सरकार के निर्देश पर आरबीआई ने कल दो हजार के नोटों का चलन बंद करने की घोषणा की। पत्रकार संजय कुमार सिंह बता रहे हैं कि इस निर्णय से भारत सरकार की नोटबंदी नीति और भारतीय करंसी की साख क्यों दांव पर लग गई है।
बाजार में 2000 का नोट लगभग नहीं है और लंबे समय से नहीं है। सरकार कह रही है कि 2018-19 के बाद 2000 के नोट नहीं छपे, उनका कार्यकाल पूरा हो चुका है, प्रसार में नहीं हैं आदि आदि पर सच यही है कि छापे में बरामदगी के समय जो नोट दिखते हैं वे अच्छी स्थिति में लगते हैं और उनसे बहुत खराब नोट हमलोग उपयोग कर रहे होते हैं। इसलिए इनका प्रचलन बंद करने में जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं समझ में आती है। नोटबंदी के समय सरकार ने कहा था कि नकली नोट के प्रसार पर रोक लगाना नोटबंदी के प्राथमिक उद्देश्यों में एक था लेकिन 2016 के बाद नकली नोटों की बरामदगी बढ़ गई थी।