प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोल्ड खरीद पर एक साल के लिए संयम बरतने की अपील के तीन दिनों बाद सरकार ने सख्त नीतिगत फैसला लिया है। वित्त मंत्रालय ने 13 मई से गोल्ड और सिल्वर पर आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। यह कदम विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और चालू घाटे को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। हालांकि इसके लिए सरकार ने मिडिल ईस्ट संकट और तेल की बढ़ती कीमतों को जिम्मेदार ठहराया है।
  • हालांकि द हिन्दू के मुताबिक सोने और चांदी के आयात पर लगने वाले प्रभावी टैक्स को पहले के 9.2% से बढ़ाकर कुल 18.4% कर दिया है। द हिन्दू ने इसमें जीएसटी को भी जोड़ा है। इसी रिपोर्ट में आगे चलकर आप इस नुक्ते को समझ पाएंगे।
  • पहले बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) 5% + एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) 1% = कुल 6% थी। अब 13 मई से BCD 10% + AIDC 5% = कुल 15% हो गया है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

भारत गोल्ड उत्पादक देश नहीं है। लगभग पूरी मांग आयात से पूरी होती है, जो अमेरिकी डॉलर में चुकाई जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में गोल्ड आयात देश के कुल आयात बिल का 9-10 फीसदी रहा और रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर खर्च हुए। ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की महंगाई से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो चालू खाता घाटा (CAD) और बढ़ सकता है।
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सरकार का मकसद क्या है

विदेशी मुद्रा बचाना (30-40% कम आयात से 20-25 अरब डॉलर की बचत संभव है। अनावश्यक गोल्ड खरीदारी को हतोत्साहित करना।
कच्चे तेल जैसे जरूरी आयात के लिए डॉलर बचाना (भारत 88% तेल आयात करता है)। गिरते हुए रुपये को स्थिर रखना और सट्टेबाजी कम करना। लेकिन न रुपये का गिरना रुक पा रहा है और न ही सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की नाकामी छिपा पा रही है। भले ही इसके लिए ग्लोबल हालात को जिम्मेदार ठहरा दिया जाए लेकिन देश की आर्थिक नीति भी इन हालात के लिए कम जिम्मेदार नहीं है।

सरकार की घोषणा का फौरन असरः इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से गोल्ड फौरन महंगा हो गया है। MCX पर सुबह 9:59 बजे गोल्ड 1,63,000 रुपये और चांदी 2,96,600 रुपये पर कारोबार कर रही थी। दोनों में 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। इसके अलावा इसमें 3% GST, ज्वैलर मार्जिन और मेकिंग चार्जेस अलग से लगेंगे। 24 कैरेट गोल्ड की कीमत लगभग 15,475 रुपये प्रति ग्राम और चांदी 2,78,000 से 2,90,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई है।

इसका और क्या प्रभाव पड़ेगा

निवेशक: महंगे भाव से इन्वेस्टमेंट के लिए खरीदारी घटेगी। लोग गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर सकते हैं।
शादी-त्योहार: ऐसी खरीदारी में देरी या कमी संभव। पुराने गोल्ड को नए में बदलने का रुझान बढ़ सकता है।
ज्वेलर्स: ग्राहक घटने, इन्वेंटरी लागत बढ़ने और वर्किंग कैपिटल पर दबाव की आशंका। कुल मिलाकर ज्वैलर्स और जनता पर ज्यादा असर पड़ेगा।

क्या स्मगलिंग बढ़ेगी

भारत बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन सहित उद्योग जगत ने चेतावाया है कि उच्च ड्यूटी से ग्रे मार्केट और स्मगलिंग बढ़ सकती है। 2024 में ड्यूटी कम होने से स्मगलिंग घटी थी, अब 15% ड्यूटी के साथ पड़ोसी देशों से अवैध रास्ते फिर सक्रिय हो सकते हैं। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री की फिजूलखर्ची अपील और ड्यूटी बढ़ोतरी से कारोबार मुश्किल हो जाएगा और समानांतर अर्थव्यवस्था उभर सकती है। बुधवार को कुछ कारोबारियों ने इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के खिलाफ अपनी दुकानें बंद रखीं।
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प्रधानमंत्री की अपील और अब वित्तीय बाधा दोनों मिलकर गोल्ड की मांग को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। आम उपभोक्ताओं को गोल्ड के लिए जेब हर हालत में ढीली करना पड़ेगी। अर्थव्यवस्था को कितना फायदा होगा, इसके बारे में अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर स्मगलिंग बढ़ती है तो सरकार को नुकसान होगा। कुल मिलाकर गोल्ड अब अमृत होने जा रहा है।