केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अमेरिकी कारोबारी रीड हॉफमैन से जुड़े एक पुराने ईमेल आदान-प्रदान को लेकर नए सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह ईमेल वर्ष 2014-15 के हैं और इनमें अमेरिकी वित्तीय और यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन का नाम सामने आया है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इससे संबंधित ईमले साझा करते हुए यही सवाल उठाया है कि आखिर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी किसके लिए मीटिंग करवा रहे थे। हरदीप पुरी ने नेता विपक्ष राहुल गांधी के हमले के बाद बुधवार को जिस तरह से सफाई पेश करके इस मामले को हल्का करने की कोशिश की है, उनकी सफाई ने शक के दायरे को बढ़ा दिया है।  
पवन खेड़ा के अनुसार, 23 जून 2014 को जेफरी एपस्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को एक ईमेल में लिखा था कि “मैंने टेर्जे से बात की, रीड हॉफमैन भारत आने के लिए तैयार हैं।” इसके बाद जून से अक्टूबर 2014 के बीच एपस्टीन, हरदीप पुरी और रीड हॉफमैन के बीच ईमेल के जरिए संवाद चलता रहा।
इसके बाद 4 अक्टूबर 2014 को हरदीप पुरी और रीड हॉफमैन की मुलाकात हुई। खेड़ा का आरोप है कि इन ईमेल से यह संकेत मिलता है कि रीड हॉफमैन की भारत यात्रा से जुड़े फॉलो-अप और व्यवस्थाओं का काम हरदीप पुरी देख रहे थे, जबकि शुरुआती संवाद और समन्वय में जेफरी एपस्टीन की भूमिका दिखाई देती है।
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कांग्रेस नेता ने दावा किया कि 5 अक्टूबर 2014 को हरदीप पुरी ने एपस्टीन को भेजे एक ईमेल में बैठक की जानकारी देते हुए लिखा कि “14 सितंबर 2015 के सप्ताह में भारत यात्रा तय की गई है।” खेड़ा के अनुसार, इसका सीधा अर्थ यह है कि रीड हॉफमैन ने उस सप्ताह भारत आने पर सहमति जताई थी।

रीड हॉफमैन ने 28 सितंबर 2015 को नैसकॉम (NASSCOM) के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। उस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।

इन तथ्यों के आधार पर पवन खेड़ा ने कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या हरदीप पुरी उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एपस्टीन से बातचीत कर रहे थे? क्या एपस्टीन इस संवाद में किसी तरह की भूमिका निभा रहे थे? क्या इस प्रकार के संपर्क की किसी सरकारी एजेंसी ने जांच या आपत्ति की थी? कांग्रेस ने अमेरिकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा है कि ये ईमेल रिकॉर्ड सार्वजनिक दस्तावेजों का हिस्सा हैं।

हरदीप पुरी ने लेख लिखा और एपस्टीन को भेजा, यह क्या है

हरदीप पुरी ने 'भारत की व्यापार नीति की दुविधा और घरेलू सुधार की भूमिका' शीर्षक से एक लेख लिखा, जो 16 फरवरी 2017 को कार्नेगी इंडिया की वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ। उसी रात उन्होंने सोली जे. सोराबजी समेत कई लोगों को ईमेल भेजा। लेकिन उन्होंने नाम एक-एक करके टाइप किए, और सूची में तीसरे नंबर पर यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन का नाम था। उसे उस समय तक यौन अपराधों में सजा सुनाई जा चुकी थी। आखिर हरदीप पुरी को वो लेख एपस्टीन को भेजने की जरूरत क्यों पड़ रही थी। हरदीप पुरी का दावा है कि उन्होंने लिंक्डइन के संस्थापक रीड हाफमैन की भारत यात्रा के लिए एपस्टीन से नाममात्र का कोऑर्डिनेशनल किया था, वह भी 2014 के दौरान। एपस्टीन के अपार्टमेंट में उनकी मुलाकातों के और भी कई रिकॉर्ड मौजूद हैं। 
इस मामले पर अभी तक केंद्र सरकार या हरदीप सिंह पुरी की ओर से कोई ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है कि आखिर हरदीप पुरी यह संवाद या ईमेलबाजी किस औपचारिक या अनौपचारिक हैसियत कर रहे थे।
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में एपस्टीन फाइल्स का जिक्र करते हुए कहा था इसमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम आ रहा है, इसमें सरकार के नज़दीकी रहे अनिल अंबानी का नाम आ रहा है, लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इन लोगों को अब तक जेल में होना चाहिए था। राहुल के इस बयान पर बीजेपी सांसद और मोदी सरकार के मंत्री भड़क गए। उन्होंने नियमों का हवाला देकर कहा कि राहु बिना स्पीकर की अनुमति मिले यह मामला नहीं उठा सकते। उन्हें अपने आरोपों के जवाब में सबूत पेश करने होंगे। इस पर राहुल ने एक लिफाफा निकालकर सबूत पेश करने की बात कही। लेकिन बीजेपी सांसद शोर मचाते रहे। इसी दौरान केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी। लेकिन गुरुवार को बीजेपी राहुल गांधी के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाने से पीछे हट गई। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक नोटिस देकर सिर्फ यह कहा कि हम राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कराने का नोटिस दे रहे हैं। विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं आएगा।  

हरदीप पुरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और खतरे में पड़ता मंत्रीपद

हरदीप पुरी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि वो 3-4 बार एपस्टीन से मिले हैं। लेकिन उससे पहले तो एपस्टीन को सजा सुनाई जा चुकी थी। फिर भी वो एक अपराधी से क्यों मिल रहे थे। हरदीप पुरी ने अपने स्वीकारनामे में कहा कि वो एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले हैं। लेकिन प्रतिनिधिमंडल तो एक बार ही गया था। लेकिन एपस्टीन फाइल्स और कांग्रेस के आरोपों के अनुसार हरदीप पुरी तो एपस्टीन पर उसके घर जाकर मिले थे। वो घर जाकर क्यों मिले थे। जबकि उसे सजा सुनाई जा चुकी थी। इसका जवाब हरदीप पुरी ने नहीं दिया है। कहा जा रहा है कि हरदीप पुरी का मंत्रीपद खतरे में है, पीएम मोदी जल्द ही पीछा छुड़ा सकते हैं।