बंगाल SIR को लेकर ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ‘व्हाट्सएप कमीशन’ कहकर उठाए गए सवालों के कानूनी और राजनीतिक मायने क्या?
सुप्रीम कोर्ट में बंगाल एसआईआर पर सुनवाई।
ममता बनर्जी अब सुप्रीम कोर्ट में ही चुनाव आयोग पर बरस पड़ीं। उन्होंने चुनाव आयोग को 'व्हाट्सऐप कमीशन' कहकर संबोधित किया और कहा कि न्याय बंद कमरों के पीछे तड़प रहा है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के ख़िलाफ़ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। यह कितना बड़ा मामला है, इसको इससे समझा जा सकता है कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में पहुँची हैं।
ममता बनर्जी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के चैंबर में अपनी बात रखने की इजाजत मांगी। उन्होंने कहा, 'सर, मुझे सिर्फ 5 मिनट दें।' सीजेआई ने कहा कि 15 मिनट लीजिए। फिर ममता बनर्जी ने अपनी दलील शुरू की। उन्होंने भावुक होकर कहा, 'न्याय बंद कमरों के पीछे रो रहा है। हम कहीं से न्याय नहीं पा रहे। मैंने चुनाव आयोग को 6 बार पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।'
बंगाल ही निशाने पर क्यों: ममता
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बंगाल को निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, 'यह चुनाव आयोग नहीं, व्हाट्सएप कमीशन है। लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। बंगाल को टारगेट किया जा रहा है।' मुख्यमंत्री ने कहा, एसआईआर को सिर्फ नाम हटाने का हथियार बनाया जा रहा है, न कि सही जांच का। यह प्रक्रिया 4 महीने में पूरी की जा रही है, जबकि इसे 2 साल में किया जा सकता था। नोटिस फसल कटाई और त्योहारों के समय भेजे गए, जब लोग घर से दूर होते हैं। ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री
ममता ने बताया कि एसआईआर प्रक्रिया में लाखों नाम काटे जा रहे हैं। पहले चरण में ही लगभग 58 लाख नामों को मृत घोषित कर दिया गया। कई महिलाओं के नाम हटाए गए, जिससे यह प्रक्रिया महिला विरोधी लग रही है।
उन्होंने कहा कि शादी के बाद महिलाओं का सरनेम बदलने या ससुराल जाने पर इसे मिसमैच बताकर नाम काट दिए जा रहे हैं। काम की तलाश में दूसरे जगह जाने वालों को भी इसी तरह परेशान किया जा रहा है। ममता ने पूछा,
क्यों सिर्फ बंगाल को ही ऐसा किया जा रहा है? असम या अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में ऐसा क्यों नहीं हो रहा? ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले बुथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ईआरओ फैसला लेते थे, लेकिन अब ज्यादातर बीजेपी शासित राज्यों से आए माइक्रो-ऑब्जर्वर नाम हटाने की सिफारिश कर रहे हैं। लगभग 3800 ऐसे ऑब्जर्वर बंगाल में तैनात किए गए हैं।
इस पर सीजेआई ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो हर नोटिस को बीएलओ से प्रमाणित करवाने का आदेश दिया जा सकता है। ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग कोर्ट के पहले आदेश का स्वागत करते हैं, जिसमें आधार, डोमिसाइल सर्टिफिकेट आदि दस्तावेज स्वीकार करने को कहा गया था, लेकिन फिर भी बंगाल को अलग से टारगेट किया जा रहा है।
चुनाव आयोग का आरोप
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार एसआईआर में सहयोग नहीं कर रही। राज्य से क्लास 3 के अधिकारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भेजे जा रहे हैं, जो दस्तावेज जांचने के लिए सक्षम नहीं हैं। इसलिए माइक्रो-ऑब्जर्वर लगाने पड़े। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ आरोप अनुचित तरीके से लगाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। आयोग को 10 फरवरी तक जवाब दाखिल करने को कहा गया है। कोर्ट ने बंगाल सरकार को भी कहा कि क्लास 2 के अधिकारियों की सूची दे, जो डेपुटेशन पर एसआईआर में मदद कर सकें।
ममता ने कहा है- सीईसी बीजेपी के एजेंट
ममता बनर्जी ने दो दिन पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ करीब 90 मिनट की बैठक के बाद उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हमसे झूठ बोले और बदतमीजी की।
चुनाव आयोग के साथ बैठक के बाद बाहर निकलते हुए ममता ने कहा था कि यह चुनाव आयोग नहीं, बल्कि बीजेपी का एजेंट है और हम अपमानित महसूस कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने सोमवार को टीएमसी के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की थी। उनके साथ अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और वो 12 परिवार थे, जिनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया में कट गए हैं। ये परिवार प्रोटेस्ट में काले कपड़े पहनकर आए थे। कई लोगों ने यह साबित करने की कोशिश की उनको मृत बताकर नाम काट दिया गया है, लेकिन वे ज़िंदा हैं।
SIR पर ममता के आरोप क्या हैं?
एसआईआर मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा है, जिसमें डुप्लिकेट नाम, मृत लोगों के नाम हटाने और अन्य गलतियां जैसी पुरानी गड़बड़ियां सुधारने का काम चल रहा है। ममता का कहना है कि बंगाल में 58 लाख असली मतदाताओं के नाम बिना सुनवाई के काट दिए गए।
ममता ने कहा, "बंगाल में नामों में छोटी-छोटी स्पेलिंग की गलती या टाइटल बदलने पर नाम काट दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बनर्जी और बंद्योपाध्याय, मुखर्जी और मुखोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय जैसे उपनाम बदलना आम बात है, लेकिन उनके नाम काट दिए गए। बंगाल में शादी के बाद महिलाओं के सरनेम बदल जाते हैं, लेकिन इसे 'अनॉमली' बताकर नाम हटा रहे हैं।" उन्होंने कहा कि एससी, अल्पसंख्यक और गरीब लोग ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ममता ने पूछा, 'क्या वे इंसान नहीं हैं?'।
उन्होंने बीएलओ यानी बूथ लेवल ऑफिसर पर दबाव डालने का आरोप लगाया। ममता ने कहा कि अन्य राज्यों में जमीन के रिकॉर्ड या मैट्रिक सर्टिफिकेट माने जाते हैं, लेकिन बंगाल में नियम बदल दिए गए।
'चुनाव असम में भी तो SIR क्यों नहीं?'
ममता ने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले एसआईआर क्यों? उन्होंने कहा, 'असम में बीजेपी की सरकार है, वहां एसआईआर नहीं किया। लेकिन बंगाल, केरल और तमिलनाडु को निशाना बनाया जा रहा है।' उन्होंने कहा कि 'यह बीजेपी के इशारे पर हो रहा है। यह सीईसी नहीं, बीजेपी का आईटी सेल है। लोकतंत्र कहां गया?'
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले हो रही है। ममता बनर्जी का कहना है कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र के अधिकारों को खतरे में डाल रही है। कोर्ट ने मामले में आगे सुनवाई जारी रखने का संकेत दिया है।