दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ शर्टलेस प्रदर्शन किया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दावा किया कि यह नेपाल के जेनरेशन जे़ड आंदोलन से प्रेरित है।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में बताया कि एआई समिट में सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शर्टलेस विरोध प्रदर्शन करने वाले युवा कांग्रेस कार्यकर्ता नेपाल के जेन Z आंदोलन से प्रेरित थे। ज़ेन जी ने नेपाल की सरकार को उखाड़ फेंका था। पुलिस ने दावा किया कि इस प्रदर्शन के पीछे एक बड़ी साजिश है, जो वैश्विक नेताओं और तकनीकी दिग्गजों की मौजूदगी वाले एक हाई-प्रोफाइल समिट के दौरान हुआ।
पुलिस अधिकारियों ने अदालत में कहा, "यह एक बड़ी साजिश है जो नेपाल के जेन Z विरोध प्रदर्शनों से प्रेरित है। आरोपियों को एक-दूसरे से और डिजिटल सबूतों से सामना कराना जरूरी है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण जांच है।" पुलिस ने गिरफ्तार युवा कांग्रेस सदस्यों की हिरासत की मांग की।
पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के फंडिंग की गहन जांच जरूरी है, जिसमें यह पता लगाना शामिल है कि उनके द्वारा पहने गए टी-शर्ट्स की प्रिंटिंग किसने फाइनेंस की। इन शर्ट्स पर संदेश जैसे "पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड", "इंडिया-यूएस ट्रेड डील" और "एपस्टीन फाइल्स" लिखे थे।
- यहां यह बताना ज़रूरी है कि संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने इस तरह का बैनर लेकर, कपड़े पनहकर आए दिन संसद परिसर में प्रदर्शन किए हैं। इन पर वही नारे लिखे रहते थे, जिन्हें युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी शर्ट पर लिखवा रखे थे। संसद परिसर में हुए प्रदर्शनों में आए दिन पीएम मोदी को निशाने पर लिया गया। लेकिन दिल्ली पुलिस को उनमें साजिश नहीं दिखी और न सांसदों से सवाल पूछने की हिम्मत हुई कि उन्होंने किसके कहने पर ड्रेस पहन रखी थी और इनकी प्रिंटिंग किसने फाइनेंस की थी।
शुक्रवार को, कांग्रेस की युवा शाखा के करीब 10 कार्यकर्ताओं ने एआई समिट के स्थल पर प्रवेश किया और एक नाटकीय शर्टलेस विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नारे लगाए गए, जैसे "पीएम इज कॉम्प्रोमाइज्ड" जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से जुड़ा था। प्रदर्शनकारी सफेद टी-शर्ट्स पहने या पकड़े हुए थे, जिन पर प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरें छपी थीं, साथ ही ऐसे संदेश लिखे गए थे।
सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और बाद में चार प्रदर्शनकारियों को हाई-प्रोफाइल वैश्विक कार्यक्रम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया।
प्रदर्शनकारियों को पीटा गया, सबक सिखाने की कोशिशः वकील
प्रदर्शनकारियों के वकील ने अदालत में पुलिस के दावों का विरोध किया और तर्क दिया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और कार्यकर्ताओं ने किसी पर हमला नहीं किया। इसके विपरीत, वकील ने आरोप लगाया कि उन्हें पीटा गया। वकील ने कहा- "कोई फुटेज नहीं है जो दिखाता हो कि उन्होंने किसी सरकारी कर्मचारी पर हमला किया। उल्टा, उन्हें बुरी तरह पीटा गया। लगाई गई धाराएं अन्य राजनीतिक दलों के लिए उदाहरण सेट करने की कोशिश हैं।"
इस विरोध प्रदर्शन ने भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक जंग छेड़ दी। भाजपा नेताओं, जिसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और भूपेंद्र यादव शामिल हैं, ने इस कृत्य को "राष्ट्र-विरोधी" करार दिया और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और तकनीकी नेताओं जैसे सैम ऑल्टमैन और सुंदर पिचाई के सामने भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
जवाब में बीजेपी का प्रदर्शन
भाजपा ने युवा कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन के खिलाफ कांग्रेस पर पलटवार किया। दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के पास एक प्रमुख विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुंबई में राहुल गांधी के खिलाफ काले झंडे दिखाए, जबकि जम्मू में भी प्रदर्शन हुए।
हालांकि, कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का बचाव किया और इसे लोकतांत्रिक असहमति का वैध रूप बताया, जो युवाओं की नाराजगी और हताशा को दर्शाता है। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने बीजेपी का पुराना वीडियो, फोटो जारी किया कि जिसमें एक नेता कपड़ों के बिना प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने लिखा कि मुझे गर्व है कि मैंने अपना राजनीतिक कैरियर युवा कांग्रेस से शुरू किया।
युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु छिब ने कहा, "शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र में हमारा अधिकार है, और हम युवाओं की आवाज उठाते रहेंगे।"
दुनियाभर में ऐसे प्रदर्शन आम हैं
अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान ऐसे प्रदर्शन एक सामान्य और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, जो दुनिया भर में देखे जाते हैं। उदाहरण के लिए, ग्रीनपीस जैसे संगठन अक्सर वैश्विक समिटों में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने के लिए नाटकीय विरोध प्रदर्शन करते हैं, जैसे कि दावोस में विश्व आर्थिक फोरम के दौरान बैनर लटकाना या म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान फॉसिल फ्यूल्स के खिलाफ प्रदर्शन। ऐसे में दिल्ली पुलिस का इस शर्टलेस विरोध को नेपाल के जेन Z आंदोलन से जोड़कर बड़ा षड्यंत्र बताना और गिरफ्तारियां करना निंदनीय है, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है और पुलिस की भूमिका को राजनीतिक हथियार बनाने का प्रयास दिखता है।
भारत में भी अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों के दौरान ऐसे प्रदर्शन कई बार हो चुके हैं, जैसे कि किसानों का 2020-2021 का आंदोलन जो दुनिया का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन था, या शाहीन बाग में महिलाओं का शांतिपूर्ण धरना जो नागरिकता कानून के खिलाफ था। ये प्रदर्शन लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाते हैं, लेकिन बीजेपी का इसे "राष्ट्र-विरोधी" करार देना और कांग्रेस को "टॉपलेस, ब्रेनलेस और शेमलेस" कहना शर्मनाक है, क्योंकि यह विपक्ष की आवाज को दबाने की साजिश है और वैश्विक मंच पर भारत की छवि को खुद ही राजनीतिक लाभ के लिए खराब करने का उदाहरण है।
इस मामले में युवा कांग्रेस का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, जो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और अन्य मुद्दों पर युवाओं की नाराजगी को व्यक्त कर रहा था, लेकिन दिल्ली पुलिस का लाठीचार्ज और बीजेपी की तीखी बयानबाजी इसे दबाने का प्रयास है। कांग्रेस ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों को षड्यंत्र बताकर फंडिंग की जांच की धमकी देना और गिरफ्तारियां करना पुलिस की अतिरेकपूर्ण कार्रवाई है, जबकि बीजेपी का इसे वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताना पाखंडपूर्ण है, क्योंकि यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों को कमजोर करता है और युवाओं की आवाज को कुचलने की कोशिश है।