चुनाव आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड में SIR के तहत ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए वोटरों को दोबारा फॉर्म भरने का मौका दिया है। हालाँकि इसमें जल्द चुनाव होने वाले राज्य यूपी और पंजाब शामिल नहीं हैं।
मतदाता सूची (प्रतीकात्मक तस्वीर)
चुनाव आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना और नागालैंड में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किए गए मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए मौक़ा देने का फ़ैसला किया है। आयोग ने बूथवार सूची फिर से जारी करने और बीएलओ के ज़रिए मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, नागालैंड और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों यानी सीईओ को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। हालाँकि, जल्द चुनाव होने वाले उत्तर प्रदेश और पंजाब को इस फ़ैसले में शामिल नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग ने 6 नवंबर को जारी पत्र में कहा है कि जिन मतदाताओं को गणना फॉर्म जारी किए गए थे, लेकिन जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके, वे दोबारा फॉर्म भरकर अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इन मतदाताओं के नाम ASDD श्रेणी के तहत दर्ज किए गए थे। ASDD का मतलब है- Absent यानी अनुपस्थित, Shifted यानी स्थानांतरित, Dead यानी मृत या Duplicate यानी डुप्लीकेट। आयोग के मुताबिक, ऐसे मतदाता अपने वर्तमान सामान्य निवास क्षेत्र के संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ या सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यानी एईआरओ के पास भरे हुए गणना फॉर्म जमा कर सकेंगे।
हटाए गए वोटरों की सूची फिर से जारी होगी
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि ASDD श्रेणी के तहत जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए हैं, उनकी बूथवार सूची दोबारा प्रदर्शित की जाए। ये सूचियां संबंधित मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों और शहरी स्थानीय निकाय कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाएंगी। इसके साथ ही राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर भी इन्हें पढ़ने योग्य पीडीएफ़ प्रारूप में अपलोड किया जाएगा।सूची में यह भी बताया जाएगा कि संबंधित मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल क्यों नहीं किया गया। इससे मतदाता अपने नाम के हटने की संभावित वजह जान सकेंगे और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
बीएलओ दोबारा वोटरों तक पहुंचाएंगे फॉर्म
चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को अपने ECINET डैशबोर्ड के माध्यम से संबंधित मतदाताओं के लिए आंशिक रूप से भरे हुए गणना फॉर्म नए सिरे से तैयार करने को कहा है। इसके बाद बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को इन मतदाताओं से संपर्क करना होगा। आयोग ने निर्देश दिया है कि जहां संपर्क विवरण उपलब्ध हैं, वहां फॉर्म मतदाताओं तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचाए जाएं या वाट्सऐप, ईमेल और एसएमएस के ज़रिए भेजे जाएँ।मतदाता चुनाव आयोग की वेबसाइट या ECINET ऐप से भी अपना फ़ॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें उसी EPIC नंबर का इस्तेमाल करना होगा, जो नाम हटाए जाने से पहले उनके पास था। EPIC नंबर मतदाता पहचान पत्र का विशिष्ट नंबर होता है।
जिनका पता नहीं बदला, उन्हें देना होगा कारण
चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं के लिए अलग प्रक्रिया तय की है जो अब भी उसी पते पर रह रहे हैं, लेकिन किसी कारण से पहले गणना फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे। ऐसे मतदाताओं को भरा हुआ और हस्ताक्षरित गणना फॉर्म जमा करना होगा। इसके साथ एक बयान भी देना होगा, जिसमें यह बताया जाए कि वे पहले फॉर्म क्यों नहीं जमा कर सके। ये दस्तावेज मतदाता खुद या उनके परिवार का कोई सदस्य संबंधित अधिकारी के पास जमा कर सकता है। इसके अलावा ECINET पर ऑनलाइन सुविधा के जरिए ई-साइन करके भी दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं।
राज्य के भीतर शिफ्ट हुए वोटरों के लिए अलग व्यवस्था
अगर कोई मतदाता उसी राज्य में किसी दूसरी जगह रहने चला गया है तो उसे फॉर्म 8 जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी। ऐसे मतदाताओं को गणना फॉर्म के साथ अपने नए पते और संबंधित विधानसभा क्षेत्र की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा पते का प्रमाण भी संबंधित ईआरओ या एईआरओ के पास जमा करना होगा। बेघर वोटरों के लिए BLO की रिपोर्ट होगी निवास का प्रमाण
चुनाव आयोग ने बेघर मतदाताओं के लिए भी विशेष प्रावधान किया है। जिन लोगों के पास निवास स्थान से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं, वे BLO की फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट को निवास प्रमाण के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगे। आयोग ने BLO को राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों यानी बीएलए के साथ समन्वय करने और घर-घर जाकर मतदाताओं का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। मतदाताओं को खोजने के लिए बीएलओ उनके पड़ोसियों, परिवार के सदस्यों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से भी जानकारी ले सकेंगे।
चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से कहा है कि इन नए प्रावधानों का ख़बू प्रचार किया जाए। इसके साथ ही ऐसी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने के अवसर से वंचित न रहें। आयोग ने यह भी साफ़ किया है कि नाम दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया के दौरान डुप्लीकेट नामों को रोकने के लिए ज़रूरी सुरक्षा उपाय बनाए रखने होंगे।
एसआईआर के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद अब आयोग का यह फ़ैसला संबंधित राज्यों के मतदाताओं को दोबारा आवेदन करने का अवसर देता है। हालाँकि, इस फैसले में उत्तर प्रदेश और पंजाब को शामिल नहीं किया गया है। दोनों राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए यह सवाल अहम है कि वहां ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए मतदाताओं को दोबारा मौक़ा देने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।