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मोदी ने प्रदर्शनकारियों पर किया तंज, कहा, देश को उनसे बचाना है

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो महीने से अधिक समय से चल रहे किसान आन्दोलन और उसे स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले समर्थन से बौखला गए हैं? क्या वे यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं कि लोग इससे जुड़ते जा रहे है? ये सवाल इसलिए पूछे जा रहे हैं कि उन्होंने बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस में आन्दोलनकारियों और उन्हें समर्थन देने वालों पर तीखा तंज किया। 

प्रधानमंत्री ने संसद में बहस में भाग लेते हुए कहा कि देश को 'फ़ॉरन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी' यानी 'एफ़डीएआई' से बचाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, "देश का विकास हो रहा है और हम एफ़डीआई की बात कर रहे हैं। पर देश में एक नए किस्म की एफ़डीआई आ रही है। हमें देश को इस एफ़डीआई से बचाना है।"

प्रधानमंत्री ने संसद में बहस में भाग लेते हुए कहा,

"हमें फ़ॉरन डाइरेक्ट इनवेस्टमेंट चाहिए, पर हमें फ़ॉरन डिस्ट्रक्टिव आइडियोलॉजी से ख़ुद को बचाना है।"


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

प्रदर्शनकारियों पर तंज

इतना ही नहीं, मोदी ने आन्दोलनकारियों का मजाक उड़ाते हुए उन्हें 'आन्दोलनजीवी' अर्थात जो आन्दोलन के बल पर ही जीते हैं, वह क़रार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, "देश में एक नए किस्म का तत्व आ गया है-आन्दोलन जीवी। उन्हें उस हर जगह देखा जा सकता है जहाँ किसी तरह का प्रदर्शन हो रहा हो, वह आन्दोलन वकीलों का हो, छात्रों का हो, मज़दूरों का हो, प्रत्यक्ष हो या परोक्ष हो।"

मोदी ने आन्दोलनकारियों से सख़्ती से निपटने का संकेत देते हुए कहा, 

"वे आन्दोलन के बग़ैर जी ही नहीं सकते। हमें उनकी पहचान करनी है और देश को उनसे बचाना है।"


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

सिखों की तारीफ

ऐसे समय जब कैबिनेट मंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी के लोग लगातार सिखों पर हमले कर रहे हैं और उन्हें खालिस्तान से जोड़ कर देख रहे हैं, बार-बार कह रहे है कि किसान आन्दोलन में खालिस्तानी तत्व शामिल हैं, प्रधानमंत्री ने सिखों की तारीफ की। उन्होंने कहा, "यह देश हर सिख पर गौरव करता है। उन्होंने देश के लिए क्या नहीं किया है? हम उनका जितना सम्मान करें, कम है।"

मोदी ने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए कहा, "मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने अपना महत्वपूर्ण समय पंजाब में बिताया है। उनमें से कुछ लोगों की बातें और उनके प्रयास उन्हें बरगला रहे हैं और इससे उन्हें फ़ायदा नहीं होगा।"

बता दें कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि किसान आन्दोलन में खालिस्तानी तत्व घुस गए हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और सूचना व प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद कई बार कह चुके हैं कि किसान आन्दोलन में खालिस्तानी समर्थक हैं। यही बात बीजेपी के दूसरे नेता कह चुके हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने संसद में हुई बहस में सिखों की तारीफ की। 

कृषि क़ानून का बचाव, विपक्ष पर हमला

नरेंद्र मोदी ने कृषि क़ानूनों का ज़ोरदार बचाव करते हुए विपक्ष को घेरा और कहा कि जब वे सरकार में थे तो कृषि सुधारों की बात करते थे, आज उसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा,

"शरद पवार और कांग्रेस के लोगों ने कृषि सुधारों की बात कही थी, वे वैसा नहीं कर सके। हमने किया है तो वे उसका विरोध कर रहे हैं।"


नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

'एमएसपी था, है, रहेगा'

मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को उद्ध़त करते हुए कांग्रेस पर ज़ोरदार हमला किया और कहा कि वह पहले जो कहती थी, आज उसका उल्टा कर रही है। उन्होंने कहा, "1930 में बने कृषि विपणन क़ानूनों की वजह से किसानों को दिक्क़त होती है, वे सबसे ऊँची कीमत पर अपने उत्पादन नहीं बेच सकते। हमारी कोशिश है कि हम इस तरह के तमाम अड़चनों को दूर करें।" 

प्रधानमंत्री ने संसद में एलान किया कि 'न्यूनतम समर्थन मूल्य था, है और रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से बातचीत के दरवाजे हमेशा खुले हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने बातचीत की कोई नई रूपरेखा नहीं दी, कोई नई बात नहीं की, न ही कोई नया प्रस्ताव दिया। इससे साफ है कि सरकार अपने रवैए पर अडिग है और किसानों को किसी तरह की अतिरिक्त रियायत नहीं दे सकती। 

संयुक्त किसान मोर्चा ने की मोदी की आलोचना

संयुक्त किसान मोर्चा ने 'आन्दोलनजीवी' शब्द और प्रधानमंत्री के तंज पर ज़ोरदार आपत्ति जताई है। एक बयान में इसने कहा है, "किसान प्रधानमंत्री को याद दिलाना चाहेंगे कि वे आन्दोलनजीवी ही थे, जिन्होंने भारत को औपनिवेशिक शासकों से मुक्त करवाया था और इसीलिए हमें आन्दोलनजीवी होने पर गर्व भी है। यह बीजेपी और उसके पूर्वज ही हैं, जिन्होंने कभी भी अंग्रेजों के ख़िलाफ़ कोई आंदोलन नहीं किया। वे हमेशा जन आंदोलनों के ख़िलाफ़ थे, इसलिए वे अभी भी जन आंदोलनों से डरते हैं।"

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