दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित आबकारी नीति घोटाले में सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक को ताजा नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 25 मई को।
दिल्ली हाईकोर्ट की दूसरी बेंच में मंगलवार (19 मई 2026) को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक से जुड़े मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। पहले यह मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में था। जहां केजरीवाल के जज पर आरोपों की वजह से विवाद हो गया था। बाद में जस्टिस स्वर्णकांता ने खुद ही इस केस से खुद ही दूरी बना ली और मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने को कहा था। दिल्ली शराब नीति मामले में सभी आरोपों से डिस्चार्ज करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर इस बेंच ने ताजा नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस मनोज जैन की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। कोर्ट ने देखा कि तीन प्रतिवादी (रिस्पॉन्डेंट) आज भी प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे थे। कोर्ट को बताया गया कि रिस्पॉन्डेंट नंबर 8, 18 और 19 (केजरीवाल, सिसोदिया और पाठक) पिछले सुनवाई की तारीखों पर भी नहीं आए थे।
सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया कि वे इन तीनों को केस ट्रांसफर होने की जानकारी दें और यदि वे पेश होना चाहें तो उपस्थित हों।
कोर्ट की मौखिक टिप्पणी
अदालत ने कहा कि "हम समझते हैं कि केस ट्रांसफर पर मिला है। मामला अखबारों में पहले ही आ चुका है, इसलिए हम मान सकते हैं कि उन्हें पता है। फिर भी हम उन्हें ताजा नोटिस भेजेंगे। एक-दो दिन का फर्क नहीं पड़ता। जब वे यहां आएंगे तभी पता चलेगा कि वे मौजूदा बेंच से संतुष्ट हैं या नहीं। आदर्श स्थिति यह होगी कि सभी यहां मौजूद हों और सभी की दलीलें सुनी जाएं।"
कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अगली सुनवाई से पहले अपने जवाब (replies) दाखिल कर सकते हैं। उन प्रतिवादियों को भी नोटिस सर्व किया जाए जो वकील द्वारा प्रतिनिधित्व नहीं करा रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को होगी।
सुनवाई के दौरान दलीलें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीबीआई की याचिका पर 9 मार्च को नोटिस जारी किया गया था और सभी को सर्व किया गया था। उन्होंने कहा, "वे सब जानते हैं। उसके बाद कई आदेश पारित हो चुके हैं। अभी मेरिट पर नहीं जा रहे। यह राष्ट्रीय राजधानी का 'स्कैम' मामला है और इसे जल्द तय किया जाना चाहिए। चार्जशीट दाखिल हुई थी। प्रतिवादियों ने डिस्चार्ज एप्लीकेशन दाखिल किए। चार्ज फ्रेमिंग के समय सभी ने डिस्चार्ज मांगा। डिस्चार्ज आदेश कानून की जांच नहीं टिक सकता।"
एक प्रतिवादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि सीबीआई याचिका की मेंटेनेबिलिटी (maintainability) पर उनके आवेदन पहले तय किए जाएं। उन्होंने दावा किया कि रिवीजन याचिका दाखिल करने वाले वकील सरकारी अभियोजक (APP) नहीं, बल्कि प्राइवेट वकील हैं। कोर्ट ने बिना मेंटेनेबिलिटी आवेदनों पर पूर्वाग्रह के जवाब दाखिल करने को कहा। SG मेहता ने कहा कि उन्होंने बार-बार जवाब मांगे, कई बार अंतिम मौका दिया गया, लेकिन चार प्रतिवादियों ने अभी भी जवाब नहीं दाखिल किया।
27 फरवरी 2025 को ट्रायल कोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी मामले में सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया था, जिसमें केजरीवाल, सिसोदिया और के. कविता शामिल थे। ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। सीबीआई ने इस आदेश के खिलाफ रिवीजन याचिका दाखिल की। पहले जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इस मामले की सुनवाई कर रही थीं। उन्होंने 9 मार्च को प्रथम दृष्टया ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत बताया था।
केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस शर्मा के खिलाफ रिक्यूसल (recusal) आवेदन दिए थे, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपियों ने सुनवाई का बहिष्कार करने की घोषणा की। उन्होंने जस्टिस शर्मा पर कई आरोप भी लगाए। जिसमें उनके बेटे को सरकारी पैनल में नियुक्ति का मामला भी है। जस्टिस शर्मा ने उसका खंडन नहीं किया। इसके जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा, दुर्गेश पाठक और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की और मामले को दूसरे बेंच को ट्रांसफर कर दिया। उसी बेंच ने मंगलवार को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। अरविंद केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान गिरफ्तार किया गया था और 156 दिनों की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। मनीष सिसोदिया इस मामले में 530 दिन जेल में रहे थे।