जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जारी विवाद के बीच सीआरपीएफ़ के प्रमुख ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने एक कार्यक्रम में जवानों से कहा कि 'आप निडर होकर ड्यूटी करें, बाकी मैं दूख लूंगा'।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ़ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का यह बयान तब सामने आया है जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर दमनकारी बल प्रयोग किया गया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठी जार्च किया गया, आँसू गैस के गोले छोड़े गए और कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। आरोप तो गोली चलने के भी लगे हैं लेकिन पुलिस ने इस आरोप को खारिज किया है। इन मुद्दों पर संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है। इस मामले को लेकर अब विपक्ष सीधे देश के गृहमंत्री अमित शाह पर सवाल उठा रहा है कि आख़िर इस दमनकारी कार्रवाई का आदेश किसने दिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमित शाह का इस्तीफ़ा तक मांग लिया है। और अब इसी बीच सीआरपीएफ़ प्रमुख का यह बयान सामने आया है।
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सीआरपीएफ़ डीजी क्या बोले?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सीआरपीएफ के इन्वेस्टिचर सेरिमनी यानी अलंकरण सामारोह में सोमवार को जवानों को संबोधित करते हुए डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहा, 'सीआरपीएफ के महानिदेशक के रूप में मैं आप सभी को भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि चाहे आप किसी ऑपरेशनल बटालियन में हों या कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली यूनिट में, यदि आपने अपनी ड्यूटी ईमानदारी और नियमों के अनुसार निभाई है तो आपके फ़ैसलों और कार्रवाई की जिम्मेदारी मैं लूंगा।'

उन्होंने आगे कहा, 'आप सभी निडर होकर अपना कर्तव्य निभाइए। जहां भी जवाबदेही लेने की ज़रूरत होगी, मैं सीआरपीएफ प्रमुख के रूप में वह जिम्मेदारी लूंगा।'

जंतर-मंतर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेतृत्व में छात्र संसद मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारी कथित नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे। 

दिल्ली पुलिस ने संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई गई, आँसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद आरोप लगे कि कुछ छात्रों को पैलेट गन से भी चोट लगी।

कई छात्र नेताओं और विपक्षी दलों ने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों की आंखों और शरीर में पैलेट जैसी चोटें आईं। दिल्ली पुलिस और सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है। लेकिन अब ऐसे दस्तावेज सामने आ गए हैं जिनमें दावा किया गया है कि छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।

रैपिड एक्शन फोर्स पर उठे सवाल

जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर कानून-व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ़ की भी थी, जो सीआरपीएफ़ की विशेष इकाई है। यह बल 1992 में दंगा नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए बनाया गया था।

घटना के बाद आरएएफ़ की कार्रवाई की आंतरिक समीक्षा की गई, जिसमें कई कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया। द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि आरएएफ़ की महानिरीक्षक सीमा धुंधिया ने अधिकारियों की बैठक में कहा कि 20 जुलाई को भीड़ नियंत्रण के दौरान अपनाया गया 'फोर्स ग्रेडिएंट' यानी बल प्रयोग का स्तर तय मानकों और आरएएफ़ के प्रशिक्षण के अनुरूप नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार बताया गया कि समीक्षा में यह भी पाया गया कि जवानों को तैनाती से पहले पर्याप्त और समय पर ब्रीफिंग नहीं दी गई। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों से हाल ही में स्थानांतरित जवानों को सीधे दिल्ली में भीड़ नियंत्रण की जिम्मेदारी दे दी गई। जबकि अलग-अलग राज्यों की कानून-व्यवस्था की परिस्थितियों के अनुसार प्रशिक्षण और रणनीति अपनाने की ज़रूरत होती है।

'भीड़ नियंत्रण का तरीका अलग होना चाहिए'

अंग्रेज़ी अख़बार ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि सीमा धुंधिया ने कथित तौर पर अधिकारियों से कहा कि जम्मू-कश्मीर या अन्य आतंकवाद प्रभावित इलाकों में काम करने वाले जवानों का अनुभव अलग होता है, जबकि दिल्ली, बिहार, असम और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भीड़ नियंत्रण के दौरान अलग और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना ज़रूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि बल का इस्तेमाल केवल उतना ही किया जाए, जितनी ज़रूरत हो।

पहले चेतावनी, फिर सीमित बल प्रयोग

बैठक में अधिकारियों को यह भी याद दिलाया गया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार जवानों को निर्देश दिए गए कि 'पहले प्रदर्शनकारियों को साफ़ चेतावनी दी जाए। हालात के अनुसार क्रमबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए। ज़रूरत होने पर ही लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य स्वीकृत उपाय अपनाए जाएं। बल प्रयोग हमेशा निष्पक्ष, संतुलित और संवेदनशील तरीके से हो।'

तीन लोगों को लगी पैलेट गन जैसी चोट

आंतरिक समीक्षा के दौरान यह भी चर्चा हुई कि संसद मार्च के दौरान तीन लोगों को पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। इसी वजह से पूरी कार्रवाई की समीक्षा की गई। हालाँकि सरकार की ओर से अब तक यह आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था।

विपक्ष लगातार उठा रहा है सवाल

जंतर-मंतर की घटना को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ दमनकारी बल का प्रयोग किया गया। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए थे।

एक ओर सीआरपीएफ प्रमुख ने जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें निडर होकर काम करने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर आरएएफ़ की आंतरिक समीक्षा में भीड़ नियंत्रण के दौरान कई प्रक्रियागत कमियों की ओर संकेत दिया गया है। जंतर-मंतर की कार्रवाई, कथित पैलेट गन विवाद और छात्र आंदोलन पर पुलिस बल प्रयोग को लेकर राजनीतिक बहस अभी भी जारी है।