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हाथरस कांड के विरोध में और दलितों ने दी धर्मांतरण की चेतावनी

हाथरस घटना के बाद ग़ाज़ियाबाद के करेरा में कथित तौर पर 236 दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने की बात अभी प्रशासन मानने को तैयार भी नहीं है कि और भी दलित परिवारों ने धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि हाथरस में दलित लड़की के साथ बर्बरता करने के विरोध में कई दलित 2 नवंबर को तब बौद्ध धर्म अपनाएँगे जब इस मामले में सुनवाई होगी। लेकिन इस बीच एक विवाद यह है कि पुलिस और प्रशासन धर्मांतरण की बात नहीं मान रहे हैं। इस मामले में एफ़आईआर भी दर्ज की गई है।

करेरा गाँव में दलित उत्पीड़न, भेदभाव और अपमान को लेकर नाराज़ हैं और हाथरस घटना के बाद वे इस पर निर्णायक फ़ैसले लेने की बात कह रहे हैं। 

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जब 14 अक्टूबर को 236 दलितों के बौद्ध धर्म अपनाने की रिपोर्ट आई थी तब भी सदियों से चले आ रहे दलित उत्पीड़न और भेदभाव की उनकी यही शिकायतें थीं। बौद्ध धर्म अपनाने का दावा करने वाले पवन वाल्मीकि ने कहा था करेरा के 236 लोग डॉ. भीमराव आंबेडकर के भाई के पड़पोते राजरतन आंबेडकर की उपस्थिति में बौद्ध धर्म ग्रहण किया। उन्होंने कहा था कि वे पीढ़ियों से ऐसा भेदभाव और अपमान सहते आए हैं, लेकिन हाथरस मामले ने उनको हिलाकर रख दिया। इस मामले में पीड़ित परिवार के प्रति सरकारी मशीनरी के रवैये ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी।

बौद्ध धर्म अपनाने का दावा करने वालों में 65 वर्षीय इंदर राम भी शामिल हैं। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, '19 साल की दलित महिला के साथ हाथरस में जो हुआ उसके बाद हमने धर्मपरिवर्तन का फ़ैसला किया। बौद्ध धर्म में कोई जाति नहीं है; कोई भी ठाकुर या वाल्मीकि नहीं है। हर कोई एक इंसान है, हर कोई सिर्फ़ एक बौद्ध है।' 70 वर्षीय श्रीचंद ने कहा कि जब भी देश में दलित पर अत्याचार होता है, हमें अपने बच्चों के लिए डर लगने लगता है।

दलित पीढ़ियों से चले आ रहे इन्हीं भेदभाव और उत्पीड़न को धर्म परिवर्तन का कारण बताते हैं और इसमें हाथरस मामला ताज़ा कड़ी है।

हालाँकि दलित इन्हीं कारणों का हवाला देते हुए धर्मांतरण का दावा कर रहे हैं लेकिन पुलिस और प्रशासन उन दावों को खारिज कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उन्हें धर्मांतरण के कोई सबूत नहीं मिले हैं और जो दस्तावेज़ ग्रामीण दिखा रहे थे उनमें कोई जानकारी नहीं थी। इस मामले में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है। शालीमार गार्डन निवासी मोंटू चंदेल वाल्मीकि द्वारा साहिबाबाद थाने में शिकायत दी गई। इसके बाद अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ धर्मांतरण की अफवाह और धार्मिक वैमनष्य फैलाने की एफ़आईआर दर्ज की गई है। 

'टीओआई' की रिपोर्ट के अनुसार, एसपी (शहर) और एडीएम (शहर) ने कथित धर्मांतरण की प्रारंभिक जांच की और ज़िला मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट सौंपी। अधिकारियों ने रिपोर्ट में कहा कि वे कथित धर्मांतरण के किसी भी प्रमाण को खोजने में विफल रहे हैं और प्रमाण पत्र में कोई नाम, पता, पंजीकरण या जारी करने की तारीख़ नहीं थी व कई प्रमाण पत्र खाली थे। 

करेरा गाँव के पवन वाल्मीकि ने 'टीओआई' से कहा,

'हमारा धर्मांतरण सीधे हाथरस मामले से संबंधित है। कुल मिलाकर करेरा में 70 वाल्मीकि परिवार हैं। उनमें से 50 परिवारों ने धर्मांतरण किया है। यह कहना ग़लत है कि ये प्रमाण पत्र जाली हैं। अब राजनीति खेली जा रही है, जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज की गई है।'

इस मामले में राजनीतिक मोड़ तब आ गया था जब बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर दावा किया कि करेरा मामले का दाऊद इब्राहिम से संबंध है।

इधर, अपनी समस्याओं को लेकर करेरा के ग्रामीणों ने अब प्रशासन को ज्ञापन दिया है। अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार डीएम अजय शंकर पांडे ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर मामले की गहन जाँच की जा रही है। समस्याओं के ज्ञापन को लेकर उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए क्षेत्र में शिविर आयोजित करें।

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