भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) को एक कड़ा नोटिस जारी किया है। सरकार ने प्लेटफॉर्म पर फिल्मों, ओटीटी (OTT) कंटेंट और अन्य ऑडियो विजुअल (audio-visual) सामग्रियों की बढ़ती पायरेसी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए टेलीग्राम को इसके खिलाफ 15 दिनों के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इससे पहले सरकार ने मेटा वर्स कंपनी के वाट्सऐप और इंस्टाग्राफ पर यूजर प्राइवेसी को लेकर उन्हें भी नोटिस भेजा था।
सरकार ने टेलीग्राम को स्पष्ट रूप से कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए 15 दिनों के भीतर कड़े कदम उठाए। नोटिस के अनुसार, टेलीग्राम पर धड़ल्ले से नई रिलीज होने वाली फिल्में, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट कंटेंट गैर-कानूनी तरीके से साझा किए जा रहे हैं। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम से ऐसी प्रणालियों (systems) को मजबूत करने के लिए कहा है जो पायरेटेड कंटेंट की पहचान (detection), रिपोर्टिंग, पहुंच को ब्लॉक करने (disabling access) और उसे तुरंत हटाने (removal) में सक्षम हों।

क्या है पायरेसी का संकट?

टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई ऐसे चैनल्स और ग्रुप्स सक्रिय हैं, जो प्रीमियम ओटीटी कंटेंट और थियेटर में लगी फिल्मों को लीक कर देते हैं। इससे फिल्म इंडस्ट्री और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। 
ताज़ा ख़बरें
भारत में डिजिटल पायरेसी (इंटरनेट पर फिल्मों, गानों, सॉफ्टवेयर या वेब सीरीज को बिना अनुमति लीक करना या शेयर करना) और कॉपीराइट उल्लंघन को रोकने के लिए बेहद सख्त कानूनी प्रावधान हैं। इसके लिए मुख्य रूप से दो कानून लागू होते हैं: कॉपीराइट अधिनियम, 1957 (The Copyright Act, 1957) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000)।

क्या है वाट्सऐप का मामला

हाल ही में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप (WhatsApp) को भी एक बेहद महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। यह नोटिस व्हाट्सएप द्वारा हाल ही में घोषित किए गए 'यूजरनेम' (Username Feature) को लेकर है। सरकार ने व्हाट्सएप को भारत में इस फीचर के रोलआउट (शुरुआत) पर फिलहाल रोक लगाने का निर्देश दिया है और कंपनी से 3 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है।
व्हाट्सएप ने एक नया फीचर पेश करने की घोषणा की थी, जिसके तहत यूजर फोन नंबर छिपाकर एक यूनिक यूजरनेम (जैसे @Name123) सेट कर सकते हैं। इसके बाद लोग बिना फोन नंबर शेयर किए सिर्फ यूजरनेम के जरिए एक-दूसरे से चैट कर सकेंगे।

सरकार की चिन्ता क्या है

भारत सरकार ने इस पर गंभीर चिंताएं जताई हैं:

  • पहचान की चोरी और धोखाधड़ी (Impersonation): सरकार का मानना है कि इस फीचर का फायदा उठाकर साइबर अपराधी बड़े अधिकारियों, मशहूर हस्तियों, सरकारी एजेंसियों या बैंकों के नाम से मिलते-जुलते नकली यूजरनेम बना सकते हैं।

  • ऑनलाइन स्कैम और डिजिटल अरेस्ट: गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय को डर है कि इससे 'डिजिटल अरेस्ट', फिशिंग और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Frauds) के मामलों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि जालसाजों को अपनी पहचान छिपाना और आसान हो जाएगा।

  • जवाबदेही कम होना: अभी तक फोन नंबर के जरिए किसी अपराधी को ट्रैक करना आसान होता है (क्योंकि नंबर सिम कार्ड से जुड़ा होता है), लेकिन सिर्फ यूजरनेम होने से शुरुआती स्तर पर अपराधियों की पहचान मुश्किल हो सकती है।

वाट्सऐप ने सरकार को क्या जवाब दिया

सरकार के इस कड़े रुख और नोटिस पर व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा है और सुरक्षा का भरोसा दिया है:

  • फीचर अभी लाइव नहीं है: व्हाट्सऐप ने साफ किया कि यह फीचर अभी भारत में पूरी तरह लॉन्च (Live) नहीं किया गया है, अभी केवल यूजर्स को अपना पसंदीदा यूजरनेम 'रिजर्व' करने का विकल्प दिया जा रहा था।

  • नंबर बैकएंड में रहेगा: कंपनी ने स्पष्ट किया कि यूजरनेम आने के बाद भी व्हाट्सएप अकाउंट चलाने के लिए फोन नंबर अनिवार्य रहेगा। यह केवल प्राइवेसी (निजता) की एक अतिरिक्त परत है, नंबर का रिप्लेसमेंट नहीं।

पहचान चोरी रोकने के सुरक्षा उपाय


  • हाई-प्रोफाइल नाम होल्ड पर: सरकार, मशहूर हस्तियों, ब्रांड्स और वेरिफाइड मेटा अकाउंट्स के नामों को पहले से ही सुरक्षित (Hold) रख लिया गया है, ताकि कोई और उनके नाम का गलत फायदा न उठा सके।

  • सर्च लिमिट और एंटी-स्पैम: कोई भी अनजान व्यक्ति अंदाजे से यूजरनेम सर्च करके बार-बार मैसेज न कर सके, इसके लिए व्हाट्सऐप लिमिट तय करेगा।

  • मैसेज करने पर पूरी जानकारी: जब कोई यूजरनेम के जरिए पहली बार किसी को मैसेज करेगा, तो व्हाट्सऐप स्क्रीन पर दिखाएगा कि यह अकाउंट नया है या पुराना, क्या दोनों में कोई कॉमन ग्रुप है, या वह अकाउंट किसी दूसरे देश का है। इससे यूजर खुद तय कर सकेगा कि उसे बात करनी है या ब्लॉक करना है।

सरकार का फैसला

सरकार ने व्हाट्सऐप को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक इस विषय पर पूरी चर्चा नहीं हो जाती और सरकार पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक भारत में इस यूजरनेम फीचर को रोलआउट न किया जाए।