टेलीग्राम पर 22 जून तक बैन बरकार रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम 'न्यूनतम प्रतिबंधात्मक' (least restrictive) हैं और इन्हें असंगत नहीं माना जा सकता।
दिल्ली हाई कोर्ट ने नीट-यूजी (NEET-UG) री-एग्जाम से ठीक पहले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) पर लगाए गए केंद्र सरकार के अस्थायी प्रतिबंध को सही ठहराया है। हाई कोर्ट ने टेलीग्राम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार के इस फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदम 'न्यूनतम प्रतिबंधात्मक' (least restrictive) हैं और इन्हें असंगत नहीं माना जा सकता। नीट परीक्षा 21 जून को है।
यह फैसला शुक्रवार (19 जून 2026) सुबह जस्टिस तेजस कारिया की सिंगल बेंच ने सुनाया। फैसला 18 जून को अदालत ने सुरक्षित रख लिया था। हालांकि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई गंभीर टिप्पणियां की थीं। लेकिन फैसला उन टिप्पणियों के उलट आया है।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
टेलीग्राम की ओर से वरिष्ठ वकील ध्रुव मेहता ने कहा: टेलीग्राम ने आरोप लगाया कि सरकार ने उसे जानबूझकर निशाना बनाया है, जबकि अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बिना किसी रोक-टोक के चल रहे हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।
प्लेटफॉर्म ने दावा किया कि उसने सरकार के साथ लगातार सहयोग किया है। 9 जून को शिकायत मिलने के महज एक घंटे के भीतर अवैध कंटेंट वाले लिंक्स को हटा दिया गया था। कंपनी ने अब तक नीट से जुड़े 900 से अधिक अवैध लिंक्स हटाए हैं और इसके लिए एआई (AI), मशीन लर्निंग टूल्स और मैनुअल मॉडरेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- टेलीग्राम की तरफ से सवाल उठाया गया कि क्या नीट जैसी परीक्षा का मामला देश की संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा है, जिसके आधार पर यह प्रतिबंध लगाया गया? क्योंकि वाट्सऐप के ज़रिए भी तमाम परीक्षाओं के पेपर लीक होते रहे हैं।
हाईकोर्ट में केंद्र सरकार की दलीलें
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने दलील दी कि पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार ने यह बेहद जरूरी और संतुलित कदम उठाया है। टेलीग्राम का आर्किटेक्चर ऐसा है कि इस तरह की आपातकालीन स्थितियों में वे जरूरी नियंत्रण नहीं रख पाते। इसके अलावा, टेलीग्राम की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार, अकाउंट डिलीट होने पर सारा डेटा और संदेश हमेशा के लिए मिट जाते हैं, जिससे जांच में मुश्किल आती है। इस प्लेटफॉर्म से होने वाला संभावित नुकसान बहुत बड़ा है।
अटॉर्नी जनरल (AG) आर वेंकटरमणी ने कहा, "यह प्लेटफॉर्म अपने आर्किटेक्चर (बनावट) के कारण एक 'फ्रेंकस्टीन' (भस्मासुर जैसी बेलगाम चीज) बन चुका है। अगर हमारे जैसा देश ऐसे निवारक कदम नहीं उठा सकता, तो हम कहां जाएंगे? पैसे कमाने के लिए बनाया गया एक प्लेटफॉर्म आनुपातिकता (proportionality) की बात कर रहा है, जो पूरी तरह से गलत है।"
वॉट्सऐप को फायदा पहुँचाने की व्यावसायिक जंग
पावेल दुरोव ने अपनी पोस्ट में लिखा: "भारतीय टेलीकॉम कंपनी रिलायंस एक गैर-कानूनी तरीके 'BGP हाइजैकिंग' के जरिए भारत के बाहर (यूएई समेत) लाखों यूजर्स के लिए टेलीग्राम तक पहुँच को बाधित (sabotage) कर रही है।" दुरोव का मानना है कि यह सब कुछ जानबूझकर किया जा रहा है क्योंकि इस संबंध में रिलायंस को कई बार रिपोर्ट भेजी गई, लेकिन कंपनी ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने इस पूरे मामले को मैसेजिंग ऐप्स के बीच चल रही व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा (Business Competition) से जोड़ा। दुरोव ने इशारा किया कि रिलायंस के फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी 'मेटा' (Meta) के साथ कमर्शियल संबंध हैं, और मेटा की रिलायंस में हिस्सेदारी भी है।
टेलीग्राम के सीईओ दुरोव ने कहा कि यह टेलीग्राम को नुकसान पहुँचाकर वॉट्सऐप को फायदा पहुँचाने की एक 'प्रतिस्पर्धात्मक जंग' (Competitive War) का हिस्सा हो सकता है।
टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर पावेल दुरोव ने भारत सरकार की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम को ब्लॉक करने से पेपर लीक करने वाले अंदरूनी लोगों (Insiders) पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, बल्कि वो बस दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो जाएंगे। दुरोव ने लिखा: "यह कदम भारत में मौजूद टेलीग्राम के 15 करोड़ (150 मिलियन) से अधिक आम यूजर्स को सजा देने जैसा है, न कि उन लोगों को जिन्होंने वास्तव में परीक्षा सामग्री को लीक किया है।"
इतना ही नहीं, दुरोव ने अपने बयान में यहाँ तक आशंका जताई कि अगर रिलायंस और वॉट्सऐप मिलकर भारत में टेलीग्राम पर पूरी तरह से बैन लगाने की कोशिशों के पीछे शामिल हों, तो उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी। हालाँकि, उन्होंने इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। भारत टेलीग्राम के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है जहाँ इसके 150 मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं।
टेलीग्राम बैन का मामला विवादित क्यों है
टेलीग्राम (Telegram) के संस्थापक और सीईओ पावेल दुरोव (Pavel Durov) ने भारतीय टेलीकॉम दिग्गज रिलायंस (Reliance) पर बेहद गंभीर आरोप लगाया है। दुरोव का दावा है कि रिलायंस इंटरनेट कनेक्टिविटी में दखलंदाजी कर रहा है, जिससे भारत के बाहर कई देशों में यूजर्स के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दुरोव ने आरोप लगाया कि रिलायंस इसके लिए 'बीजीपी हाइजैकिंग' (Border Gateway Protocol Hijacking) नाम की एक अवैध तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी इसके कारण टेलीग्राम की सर्विस बाधित हुई है। (बीजीपी हाईजैकिंग (BGP Hijacking) एक साइबर हमला है जिसमें हैकर्स इंटरनेट के ट्रैफिक को गलत दिशा में मोड़ने के लिए बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (BGP) की राउटिंग जानकारी में हेरफेर करते हैं।)
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act), 2000 की धारा 69A के तहत भारत में टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म को 30 जून तक पहले से पोस्ट किए जा चुके संदेशों के 'मैसेज-एडिटिंग' (संदेश बदलने वाले) फीचर को भी बंद करने का निर्देश दिया गया है। केंद्र सरकार ने पेपर लीक और नीट-यूजी विवाद में शामिल संगठित चीटिंग नेटवर्क (नकल माफिया) द्वारा इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किए जाने की चिंताओं के चलते यह कदम उठाया है।