सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें लंदन की नहीं, बल्कि 29 नवंबर 2025 को दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित नेशनल लेवल बार एंड बेंच बैडमिंटन टूर्नामेंट की हैं। इसमें CJI सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ आदि की तस्वीरें थीं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को न्यायपालिका से जुड़ी एक ऑनलाइन फेक न्यूज सामग्री को 24 घंटे में हटाने का निर्देश दिया है। जिसमें दावा किया गया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज तथा केंद्रीय कानून मंत्री लंदन में 7 जून 2026 को आयोजित बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा ले रहे थे। कोर्ट ने इस सामग्री को “एक्स-फेसी फॉल्स, मेलिशियस और ज्यूडिशियरी के लिए डिरोगेटरी” करार दिया है।
न्यायमूर्ति तेजस कारिया की एकल पीठ ने बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिका में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स, यूट्यूब वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट्स और अन्य प्रकाशनों को इसे हटाने की मांग की गई थी जो इस फर्जी खबर को फैला रहे थे। अदालत ने अपना आदेश सुनाते हुए इसे 24 घंटे में हटाने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने जनता को भी किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन, वेब होस्टिंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य ऑनलाइन माध्यम पर ऐसी सामग्री अपलोड करने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने, शेयर करने या फैलाने से रोक दिया है।
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- जस्टिस कारिया ने कहा, “यह स्पष्ट है कि फर्जी कंटेंट के माध्यम से फैलाई गई जानकारी भ्रामक है और इसके पीछे ज्यूडिशियरी की प्रतिष्ठा को बदनाम करने का इरादा है। ऐसी फर्जी और भ्रामक सामग्री के आधार पर न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाना किसी भी तथ्यात्मक या सबूत के आधार का समर्थन नहीं किया जा सकता है।”
- कोर्ट ने आगे कहा कि यह सामग्री आलोचना, टिप्पणी या निष्पक्ष रिपोर्टिंग नहीं है, बल्कि गलत तथ्यात्मक दावों पर आधारित है। “संवैधानिक अदालतों के खिलाफ ऐसी फर्जी और भ्रामक जानकारी का प्रसार न्याय व्यवस्था में जन विश्वास को गंभीर और कभी न पूरा होने वाला नुकसान पहुंचा सकता है।”
याचिकाकर्ता का पक्ष
BAI ने कोर्ट को बताया कि कई मीडिया रिपोर्ट्स, यूट्यूब वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया गया कि CJI सहित 100 से अधिक जज और केंद्रीय कानून मंत्री लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में गए थे, जिससे न्यायिक स्वतंत्रता प्रभावित हुई। ये आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत थे और पुरानी तस्वीरों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने क्या कहा
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें लंदन की नहीं, बल्कि 29 नवंबर 2025 को दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित नेशनल लेवल बार एंड बेंच बैडमिंटन टूर्नामेंट की हैं। इनमें CJI सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और किरण रिजिजू की सेरेमोनियल ओपनिंग मैच की तस्वीरें हैं।
मेहता ने स्पष्ट किया कि CJI कभी भी लंदन में किसी बैडमिंटन टूर्नामेंट या स्पोर्ट्स इवेंट में शामिल नहीं हुए। जून 2026 में CJI लंदन में आधिकारिक दौरे पर थे, जहां उन्होंने UK सुप्रीम कोर्ट के साथ एंगेजमेंट किए और आर्बिट्रेशन लॉ तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर संबोधन दिए। मेघवाल और रिजिजू उस अवधि में लंदन नहीं गए थे। केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जज व्यक्तिगत क्षमता में लंदन गए थे।
सरकारी स्पष्टीकरण
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट और कानून मंत्रालय ने भी स्पष्टीकरण जारी कर कहा था कि जजों और मंत्रियों के लंदन बैडमिंटन इवेंट में जाने का दावा फर्जी है और 2025 की दिल्ली टूर्नामेंट की पुरानी तस्वीरों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
कोर्ट का अंतिम आदेश
कोर्ट ने पाया कि यह “सिस्टेमैटिक मिसइंफॉर्मेशन कैंपेन” CJI और अन्य जजों की प्रतिष्ठा को कलंकित करने का प्रयास है। कोर्ट ने कहा, “फर्जी कंटेंट एक्स-फेसी फॉल्स, मेलिशियस और ज्यूडिशियरी, एग्जीक्यूटिव तथा बैडमिंटन खेल के लिए डिरोगेटरी है।” सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत उचित नोटिफिकेशन जारी कर इंटरमीडियरीज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स आदि को 24 घंटे के अंदर इंपग्न्ड कंटेंट और समान सामग्री हटाने, ब्लॉक करने, डी-इंडेक्स करने का निर्देश दिया गया। इंटरमीडियरीज को अपलोड करने वालों के सब्सक्राइबर डिटेल्स (नाम, पता, संपर्क, ईमेल, बैंक डिटेल्स, IP लॉग्स) संरक्षित रखने और उपलब्ध कराने का आदेश। मामले को 17 जुलाई 2026 को सूचीबद्ध किया गया।