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12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए कोवैक्सीन टीके को हरी झंडी

भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को अब 12 साल से ज़्यादा उम्र वालों के लिए आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। दवा नियामक ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया यानी डीसीजीआई ने शनिवार देर शाम को इसको हरी झंडी दी। अक्टूबर महीने में ही 12-18 साल के बच्चों के लिए इस वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए विशेषज्ञ पैनल ने सिफारिश की थी।

कोवैक्सीन को यह मंजूरी तब मिली है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शनिवार रात अचानक किए गए राष्ट्र के नाम संबोधन में 15-18 साल के बच्चों के लिए वैक्सीन लगाए जाने की घोषणा की गई है। इनको 3 जनवरी से ये टीके लगाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 साल से ज़्यादा उम्र के बुजुर्गों को डॉक्टरों की अनुमति के बाद प्रीकॉशन डोज यानी बूस्टर खुराक लगाने की भी घोषणा की। यह कार्यक्रम 10 जनवरी से शुरू होगा।

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बहरहाल, भारत बायोटेक ने सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन यानी सीडीएससीओ को कोवैक्सीन के बीबीवी152 टीके के लिए 2-18 वर्ष आयु वर्ग में क्लिनिकल ट्रायल का आँकड़ा जमा किया था। सीडीएससीओ की विषय विशेषज्ञ समिति ने 12 अक्टूबर को कुछ शर्तों के साथ 12-18 वर्ष आयु वर्ग में उपयोग के लिए कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग की मंजूरी देने की सिफारिश की थी।

डीसीजीआई ने भारत बायोटेक को भेजे गए पत्र में कहा है कि एसईसी विशेषज्ञों की सिफारिशों और अतिरिक्त सुरक्षा डेटा पेश करने के आधार पर इस निदेशालय ने सीमित उपयोग के लिए मंजूरी दी है। 

डीसीजीआई की मंजूरी के बाद भारत बायोटेक ने ट्वीट कर इसकी पुष्टि की है। 

इसने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'कोवैक्सीन को विशिष्ट रूप से तैयार किया गया है ताकि वयस्कों और बच्चों को एक समान खुराक दी जा सके। इसने मूल वैरिएंट और बाद में आए वैरिएंट के ख़िलाफ़ वयस्कों में सुरक्षा और प्रभावकारिता के लिए एक प्रमाणित रिकॉर्ड स्थापित किया है।'

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कोवैक्सीन भारत में बच्चों पर इस्तेमाल के लिए स्वीकृत दूसरा टीका है। अगस्त में ज़ायडस कैडिला के तीन-खुराक वाले टीके को वयस्कों और 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों पर इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी।

बच्चों के लिए तीसरा संभावित टीका सीरम इंस्टीट्यूट का नोवावैक्स है, जिसके लिए डीसीजीआई ने पिछले महीने सात से 11 साल के बच्चों के लिए ट्रायल को मंजूरी दी थी। चौथा टीका बायोलॉजिक ई का कॉर्बेवैक्स है। इसे पांच साल से ऊपर के बच्चों पर आगे के परीक्षण करने के लिए मंजूरी दे दी गई है।

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