द टेलीग्राफ कोलकाता के पूर्व संपादक आर राजगोपाल का मामला तूल पकड़ रहा है। तमाम पत्रकारों और राजनीतिक दलों के बाद एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी एक बयान जारी कर चुनाव आयोग से उनका नाम वोटर लिस्ट में फिर से बहाल करने को कहा है।
'द टेलीग्राफ' के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार आर. राजागोपाल का नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से हटाने और इसके चलते उनके पासपोर्ट का रिन्यूअल रुकने के मामले में एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कड़ी चिंता और आपत्ति जताई है। विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं ने भी इसे लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है।
EGI (एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया) के प्रेसिडेंट संजय कपूर, जनरल सेक्रेटरी राघवन श्रीनिवासन और ट्रेज़रर टेरेसा रहमान के नाम से जारी बयान में कहा गया, "एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया उस तरीके की निंदा करती है जिससे कोलकाता के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ' के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के साथ नौकरशाही व्यवहार कर रही है। यह नौकरशाही तय कर रही है कि कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं।"
बयान में आगे कहा गया, "पत्रकार और संपादक के तौर पर दशकों तक सार्वजनिक जीवन में काम करने के बावजूद, राजगोपाल आज न केवल वोटर लिस्ट से अपना नाम हटाए जाने के कारण वोट देने के अधिकार से वंचित हो गए हैं, बल्कि 100 से ज़्यादा दिनों से अपना पासपोर्ट भी रिन्यू नहीं करा पा रहे हैं। ऐसा कथित तौर पर कोलकाता पुलिस की 'प्रतिकूल रिपोर्ट' के कारण हो रहा है, जबकि पुलिस को शहर के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में से एक के संपादक के तौर पर राजगोपाल की अच्छी तरह से जानकारी होनी चाहिए थी।"
EGI के बयान में यह भी कहा गया कि ऐसा लगता है कि पुलिस वेरिफिकेशन को इस आधार पर मंज़ूरी नहीं दी गई कि राजगोपाल का नाम अब वोटर लिस्ट में नहीं है।
EGI ने कहा, "राजगोपाल की मुश्किल उस परेशानी को बता रही है जिससे लाखों भारतीय इस समय गुज़र रहे हैं। यह परेशानी चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट के 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision) के कारण हो रही है।"
EGI के बयान में कहा गया कि अगर राजगोपाल जैसे जाने-माने सार्वजनिक व्यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है, तो उन अन्य लोगों के हालात की सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है जिन्हें नौकरशाही के एक फ़ैसले से वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है और जिनके पास अपनी बात रखने या समाधान पाने का कोई ज़रिया नहीं है।
रविवार को जारी अपने बयान में EGI ने कहा, "EGI चुनाव आयोग से समझदारी और सहानुभूति दिखाने और जल्द से जल्द राजगोपाल की वोटर के तौर पर पहचान बहाल करने की अपील करता है। साथ ही, आयोग से यह भी आग्रह करता है कि वह उन सभी लोगों के मामले पर भी इसी तरह विचार करे जो इसी तरह की स्थिति का सामना कर रहे हैं।"
क्या है पूरा मामला?
वरिष्ठ पत्रकार आर. राजागोपाल ने एक लेख के जरिए अपने साथ हुए इस घटनाक्रम को साझा किया। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा चलाई गई विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के तहत उनका नाम कोलकाता के बालीगंज निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची से हटा दिया गया। हटाने का कारण 'तार्किक विसंगतियां' (logical discrepancies) बताया गया, क्योंकि प्रशासन वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट में उनका और उनके दिवंगत पिता का नाम नहीं ढूंढ पाया। राजागोपाल के मुताबिक, उन्होंने अपना मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट (दशवीं का प्रमाणपत्र) समेत कई दस्तावेज जमा कराए, लेकिन फिर भी उनका नाम बहाल नहीं हुआ, जिसके कारण वह हालिया चुनावों में मतदान भी नहीं कर पाए।पासपोर्ट नवीनीकरण में आई रुकावट
मतदाता सूची से नाम कटने का असर आर. राजागोपाल के पासपोर्ट नवीनीकरण पर भी पड़ा। उन्होंने 19 मार्च 2026 को पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए बायोमेट्रिक औपचारिकताएं पूरी की थीं। लेकिन कोलकाता पुलिस ने वेरिफिकेशन रिपोर्ट में उनके मतदाता सूची में नाम न होने का हवाला देते हुए एक प्रतिकूल (Adverse) रिपोर्ट लगा दी। राजागोपाल ने बताया कि उनके बायोमेट्रिक्स जमा किए जाने के 100 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस रिपोर्ट के कारण उनका पासपोर्ट होल्ड पर है। इस प्रशासनिक उलझन के कारण वह सैन फ्रांसिस्को में अपनी बेटी की शादी में भी शामिल होने से चूक गए।विपक्ष का केंद्र और चुनाव आयोग पर तीखा हमला
आर. राजागोपाल के इस अनुभव को लेकर देश के विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है और इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं:
तृणमूल कांग्रेस (TMC): टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इस घटना को "चौंकाने वाला और हृदयविदारक" बताया। उन्होंने कहा कि अगर 'द टेलीग्राफ' के पूर्व संपादक जैसे रसूखदार व्यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है, तो कम संसाधनों वाले आम नागरिकों को इस व्यवस्था में कितनी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
कांग्रेस: राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए एक्स (X) पर लिखा कि यह देश में "तार्किकता के गिरते स्तर" को दर्शाता है।
माकपा (CPI-M): सीपीएम महासचिव एम.ए. बेबी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का इस्तेमाल लोगों को मताधिकार से वंचित करने और भाजपा के विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
आम लोगों की आवाज़ बनना चाहता हूँ: राजागोपाल
आर. राजागोपाल ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य खुद को पीड़ित के रूप में पेश करना नहीं है, बल्कि वह इसके जरिए उन 27 लाख आम नागरिकों की परेशानी को सामने लाना चाहते हैं, जिन्हें इस विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने लिखा, "यदि पत्रकारिता में पूरा जीवन बिताने वाले और एक प्रतिष्ठित अखबार के संपादक रहे व्यक्ति को ऐसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, तो समाज के सबसे हाशिए पर मौजूद लोग क्या झेल रहे होंगे, इसकी केवल कल्पना ही की जा सकती है।"
वर्तमान में, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ राजागोपाल की अपील सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है।