कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला पर बीजेपी के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह क्यों कहा कि ओम बिड़ला की लोकसभा स्पीकर की ऑथोरिटी पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं?
लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के ख़िलाफ़ अब कांग्रेस की महिला सांसदों ने एक तरह से मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कहा है कि स्पीकर के कार्यकलापों से लगता है कि ओम बिड़ला अब स्पीकर के रूप में निर्णय नहीं ले पा रहे हैं और उनके फ़ैसलों पर बीजेपी का दबाव है। महिला सांसदों ने सोमवार को बिड़ला को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सत्ताधारी बीजेपी के दबाव में स्पीकर ने उनके ख़िलाफ़ गंभीर और झूठे आरोप लगाए हैं। यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में न आने के मामले में स्पीकर द्वारा कारण बताए जाने के बाद हो रहा है।
पत्र में कांग्रेस की महिला सांसदों ने लिखा है कि स्पीकर ने साफ़ तौर पर सत्ताधारी पार्टी के दबाव में आकर प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को बचाने के लिए उनके ख़िलाफ़ गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'हमें निशाना इसलिए बनाया जा रहा है क्योंकि हम लगातार पीएम मोदी की जन-विरोधी सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रही हैं और उनसे जवाबदेही मांग रही हैं। पीएम के सदन में न आने की वजह हमारी कोई धमकी नहीं थी, यह उनका डर था।'
पत्र पर प्रियंका गांधी वाड्रा, ज्योति मणि, आर. सुधा, वर्षा गायकवाड़, ज्योत्स्ना महंत और अन्य महिला सांसदों के हस्ताक्षर हैं। प्रियंका गांधी ने पत्र के बारे में पत्रकारों से कहा, 'स्पीकर पर इतना दबाव है जो ठीक नहीं है। पीएम पर हाथ उठाने या कुछ करने का कोई सवाल ही नहीं है। 11 महिला सांसद हैं, वे सभी गंभीर सांसद हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'स्पीकर को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था। सरकार ने उन पर दबाव डाला है इसलिए उन्होंने ऐसा कहा, क्योंकि मोदी जी के पास उस दिन सदन में आने की हिम्मत नहीं थी। स्पीकर उनके लिए सफाई दे रहे हैं। यह ग़लत है।'
कांग्रेस का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान परंपरा के मुताबिक प्रधानमंत्री को जवाब देना होता है। लेकिन पिछले चार दिनों से लगातार विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। पार्टी ने इसे अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि यह अस्वीकार्य है।
महिला सांसदों ने कहा कि इंडिया गठबंधन के 8 सांसदों को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक बीजेपी सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों पर अश्लील और गाली-गलौज वाली भाषा में बोलने की इजाजत दी गई।
ओम बिड़ला पर सवाल क्या उठाए?
महिला सांसदों ने लिखा है कि जब हमने आपसे मुलाक़ात कर अश्लील भाषा बोलने वाले बीजेपी सांसद के निलंबन और न्याय की मांग की तो आपने इसे माना कि बेहद गंभीर ग़लती हुई है और 4 बजे वापस आने के लिए कहा। उन्होंने आगे कहा, 'फिर मिलने पर आपने कहा कि इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया का आप इंतज़ार कर रहे थे। यह संकेत देता है कि आप ऐसे मामलों में अब निर्णय लेने वाले नहीं होते हैं। लोकसभा स्पीकर के रूप में आपके प्राधिकार पर गंभीर सवाल खड़ा होता है।'
पत्र में आगे कहा गया है कि शाम 5 बजे परंपरा तोड़कर पीएम को बोलना था, लेकिन इंडिया गठबंधन के सभी सदस्य विरोध में खड़े हो गए और पीएम सदन में नहीं आए। अगले दिन स्पीकर ने सत्ताधारी पार्टी के दबाव में आकर कांग्रेस की महिला सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए। पीएम को लेकर क्या बोले थे बिड़ला?
स्पीकर ओम बिड़ला ने पिछले गुरुवार को सदन में कहा था कि उन्हें 'ठोस जानकारी' मिली थी कि कई कांग्रेस सदस्य पीएम की सीट की तरफ़ जा सकते हैं और 'कुछ अप्रत्याशित काम' कर सकते हैं। इसलिए उन्होंने पीएम से सदन न आने की गुजारिश की ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। स्पीकर ने कहा था कि अगर ऐसा हुआ तो देश की लोकतांत्रिक संरचना को नुक़सान पहुँचता।
कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसद हैं, जो प्यार, शांति, संवैधानिक मूल्यों और मानव गरिमा में विश्वास रखते हैं। वे हिंसा या धमकी में विश्वास नहीं करते। वे बहादुर महिला प्रतिनिधि हैं जिन्हें डराकर चुप नहीं किया जा सकता।
पत्र में स्पीकर से अपील की गई है कि वे लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक की तरह काम करें। उन्होंने लिखा, 'यह साफ़ है कि आप सत्ताधारी पार्टी के लगातार दबाव में हैं। हम फिर से आपसे अनुरोध करते हैं कि लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक बनें। हम इस कोशिश में आपके साथ खड़े हैं और पूरा समर्थन देंगे।'कांग्रेस ने कहा कि इतिहास स्पीकर को याद रखे कि उन्होंने मुश्किल हालात में सही काम किया और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखी। न कि उन पर दबाव डालने वालों के आगे झुक गए, जो संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने और लोकतंत्र को नुक़सान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
यह घटना संसद में बढ़ते विवाद को दिखाती है। स्पीकर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव की भी बात चल रही है। अब देखना है कि इस पत्र के बाद क्या होता है और सदन की कार्यवाही कैसे आगे बढ़ती है।