loader

गुजरातः नमाज पढ़ रहे विदेशी छात्रों पर भीड़ का हमला, हॉस्टल में तोड़फोड़

गुजरात विश्वविद्यालय अहमदाबाद में शनिवार देर रात हॉस्टल में हुए हमले के दौरान कई विदेशी छात्रों को गंभीर चोटें आईं। वो लोग हॉस्टल में नमाज पढ़ रहे थे। उसी दौरान यह घटना हुई। जानकारी के मुताबिक उज्बेकिस्तान, अफगानिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका से यहां पढ़ रहे छात्र अपने कमरों में नमाज पढ़ रहे थे। भीड़ ने उत्तेजक धार्मिक नारे लगाए और निहत्थे छात्रों पर हमला कर दिया।

हमले की यह घटना गुजरात यूनिवर्सिटी के ब्लॉक ए में हुई जहां विदेशी छात्र रहते हैं। अहमदाबाद शहर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) नीरजकुमार बडगुजर ने पुष्टि की कि एफआईआर दर्ज की गई है और आश्वासन दिया कि हमलावरों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घायल विदेशी छात्रों के बारे में बडगुजर ने कहा कि केवल एक ही अस्पताल में भर्ती है, जबकि अन्य का पहले ही इलाज किया जा चुका है और उन्हें छुट्टी दे दी गई है।

ताजा ख़बरें

छात्रों ने मीडिया को बताया कि "शनिवार रात लगभग 11 बजे 10-15 लोग हमारे छात्रावास परिसर में आए। जब ​​हम नमाज पढ़ रहे थे तो उनमें से तीन हमारे हॉस्टल बिल्डिंग में घुस गए। उन्होंने हमसे कहा कि हमें यहां नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं है और जय श्री राम के नारे लगाए।  उन्होंने सुरक्षा गार्ड को बाहर धकेल दिया और फिर नमाज पढ़ रहे लोगों पर हमला कर दिया। जब अन्य गैर-मुस्लिम विदेशी नागरिक छात्र हमारी मदद के लिए आए, तो उन पर भी हमला किया गया। उनके कमरों में तोड़फोड़ की गई, और लैपटॉप, मोबाइल फोन और शीशे क्षतिग्रस्त हो गए। अफगानिस्तान के एक छात्र ने बताया, ''दक्षिण अफ्रीका के दो और अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान और श्रीलंका के एक-एक छात्र घायल हो गए हैं।''

एक्स पर हेट डिटेक्टर यूजर ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है कि किस तरह पुलिस ने छात्रों पर हमला करने वाली भीड़ को जाने दिया। यह वीडियो हॉस्टल के बाहर का है।

छात्रों ने बताया कि हमलावरों के भाग जाने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। विदेशी छात्रों पर हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो के अनुसार कम से कम पांच वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

एक अधिकारी ने कहा, गुजरात के गृह मंत्री हर्ष सांघवी ने मामले को सुलझाने के लिए गुजरात पुलिस के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अपराध शाखा के संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी) सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक तत्काल बैठक बुलाई है।

गुजरात यूनिवर्सिटी की कुलपति नीरजा गुप्ता ने अपने मोबाइल फोन पर की गई कॉल का जवाब नहीं दिया। गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन पीआई एसआर बावा ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और इस स्तर पर अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। पांच घायल छात्रों को एसवीपी अस्पताल में भेज दिया गया है।

एक्स (ट्विटर) पर लोग इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। निर्झरी सिन्हा ने लिखा है- गुजरात की अस्मिता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बचाइए।
पत्रकार अरफा खानम शेरवानी ने एक्स पर लिखा है-  गुजरात में कानून एवं व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। विदेशी देशों से आए मुस्लिम छात्रों पर हिंसक भीड़ ने उस समय हमला कर दिया जब वे रमज़ान की नमाज़ अदा कर रहे थे। नीचे दिए गए वीडियो में आप जो सबसे खराब हिस्सा देखेंगे वह हत्यारी भीड़ नहीं है बल्कि मूक पुलिसकर्मी उन्हें खुली छूट दे रहे हैं।

एक्स यूजर गब्बर ने लिखा है- रमज़ान के पवित्र महीने में अपने धर्म का पालन करने के लिए गुजरात विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय मुस्लिम छात्रों पर हिंदुत्व भीड़ द्वारा हमला किया गया। अफ्रीका, उज्बेकिस्तान, तंजानिया और अफगानिस्तान समेत कई देशों के छात्र गुजरात यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल हॉस्टल में तरावीह (नमाज) पढ़ रहे थे, तभी एक हिंदू संगठन के गुंडों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाते हुए उन पर हथियारों से हमला कर दिया।

एक्स पर संदीप मंधाने ने लिखा है- न्यू इंडिया शाइनिंग। रमजान में गुजरात यूनिवर्सिटी में छात्रों पर हमला।
AIMIM प्रमुख असद्दुदीन ओवैसी ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर को ट्वीट टैग करते हुए घटना की निन्दा की। ओवौसी ने लिखा है-  कितनी शर्म की बात है। जब आपकी भक्ति और धार्मिक नारे तभी सामने आते हैं जब मुसलमान शांतिपूर्वक अपने धर्म का पालन करते हैं। जब आप मुसलमानों को देखकर बेवजह क्रोधित हो जाते हैं। यह सामूहिक कट्टरवाद नहीं तो क्या है? यह @अमितशाह & @नरेंद्र मोदी का गृह राज्य है। क्या वे कड़ा संदेश भेजने के लिए हस्तक्षेप करेंगे? मुस्लिम विरोधी नफरत भारत की सद्भावना को नष्ट कर रही है।
हालांकि गुजरात यूनिवर्सिटी की घटना को मीडिया का एक वर्ग छात्रों के बीच मारपीट का आपसी मामला साबित करने में जुटा हुआ है, लेकिन जनता ने सोशल मीडिया पर जो वीडियो और फोटो जारी किए हैं, उसनें मीडिया के उस वर्ग के दावे को झुठला दिया है।
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें