कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब 'E20 जनता पार्टी' एथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के विरोध में सक्रिय हो गया है। अरविंद केजरीवाल ने इस पर राष्ट्रीय टाउन हॉल का ऐलान किया। इस बीच नितिन गडकरी ने क़ानूनी कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
नीट पेपर लीक के बाद अब E20 के ख़िलाफ़ अभियान तेज हो गया है और धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब नितिन गडकरी निशाने पर हैं। 'कॉकरोच जनता पार्टी की तर्ज पर 'E20 जनता पार्टी' नाम से एक ऑनलाइन अभियान सामने आया है। इंस्टाग्राम पर इस अभियान से जुड़े अकाउंट के तीन लाख से अधिक फॉलोवर हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इसने अभियान तेज़ कर दिया है और नितिन गडकरी की तस्वीर को पोस्ट करते हुए नारा लिखा है- 'कुर्सी खाली करो, जनता आती है।' इसने एक अन्य पोस्ट में लिखा है कि 'नितिन गडकरी जी को इस्तीफ़ा देना ही होगा!' इधर, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी E20 नीति के खिलाफ देशव्यापी अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
ई20 के ख़िलाफ़ एकजुट होते विरोध के स्वर और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आने के बीच ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अदालत का रुख किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे कथित डीपफेक वीडियो और मानहानि वाली पोस्टों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
तेजी से बढ़ रही 'E20 जनता पार्टी'
'E20 जनता पार्टी' खुद को कोई राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक स्वतंत्र नागरिक अभियान बताती है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में इस समूह ने कहा है कि उसका मक़सद आम लोगों के हितों की रक्षा, उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और E20 नीति के प्रभाव पर खुली सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देना है। हालाँकि, कॉकरोच जनता पार्टी ने आधिकारिक रूप से E20 आंदोलन से खुद को नहीं जोड़ा है।
E20 जनता पार्टी की प्रमुख मांगें
- 100 प्रतिशत बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए।
- E20 ईंधन की कीमत कम की जाए।
- E10 ईंधन का विकल्प भी जारी रखा जाए।
- एथेनॉल नीति की स्वतंत्र समीक्षा की जाए।
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से 'Gadkari is next' जैसे हैशटैग और मीम भी वायरल हो रहे हैं। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान भी कई युवाओं ने मजाकिया अंदाज में कहा था, 'अब E20 के वक्त मिलेंगे।' अब E20 जनता पार्टी इसका खुलकर ऐलान कर रही है।
जंतर-मंतर पर छोटे प्रदर्शन भी शुरू
राजनीतिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला और 'टीम भारत' नाम के समूह ने जंतर-मंतर पर E20 नीति के खिलाफ छोटे प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने 31 जुलाई को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। इसके अलावा 'E20 जनता पार्टी' ने भी प्रदर्शन का आह्वान किया है। दावा किया गया है कि इसमें देशभर से टैक्सी, टूरिस्ट और कमर्शियल वाहन मालिक शामिल होंगे।
केजरीवाल ने किया 'नेशनल टाउन हॉल' की घोषणा
अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जिस तरह युवाओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखा, उसी तरह अब E20 नीति पर भी सरकार को जनता की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी 1 अगस्त को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में 'नेशनल टाउन हॉल' आयोजित करेगी, जिसमें दिल्ली-एनसीआर के लोग सीधे शामिल हो सकेंगे, जबकि दूसरे राज्यों के लोग ऑनलाइन जुड़ेंगे।केजरीवाल के अनुसार, उनकी पार्टी की ऑनलाइन याचिका पर दो लाख से अधिक लोगों ने समर्थन दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह इन हस्ताक्षरों और ज्ञापनों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा जाएगा।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस भी E20 नीति की समीक्षा की मांग कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि इस नीति को पर्याप्त वैज्ञानिक परीक्षणों के बिना लागू किया गया और इसका बोझ करोड़ों वाहन मालिकों पर डाला जा रहा है।
गडकरी ने शुरू की कानूनी तैयारी
इस बीच, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे कथित डीपफेक वीडियो और मानहानि वाली सामग्री के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने गडकरी को फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप की मेटा, एक्स, गूगल और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ सिविल मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है।गडकरी का आरोप है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो और पोस्ट डाले जा रहे हैं, जिनमें उन्हें और उनके परिवार को E20 नीति से कथित आर्थिक लाभ से जोड़कर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने अदालत से ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने की भी मांग की है।
गडकरी की यह याचिका पिछले महीने नागपुर में बीजेपी के सोशल मीडिया सेल के कन्वीनर शिशिर अरुण त्रिपाठी की शिकायत के बाद दायर की गई थी। यह शिकायत गडकरी और E20 फ्यूल के बारे में उन वीडियो और पोस्ट को लेकर की गई थी, जिसमें दावा किया गया था कि 'जनता गुमराह हो सकती है, नागरिक भ्रमित हो सकते हैं और शांति भंग हो सकती है'। पुलिस ने FIR भी दर्ज की थी।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है। सरकार के अनुसार इससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी, पर्यावरण को लाभ मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार ने यह भी साफ़ किया है कि फिलहाल 100 प्रतिशत बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल सामान्य बिक्री के लिए वापस लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
क्या है E20 और क्यों हो रहा है विरोध?
भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर ई20 ईंधन को बढ़ावा दिया है। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और गन्ना सहित अन्य फ़सलों से जुड़े किसानों को लाभ मिलेगा। हालाँकि, इस नीति के आलोचकों का दावा है कि ई20 ईंधन से विशेष रूप से पुराने वाहनों के इंजन पर असर पड़ सकता है और माइलेज भी कम हो सकता है।
E20 को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
देश के कई वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल को लेकर शिकायतें की हैं। उनकी शिकायतें हैं-
- पहले की तुलना में माइलेज कम होना।
- पुराने वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ने की आशंका।
- ठंड के मौसम में वाहन स्टार्ट होने में परेशानी।
- कुछ मामलों में वाहन के परफॉर्मेंस में गिरावट आना।
- इन्हीं शिकायतों के कारण अब E25 को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
सरकार इन दावों को लगातार खारिज करती रही है। सरकार का कहना है कि किसी वैज्ञानिक परीक्षण या वास्तविक उपयोग में इंजन को नुकसान होने के प्रमाण नहीं मिले हैं, हालाँकि कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है।
छात्र आंदोलन के बाद नया डिजिटल अभियान
माना जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया आधारित अभियानों को नई ऊर्जा मिली है। जिस तरह कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाया, उसी तरह अब E20 जनता पार्टी एथेनॉल नीति को लेकर डिजिटल मंचों पर तेज़ी से चर्चा का केंद्र बनती दिखाई दे रही है।
हालाँकि, यह देखना है कि ऑनलाइन अभियान भविष्य में जमीनी आंदोलन का रूप ले पाता है या नहीं। फ़िलहाल सरकार और आंदोलनकारी दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ आमने-सामने हैं और E20 नीति पर बहस लगातार तेज होती जा रही है।