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भारतीय कंपनियों की वैक्सीन लोगों तक आने में वक़्त लगेगा!

इंग्लैंड में भले ही टीका लगाया जाने लगा है, लेकिन भारत में किसी भी कोरोना वैक्सीन को हरी झंडी मिलने के लिए अभी और इंतज़ार करना पड़ेगा। जिन तीन कंपनियों ने वैक्सीन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन किया था उन्होंने वैक्सीन से जुड़ी पूरी जानकारी मुहैया नहीं कराई थी। इसीलिए किसी को भी मंजूरी नहीं मिली है। इसका मतलब यह नहीं है कि ये तीनों वैक्सीन नामंजूर कर दी गई हैं। उन कंपनियों से कहा गया है कि वे वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े पूरे आँकड़े लेकर फिर से आएँ और तब इस पर विचार किया जाएगा।

तीनों कंपनियों में से एक सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया है जिसने इंग्लैंड की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी व फ़ार्मा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन के साथ क़रार किया है। दूसरी कंपनी देश में कोरोना वैक्सीन निर्मित करने वाली भारत बायोटेक है। विशेष कमेटी ने इन दोनों को कहा है कि वे आख़िरी चरण के ट्रायल में आए सुरक्षा और प्रभाविकता के आँकड़े लेकर आएँ। तीसरी अमेरिका की कंपनी फ़ाइज़र है जिसने आँकड़े जमा करने के लिए और समय माँगा है। 

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मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सबजेक्ट एक्सपर्ट कमेटी यानी सीईसी ने बुधवार को पहली बार बैठक की और इसमें तय हुआ है कि अब अगली बैठक में तीनों कंपनियों द्वारा पेश किए जाने वाले आँकड़ों पर विचार किया जाएगा। कहा जा रहा है कि अगली बैठक की तारीख़ तय नहीं है। 

नियम यह है कि वैक्सीन के तीन चरणों के ट्रायल के आँकड़ों को विशेषज्ञों की एक कमेटी के सामने पेश करना होता है। इस कमेटी की सलाह पर ही ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया यानी डीसीजीआई आख़िरी फ़ैसला लेता है। इस प्रक्रिया में हफ़्तों लग जाते हैं। तीन चरणों के ट्रायल में से पहले चरण में सुरक्षा, दूसरे में प्रभाविकता यानी शरीर में प्ररिरक्षा की मज़बूती और तीसरे चरण में वैक्सीन की व्यापक प्रभाविकता व दूसरे प्रभावों की परख की जाती है।

जैसा कि मीडिया में रिपोर्टें आई हैं उनमें कहा गया है कि सीरम इंस्टिट्यूट से कोविशील्ड नाम की इसकी वैक्सीन के भारत में फ़ेज दो और तीन के क्लिनिकल ट्रायल के सुरक्षा से जुड़े आँकड़े माँगे गए हैं। इसके अलावा इंग्लैंड और भारत में ट्रायल के प्रभाविकता के आँकड़े और इंग्लैंड के नियामक ने जो आपात मंजूरी के लिए किए गए आवेदन पर मूल्यांकन किया है उसकी रिपोर्ट भी माँगी है।

एक्सपर्ट कमेटी ने इस पर ग़ौर किया है कि सीरम इंस्टिट्यूट ने 14 नवंबर तक सुरक्षा से जुड़ा आँकड़ा ही पेश किया है। हालाँकि रिपोर्टें हैं कि इस कंपनी ने तीनों चरणों के ट्रायल पूरे कर लिए हैं, लेकिन इन ट्रायल से जुड़े विस्तृत आँकड़े अभी तक सामने नहीं आए हैं।

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार सीरम इंस्टिट्यूट ने विदेशों (यूके, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका) के साथ-साथ भारत में इसके ट्रायल में वैक्सीन की प्रभाविता के आँकड़े और भारत में आख़िरी चरण के परीक्षणों के सुरक्षा के आँकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस फर्म ने 1,600 प्रतिभागियों पर केवल अपने चरण 2 और 3 के ट्रायल के अंतरिम सुरक्षा आँकड़े जमा किया और इसके साथ दूसरे देशों में चल रहे ट्रायल का अतिरिक्त आँकड़ा भी दिया। 

यह सीरम इंस्टिट्यूट वही है जिसकी वैक्सीन की तैयारियों का जायजा लेने के लिए हाल ही प्रधानमंत्री मोदी ने पुणे का दौरा किया था। तब उन्होंने भारत बायोटेक और जायडस कैडिला की लैब का भी दौरा किया था।

corona vaccine emergency use authorisation in india   - Satya Hindi

सीरम इंस्टिट्यूट वैक्सीन बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। यह कंपनी अपनी वैक्सीन को लेकर काफ़ी लंबे-चौड़े दावे करती रही है। इसने तो वैक्सीन की क़ीमतें भी घोषित कर दी हैं। 

सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला कह चुके हैं कि सरकार को वैक्सीन की एक डोज 3-4 डॉलर की पड़ेगी। यानी क़रीब 300-400 रुपये की। लेकिन आम लोगों के लिए यह 4-5 डॉलर का ख़र्च आएगा। यानी क़रीब 400-500 रुपये। वैक्सीन की दो डोज के लिए इसके दोगुने रुपये लगेंगे। 

वीडियो में देखिए, कोरोना वैक्सीन के क्या हैं ख़तरे?
प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद पूनावाला ने संवाददाताओं से कहा था, 'अभी तक हमारे पास भारत सरकार से लिखित में कुछ भी नहीं है कि वे कितनी खुराक खरीदेंगे। लेकिन संकेत है कि यह जुलाई 2021 तक 300-400 मिलियन खुराक होगी।' उन्होंने कहा था कि 'हम आपातकालीन उपयोग के लिए अगले दो हफ्तों में आवेदन करने की प्रक्रिया में हैं।'
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देश में विकसित भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का अभी तीसरे चरण का ट्रायल किया जा रहा है। इसने भी पहले और दूसरे चरण की सुरक्षा और प्रभाविकता के आँकड़े विशेष कमेटी के पास दिए हैं। भारत बायोटेक से भी इस कमेटी ने कहा है कि तीसरे चरण के ट्रायल में इसकी सुरक्षा और प्रभाविकता के आँकड़े पेश किए जाने चाहिए ताकि इसकी मंजूरी पर विचार किया जा सके। 

फ़ाइज़र को इंग्लैंड में आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल चुकी है और इसका टीका भी लगाया जाने लगा है। इसी आधार पर फ़ाइज़र ने भारत में क्लिनिकल ट्रायल से छूट देने के साथ डीसीजीआई में आवेदन किया है।

न्यू ड्रग्स एंड क्लिनिकल ट्रायल नियम, 2019 के मुताबिक़ कोई कंपनी इस तरह की छूट माँग सकती है। ऐसा तभी हो सकता है जब उस वैक्सीन को दूसरे किसी देश में मंजूरी दी गई हो और इसे वहाँ से खरीदा जा रहा हो। 

रिपोर्टों में अब कहा जा रहा है कि तीनों कंपनियों को पूरे आँकड़े के साथ फिर बुलाया है और तीनों को अलग-अलग समय पर पेश होने को कहा गया है। यानी जब तक वे अगली बार पूरे आँकड़े नहीं पेश करते हैं तब तक तो इंतज़ार ही करना पड़ेगा। क्या इस साल यह संभव हो भी पाएगा?

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