दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक तरफ दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ एजेंटों पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन जमा करने के आरोप लगे हैं, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने दिल्ली समेत छह राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ा दी है।
दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कथित तौर पर ऐसे लोगों के खिलाफ भी फॉर्म-7 दाखिल किए गए हैं, जो अपने दर्ज पते पर रह रहे हैं। इस मामले ने मतदाता सूची की पारदर्शिता, राजनीतिक दलों की भूमिका और चुनाव आयोग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
इसी बीच चुनाव आयोग ने दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी है। आयोग के इस फैसले से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, गलत प्रविष्टियों को ठीक कराने और नाम हटाने के प्रस्तावों पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
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दिल्ली में BJP बूथ एजेंट ने दो दिन में दाखिल किए 35 फॉर्म-7

दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के नियमों में बूथ लेवल एजेंट (BLA) के लिए एक दिन में अधिकतम 10 आवेदन दाखिल करने की सीमा निर्धारित है। लेकिन आयोग के ECINET पोर्टल पर इस सीमा को लागू करने की व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ एजेंट निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन जमा कर सके।

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बीजेपी के बूथ लेवल एजेंट चितरेश चंदोलिया ने दो दिनों में 35 फॉर्म-7 दाखिल किए। चंदोलिया उत्तर-पश्चिम दिल्ली से बीजेपी सांसद योगेंद्र चंदोलिया के बेटे हैं। बताया गया है कि उन्होंने 21 सितंबर को 12 और 22 सितंबर को 23 आवेदन दाखिल किए। इन आवेदनों के जरिए मतदाता सूची में दर्ज लोगों के नाम हटाने की आपत्ति दर्ज कराई गई थी।

चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों को सामूहिक रूप से आवेदन दाखिल करने की अनुमति है, लेकिन मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद एक दिन में 10 से अधिक फॉर्म जमा नहीं किए जाने चाहिए। चितरेश चंदोलिया ने द हिंदू से बातचीत में कहा कि उन्होंने ECINET पोर्टल पर आम नागरिक की तरह लॉग इन किया और आधार प्रमाणीकरण के जरिए फॉर्म भरे। उनके मुताबिक, पोर्टल पर ऐसा कोई विकल्प नहीं है, जिससे यह बताया जा सके कि आवेदनकर्ता बूथ एजेंट है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव आयोग के नियमों में एक सीमा निर्धारित होने के बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर उसे लागू करने की व्यवस्था नहीं होने से बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं।

घरों में रह रहे मतदाताओं के नाम हटाने की आपत्ति

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के कुछ इलाकों में ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने के लिए भी फॉर्म-7 दाखिल किए गए, जो अपने दर्ज पते पर रह रहे थे। पटेल नगर के पार्ट-38 में राज सिंह नाम के एक व्यक्ति ने 26 सितंबर को 13 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल की थीं। इनमें दानिश खान और तौफीक खान नाम के दो भाइयों के नाम भी शामिल थे। दोनों भाई अपने दर्ज पते पर रहते हैं, लेकिन उनके नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 में ‘अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित’ होने का कारण दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों भाइयों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम हटाने के लिए आपत्ति दाखिल की गई है।
इसी तरह करोल बाग के कुछ मतदाताओं के खिलाफ दाखिल आवेदनों में भी ‘अनुपस्थित/स्थायी रूप से स्थानांतरित’ होने का कारण दिया गया था। चंदोलिया ने अखबार को बताया कि संबंधित लोग या तो दिए गए पते पर नहीं रहते थे या उन्होंने अपने मकान बेच दिए थे। इनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं, जिनके बारे में दावा किया गया कि वे शादी के बाद दूसरे इलाके या शहर में चली गई थीं। हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए इन मामलों में सबसे गंभीर सवाल यह है कि मतदाता के वास्तव में स्थानांतरित होने या उसके पते पर मौजूद नहीं होने की पुष्टि किस आधार पर की गई। मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जाता है। इस फॉर्म के जरिए किसी मृत व्यक्ति, स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, डुप्लीकेट प्रविष्टि या अन्य पात्र आधार पर नाम हटाने की मांग की जा सकती है।

दिल्ली समेत 6 राज्यों में SIR की समयसीमा बढ़ी

चुनाव आयोग ने दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नागालैंड में भी SIR की समयसीमा में बदलाव किया है।
चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, दिल्ली में अब 25 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। पहले इसकी अंतिम तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित थी। इसके अलावा, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समयसीमा भी 30 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है। दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची अब 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी। 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से दिल्ली में 47.56 लाख मतदाताओं के नाम बाहर किए गए थे। इसके बाद 28 अक्टूबर तक 2,75,856 फॉर्म-6 आवेदन प्राप्त हुए थे। फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।

महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा और नागालैंड की अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। दिल्ली की अंतिम सूची 22 दिसंबर को जारी होगी। चुनाव आयोग ने यह बदलाव संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की मांग के बाद किया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग का फैसला

दिल्ली में SIR की समयसीमा बढ़ाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के एक दिन बाद आया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा था कि दिल्ली के मतदाताओं के लिए फॉर्म जमा करने की कोई कठोर अंतिम तारीख पर जोर न दिया जाए। आयोग को निर्देश दिया गया था कि वह संबंधित फॉर्म स्वीकार करना जारी रखे और जरूरत पड़ने पर जानकारी का सत्यापन तथा सहायक दस्तावेजों की जांच करे। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश ऐसे समय दिया, जब दिल्ली में फॉर्म-6 जमा करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित थी।

SIR पर राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ रहा है?

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज नामों की जांच करना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की प्रविष्टियों को हटाना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना है। लेकिन दिल्ली में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग और ECINET पोर्टल पर निर्धारित सीमा लागू नहीं होने के आरोपों ने इस प्रक्रिया को विवादित बना दिया है।
यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने के लिए आवेदन दाखिल किया जाता है, तो संबंधित मतदाता को अपनी पात्रता साबित करने और नाम सूची में बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसलिए सवाल केवल फॉर्म-7 दाखिल किए जाने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि चुनाव आयोग ऐसे आवेदनों की जांच किस तरह करता है और क्या किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले पर्याप्त सत्यापन किया जाता है। दिल्ली में समयसीमा बढ़ने से मतदाताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता, राजनीतिक दलों की भूमिका और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल अब भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।