खड़ी है और सत्य, संविधान तथा जनमत की ताकत से इस चुनाव में विजय प्राप्त करेगी।"

अब तीनों सीटें बीजेपी के पाले में?

बहरहाल, नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की सभी तीनों राज्‍यसभा सीटें बीजेपी के पास चली गई हैं। कांग्रेस अब चुनाव आयोग से उम्मीद कर रही है कि वह अपने संवैधानिक अधिकार अनुच्छेद 324 का इस्तेमाल करते हुए गलती सुधारेगा। अभी तक चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।