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बीजेपी को 477 करोड़, कांग्रेस को 74.5 करोड़ चंदा मिला: चुनाव आयोग

कोरोना संकट के कारण आम भारतीयों से लेकर सरकारों तक की आर्थिक हालत भी ख़राब थी तो क्या राजनीतिक दलों के साथ भी ऐसा ही था? क्या उनको तब राजनीतिक चंदा मिला? इस सवाल का जवाब चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ों में ही मिल जाता है।

पिछले वित्त वर्ष यानी 2020-21 में बीजेपी को सबसे ज़्यादा चंदा मिला था। 20,000 रुपये से अधिक का चंदा देने के मामले में चुनाव आयोग में जमा की गई रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी को वित्तीय वर्ष 2020-21 में 477.54 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि इसी अवधि के दौरान कांग्रेस को 74.5 करोड़ रुपये मिले।

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चुनाव आयोग द्वारा मंगलवार को सार्वजनिक डोमेन में रखी गई दोनों पार्टियों को मिले राजनीतिक चंदे की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी को विभिन्न संस्थाओं, चुनावी ट्रस्टों और व्यक्तियों से 4,77,54,50,077 रुपये मिले। पार्टी ने इस साल 14 मार्च को चुनाव आयोग के समक्ष वित्त वर्ष 2020-21 के लिए चंदे की रिपोर्ट दाखिल की थी।

चुनाव सुधार पर काम करने वाला संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर के अनुसार, सेवन इलेक्टोरल ट्रस्ट्स ने 2020-21 के दौरान चंदा प्राप्त करने की घोषणा की। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार इसने कहा कि उन्होंने कॉर्पोरेट्स और व्यक्तियों से कुल 258.4915 करोड़ रुपये प्राप्त किए और विभिन्न राजनीतिक दलों को 258.4301 करोड़ रुपये बांट दिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से बीजेपी को 212.05 करोड़ रुपये या सभी पार्टियों को इलेक्टोरल ट्रस्टों से मिले कुल चंदे का 82.05 फ़ीसदी मिला है।

सबसे बड़े चुनावी ट्रस्टों में से एक प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने बीजेपी को 209.00 करोड़ रुपये का चंदा दिया। इसने 2019-20 में 217.75 करोड़ रुपये का चंदा दिया था, जबकि जयभारत इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 2020-21 में अपनी कुल आय का 2 करोड़ रुपये बीजेपी को चंदा दिया। प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने सात राजनीतिक दलों- भाजपा, जदयू, कांग्रेस, राकांपा, राजद, आप और लोजपा को चंदा दिया।

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एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2020 में पार्टियों द्वारा 3,429.56 करोड़ रुपये के चुनावी बांड को भुनाया गया और इसमें से 87.29 प्रतिशत चार राष्ट्रीय दलों– बीजेपी, कांग्रेस, टीएमसी और एनसीपी को मिला। 

एडीआर ने कहा था कि बीजेपी ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान कुल 3,623.28 करोड़ रुपये की आय घोषित की थी, लेकिन इसका केवल 45.57 प्रतिशत (1,651.022 करोड़ रुपये) ख़र्च किया, जबकि इसी अवधि के दौरान कांग्रेस की कुल आय 682.21 करोड़ रुपये थी। पार्टी ने 998.158 करोड़ रुपये खर्च किए जो उस वर्ष की आय से 46.31 प्रतिशत अधिक थे।

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