प्रतीकात्मक तसवीर।
डेल्टा से भी तेज़ी से फैलने वाले ओमिक्रॉन वैरिएंट के बीच चुनावी रैलियों और बड़ी-बड़ी भीड़ इकट्ठा करने का क्या असर होगा? दूसरी लहर के लिए चुनावी सभाएँ कितनी ज़िम्मेदार थीं और क्या इससे सीख ली गई?
चुनावी रैलियाँ और जनसभाएँ शुरू भी हो गई हैं। वैसी ही भीड़ है। बिना मास्क के। राजनीतिक दल और नेता बड़ी-बड़ी भीड़ के दावे कर रहे हैं।
मद्रास हाईकोर्ट ने तो उतने बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलने के लिए चुनाव आयोग को ज़िम्मेदार ठहराते हुए जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि कोरोना की दूसरी लहर के लिए किसी एक को ज़िम्मेदार ठहराना हो, तो अकेले चुनाव आयोग ज़िम्मेदार है।