केंद्र सरकार ने शुक्रवार 10 जुलाई को साफ कर दिया कि देश में शुद्ध पेट्रोल या पुराने E10 ईंधन का विकल्प दोबारा देना व्यावहारिक नहीं है। देश भर में लागू किए गए E20 ईंधन (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर आम जनता, प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच विवाद गहरा गया है। वाहन चालकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने माइलेज घटने और पुराने इंजनों को नुकसान पहुंचने का दावा करते हुए आंदोलन शुरू किया है। 
इस बढ़ते विरोध के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक विस्तृत एफएक्यू (FAQs) जारी कर उपभोक्ताओं को किसी भी तरह के भ्रम या सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों से बचने की सलाह दी है। सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 के अलग-अलग विकल्प देना नामुमकिन है।

बिना इथेनॉल वाला पेट्रोल न देने की वजहें सरकार ने बताईं

सरकार ने इसके पीछे तीन खास तर्क दिए हैं:
  • लॉजिस्टिक्स की भारी चुनौती: भारत में 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप हैं, जो रिफाइनरियों, डिपो और पाइपलाइनों के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं। हर पंप पर एक साथ तीन तरह का पेट्रोल स्टॉक करना पूरी आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) के लिए एक बहुत ही मुश्किल टास्क होगा। इससे उन्हें मैनेज की चुनौतियां उभरेंगी और ईंधन की लागत बढ़ जाएगी।
  • ₹1 लाख करोड़ का निवेश दांव पर: पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और उद्यमियों ने इथेनॉल उत्पादन और बुनियादी ढांचे में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये सालाना का निवेश किया है। अगर सरकार अचानक पीछे हटती है, तो किसानों, सहकारी समितियों और वित्तीय संस्थानों का यह भारी निवेश डूब जाएगा।
  • ऑटोमोबाइल कंपनियों की सहमति: मंत्रालय के अनुसार, ऑटो कंपनियों की पूरी संतुष्टि और टेस्टिंग के बाद ही E20 को स्टैंडर्ड ईंधन बनाया गया है। यही कारण है कि सभी कंपनियां पुराने और नए दोनों वाहनों पर वारंटी दे रही हैं।
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पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि अगर E20 ईंधन वास्तव में रबर पाइप या इंजनों को गला रहा होता, तो देश भर में लाखों वारंटी क्लेम और शिकायतों की बाढ़ आ जाती, जो कि व्यावहारिक रूप से नहीं हुआ है। E20 पूरी तरह से सुरक्षित, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। हालांकि, भारी विरोध को देखते हुए सरकार द्वारा अगले चरण (E25 ईंधन) को लागू करने की योजना को फिलहाल कुछ समय के लिए टाले जाने के संकेत मिल रहे हैं।

नितिन गडकरी की चुनौती और प्रदर्शनकारियों का पलटवार

हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल का विरोध करने वालों को चुनौती दी थी कि वे देश भर से एक भी ऐसा व्यक्ति सामने लाएं जिसके वाहन का इंजन इथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण खराब हुआ हो। उनका कहना था कि पुराने वाहनों में माइलेज पर केवल 3 से 5% का मामूली असर पड़ता है, जो कि बेहतर पिकअप और क्लीनर इंजन ऑपरेशन जैसी खूबियों के सामने मामूली है।

प्रदर्शनकारियों ने किया 6 सबूत होने का दावा

केंद्रीय मंत्री की इस चुनौती को आंदोलनकारियों ने स्वीकार कर लिया है। 'टीम भारत' के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले कार्यकर्ता और उद्यमी तहसीन पूनावाला ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा: "हमने नितिन गडकरी जी की चुनौती स्वीकार कर ली है। हमारे पास एक नहीं, बल्कि ऐसे छह लोग मौजूद हैं जिनकी कारें E20 ईंधन के इस्तेमाल से खराब हुई हैं। दिल्ली पुलिस ने हमें केंद्रीय मंत्री के आवास पर जाने से मना किया है और हिरासत में लेने की चेतावनी दी है। इसलिए हम चाहते हैं कि गडकरी जी या दिल्ली पुलिस मीडिया के सामने एक लाइव-स्ट्रीम बैठक का समय तय करें, जहां हम इन सभी पीड़ितों को उनके सामने पेश कर सकें।"
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि विशेष रूप से साल 2023 से पहले बने वाहनों में 10 से 20% तक माइलेज की गिरावट देखी जा रही है और इंजन के रबर पार्ट्स व फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंच रहा है।