अमेरिका के जस्टिस विभाग ने बदनाम अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ी हजारों फाइलें और ईमेल की दूसरी किस्त जारी की हैं। इन दस्तावेजों में दो चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं- भारत के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का और उद्योगपति अनिल अंबानी। इन फाइलों से पता चलता है कि 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच कई बार ईमेल के जरिए बातचीत हुई और उनकी मुलाकातें भी हुईं। अनिल अंबानी ने सेक्स ऑफेंडर की पहुंच का इस्तेमाल मोदी के एजेंडे को ट्रंप के साथ पिच करने के लिए किया।

भाजपा का पुराना दावा और नई हकीकत

इससे पहले जब एपस्टीन की फाइलों में पुरी का नाम आया था, तब भाजपा ने इसे "नाम का गलत इस्तेमाल" (Name-dropping) बताकर खारिज कर दिया था। लेकिन नए ईमेल बताते हैं कि यह रिश्ता केवल औपचारिक नहीं था। जून 2014 से जून 2017 के बीच, पुरी और एपस्टीन के बीच न केवल बातचीत हुई, बल्कि न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर पर कम से कम तीन मुलाकातें भी हुईं।
उस समय हरदीप पुरी किसी सरकारी पद पर नहीं थे। वे भारतीय विदेश सेवा (IFS) से रिटायर होकर न्यूयॉर्क के एक थिंक-टैंक (IPI) में काम कर रहे थे। वे 2017 में मोदी सरकार में मंत्री बने।

'डिजिटल इंडिया' की वकालत

ईमेल के अनुसार, एपस्टीन ने पुरी का परिचय लिंक्डइन (LinkedIn) के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से कराया था। पुरी ने हॉफमैन को भारत में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने एक विस्तृत ईमेल में प्रधानमंत्री मोदी के 'डिजिटल इंडिया' अभियान का जिक्र किया और बताया कि कैसे भारत का इंटरनेट बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
पुरी ने इन ईमेल की पुष्टि करते हुए कहा कि वे उस समय केवल भारत में व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा दे रहे थे। उन्होंने कहा, "मैं कह रहा था कि यह सरकार नवाचार (Innovation) पर ध्यान देगी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगी।"

'एग्जॉटिक आइलैंड' का रहस्य

दस्तावेजों में एक ईमेल ऐसा भी है जिसमें पुरी ने एपस्टीन से उनके "एग्जॉटिक आइलैंड" (अनोखे द्वीप) से लौटने के बारे में पूछा था। इस द्वीप (लिटिल सेंट जेम्स) को एपस्टीन के अपराधों का केंद्र माना जाता है। जब इस बारे में पुरी से पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी उस द्वीप का दौरा नहीं किया। उन्होंने "एग्जॉटिक" शब्द का इस्तेमाल केवल इसलिए किया क्योंकि शायद एपस्टीन के स्टाफ ने उसे इसी तरह बताया था।
इन फाइलों में केवल पुरी ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई बड़े नेताओं के नाम शामिल हैं, जैसे ब्रिटेन के पूर्व पीएम गॉर्डन ब्राउन और पूर्व सीआईए निदेशक बिल बर्न्स। हालांकि, पुरी के खिलाफ किसी भी आपराधिक गतिविधि का कोई सबूत इन फाइलों में नहीं मिला है; उनकी बातचीत पूरी तरह से व्यापारिक और निवेश से जुड़ी थी। लेकिन जिस तरह उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम आया है, वो चौंकाने वाला है।

अनिल अंबानी का एपस्टीन संपर्क

अमेरिकी न्याय विभाग के रिकॉर्ड्स, जो जेफरी एपस्टीन के जब्त किए गए डिवाइसों (जिसमें उनके आईफोन से टेक्स्ट मैसेज और ईमेल शामिल हैं) से प्राप्त हुए हैं, से पता चलता है कि भारतीय व्यवसायी अनिल अंबानी ने 2017 से 2019 तक एपस्टीन के साथ संपर्क बनाए रखा। इन संचारों में अमेरिकी राजनीतिक पहुंच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं और मई 2019 में न्यूयॉर्क में एक बैठक का जिक्र है, जिसे एप्स्टीन ने मोदी द्वारा भेजे गए प्रतिनिधि से जुड़ी बैठक बताया।


सबसे महत्वपूर्ण कम्युनिकेशन मई 2019 में हुए- एप्स्टीन की गिरफ्तारी से महज छह सप्ताह पहले, जब भारत में आम चुनावों के नतीजे आ रहे थे और मोदी की निर्णायक जीत हुई। 14 से 20 मई के बीच एपस्टीन और अंबानी ने 23 मई की बैठक तय की। 20 मई को एपस्टीन ने ट्रंप के पूर्व मुख्य रणनीतिकार स्टीव बैनेन को मैसेज किया: “modi sending someone to see me on thurs” (मोदी किसी को मेरे पास भेज रहे हैं)।

23 मई को दोपहर 4:30 बजे अंबानी एपस्टीन के मैनहट्टन टाउनहाउस (9 ईस्ट 71st स्ट्रीट) पहुंचे, जैसा कि उनकी सचिवालय से ईमेल पुष्टियों से पता चलता है। शाम 9:05 बजे एपस्टीन ने अंबानी को मैसेज किया: “today was a treat, nice seeing you” (आज मजा आया, आपसे मिलकर अच्छा लगा)।

उसी शाम लगभग 8:23 बजे एपस्टीन ने बैनेन को “really interesting modi meeting” के बारे में बताया। एपस्टीन ने बैठक में शामिल व्यक्ति को मोदी का “his guy” (प्रतिनिधि) बताया, जिसने कहा कि “वॉशिंगटन में कोई उससे (मोदी से) नहीं बोलता”, मोदी का “main enemy is CHINA! and their proxy in the region pakistan” (मुख्य दुश्मन चीन है और क्षेत्र में उनका प्रॉक्सी पाकिस्तान), और मोदी “totally buys into your vision” (आपकी विजन में पूरी तरह विश्वास करता है)।

एपस्टीन ने आगे लिखा: “his focus wants to be stopping china” (उसका फोकस चीन को रोकना है) और “I can set” (मैं व्यवस्था कर सकता हूं)। 24 मई की सुबह बैनेन ने मोदी पर एक घंटे का शो करने का जिक्र किया। एपस्टीन ने “modi on board” कहा और बैनेन से मोदी को जोड़ने का प्रस्ताव रखा, क्योंकि दोनों की चीन की समस्या साझा है। एपस्टीन ने अंबानी को सुझाव दिया: “mr modi might enjoy meeting steve bannon, you all share the china problem” (मोदी को स्टीव बैनेन से मिलना पसंद आएगा, आप सबकी चीन की समस्या साझा है), जिस पर अंबानी ने “Sure” कहा।

2017 से शुरूआत

दोनों के संबंध फरवरी 2017 में शुरू हुए, जब दुबई पोर्ट्स वर्ल्ड के सुल्तान अहमद बिन सुलायेम ने अंबानी का संपर्क साझा किया। 23 फरवरी को एपस्टीन ने अंबानी को “sultans family” का सदस्य बताया।2 मार्च 2017 को अंबानी ने लिखा: “Will need ur guidance on dealing wth white house for india relationship ad defense cooperation” (व्हाइट हाउस से भारत संबंध और रक्षा सहयोग के लिए आपकी सलाह चाहिए)। एपस्टीनन ने “tit for tat” कहा, अंबानी ने भारतीय बाजार की पेशकश की।

16 मार्च को दिल्ली से अंबानी ने जारेड कुश्नर और स्टीव बैनेन से मिलने में मदद मांगी, साथ ही मोदी के मई/जून में डीसी दौरे की। एपस्टीन ने ट्रंप के सहयोगी टॉम बैरक को ईमेल किया कि अंबानी आ रहे हैं और मोदी मई में आ सकते हैं।

अन्य संदेशों में मोदी की इसराइल यात्रा (जुलाई 2017) का जिक्र है, जहां एपस्टीन ने एक संपर्क को लिखा कि मोदी ने सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए इसराइल में “danced and sang” (नाचा-गाया), “IT WORKED!”। विदेश मंत्रालय ने इसे “convicted criminal” की बकवास बताया।

अनिल अंबानी का बैकग्राउंड

अनिल अंबानी रिलायंस ADA ग्रुप के चेयरमैन हैं (2005 में भाई मुकेश से अलगाव के बाद)। 2008 में उनकी संपत्ति $42 बिलियन थी (फोर्ब्स में 6वें स्थान पर)। मोदी सरकार में रिलायंस डिफेंस 2016 विवादित राफेल डील में ऑफसेट पार्टनर था। हाल में ED ने यस बैंक फ्रॉड आदि में उनकी संपत्तियां जब्त कीं, SEBI ने 2024 में 5 साल के लिए मार्केट से बैन किया। अनिल अंबानी ने कई जगह खुद को दिवालिया घोषित कर दिया।