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रामदेव, बालकृष्ण, दूसरे 3 लोगों पर एफ़आईआर, धोखाधड़ी का आरोप

कोरोना महामारी की दवा बनाने का दावा करने वाली कंपनी पतंजलि और इसके प्रमुख रामदेव की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। रामदेव और दूसरे चार लोगों के ख़िलाफ़ प्रथामिकी यानी एफ़आईआर दर्ज कराई गई है। रामदेव पर ‘भ्रामक प्रचार’ करने का आरोप लगाया गया है।

रामदेव के अलावा पतंजलि आयुर्वेद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बालकृष्ण और दूसरे 3 लोगों के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआर दर्ज कराया गया है। 

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क्या है मामला?

पतंजलि ने कोरोनिल नामक दवा पेश करते हुए दावा किया था कि इससे कोरोना ठीक होता है। आयुष मंत्रालय ने इस दवा के प्रचार प्रसार और विज्ञापन पर रोक लगा दी थी और कंपनी से इसके क्लिनिकल टेस्टिंग का ब्योरा माँगा था। 

जयपुर के ज्योति नगर थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई गई है। इसमें रामदेव, बालकृष्ण, वैज्ञानिक अनुराग वार्ष्णेय, एनआईएमएस के अध्यक्ष बलबीर सिंह तोमर और निदेशक अनुराग तोमर के नाम भी शामिल हैं।
ज्योति नगर के थाना प्रमुख सुधीर कुमार उपाध्याय ने एफ़आईआर की पुष्टि कर दी है। एफ़आईआर दर्ज कराने वाले बलराम जाखड़ ने कहा है कि रामदेव समेत 5 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया गया है। कोरोनिल से जुड़े भ्रामक प्रचार का मामला दर्ज किया गया है। भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (फर्जीवाड़ा) के तहत एफ़आईआर दर्ज किया गया है। 

क्या कहना है?

बलवीर सिंह तोमर ने दावा किया कि कोरोनिल के क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति पतंजलि को मिली हुई थी। उन्होंने इंडिया टुडे से कहा,

‘रोगियों पर क्लिनिकल जाँच के लिए ज़रूरी अनुमति हमें मिली हुई थी। इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के अंग सीटीआरआई से टेस्टिंग की पूर्व अनुमति भी ले ली गई थी।’


बलबीर सिंह तोमर, अध्यक्ष, एनआईएमएस

100% सफलता का दावा

उन्होंने दावा किया कि ‘एनआईएमएस में 100 रोगियों पर ट्रायल किया गया, 3 दिन में 69 रोगी ठीक हो गए, 7 दिनों में सभी यानी शत प्रतिशत रोगी स्वस्थ हो गए।’ 

बलवीर सिंह तोमर ने यह ज़रूर माना कि ‘पतंजलि से यह पूछा जाना चाहिए कि कोरोनिल का प्रचार इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवा के रूप में किया जाना चाहिए या कोरोना की दवा के रूप में। हमने राजस्थान स्वास्थ्य विभाग को 2 जून को ही इसकी जानकारी दे दी थी।’ 

इसके पहले बिहार की एक अदालत में रामदेव और बालकृष्ण के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दायर किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि ‘कोरोना की दवा बनाने का भ्रम फैला कर लाखों लोगों की जान ख़तरे में डाली गई है। इस पर सुनवाई 30 जून को होगी।’ 

दूसरी ओर, रामदेव की कंपनी पतंजलि ने ज़ोर देकर कहा है कि उसने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है।
इसके पहले राजस्थान सरकार ने एनआईएमएस को नोटिस जारी कर कोरोना रोगियों पर पतंजलि की कथित दवा के ट्रायल के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा है।    

बाबा रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण ने मंगलवार को ही कोरोनिल दवा से कोरोना वायरस के संक्रमण के इलाज का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि कोरोनिल के साथ श्वासारी वटी भी लेनी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस, जयपुर ने मिलकर इस दवा को तैयार किया है। उनके मुताबिक़, दवा के क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल के लिए सीटीआरआई की मंजूरी ली गई थी। 
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