मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आज रविवार 4 अक्टूबर को भी 2 अक्टूबर की तरह दिल्ली-मुंबई में लोग सड़कों पर हैं। मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे हज़ारों की भीड़ के साथ मार्च निकाल रहे हैं। दिल्ली में भी आज ही मार्च निकलने वाला है।
मुंबई में रविवार 4 अक्टूबर को हज़ारों लोग सड़कों पर
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच आज रविवार 4 अक्टूबर को मुंबई में बड़ा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन हो रहा है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे लंबे अंतराल के बाद एक साथ सड़क पर उतरे हैं। दोनों नेताओं के नेतृत्व में 'विराट गर्जना मोर्चा' निकाला जा रहा है।
मार्च का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों में की जा रही Special Intensive Revision (SIR) और महाराष्ट्र में मतदाता सूची में कथित अनियमितताएं हैं। प्रदर्शनकारी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस और शरद पवार गुट वाली NCP (SP) के महाराष्ट्र के नेता भी इस विरोध में शामिल हैं।
मुंबई में दो भाई एक मंच पर
मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संयुक्त मार्च को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 'विराट गर्जना मोर्चा' दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ और BMC मुख्यालय की ओर बढ़ रहा है। दोनों नेताओं ने लोगों से बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होने की अपील की थी। इस प्रदर्शन में कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के नेता भी शामिल हुए हैं।ज्ञानेश काका, वोट मत लूटोः राज ठाकरे
मार्च के दौरान राज ठाकरे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नारा दिया—“Gyanesh Kaka, don't loot the vote”, यानी “ज्ञानेश काका, वोट मत लूटो।” राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में SIR को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि SIR को किसी आपात स्थिति में किए जाने की जरूरत होती है और सवाल उठाया कि अगर पहले बड़ी संख्या में मतदाता जोड़े गए थे तो अब कथित तौर पर करोड़ों नाम हटाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। राज ठाकरे के मुताबिक महाराष्ट्र में SIR के तहत करीब दो करोड़ मतदाताओं को हटाए जाने का सवाल है और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ये लोग कौन हैं। ये आंकड़े और आरोप राज ठाकरे ने प्रदर्शन के दौरान रखे हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।ठाकरे की दो बड़ी मांगें-SIR रद्द हो, बैलेट पेपर से चुनाव हों
राज ठाकरे ने केवल SIR रद्द करने की मांग नहीं की, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई। उन्होंने देशभर की विपक्षी पार्टियों से अपील की कि वे दिल्ली जाएं और केंद्र के सामने SIR रद्द करने की मांग रखें। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए मतदान व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है।
उद्धव और राज ठाकरे के संयुक्त मार्च की एक खास बात यह है कि इसमें पार्टी के झंडों की अनुमति नहीं है। समर्थकों सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज यानी तिरंगा लेकर चल रहे हैं। इस फैसले को दोनों नेताओं की ओर से आंदोलन को किसी एक पार्टी के बजाय लोकतंत्र और चुनावी अधिकारों से जुड़े व्यापक मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
संजय राउत का हमला- 'यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई'
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला। राउत ने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है, चुनावों को प्रभावित किया जा रहा है और लोगों के वोट के अधिकार के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था की तुलना 'तानाशाही' से करते हुए इस आंदोलन को व्यापक राजनीतिक प्रतिरोध बताया। राउत ने कहा कि यह आंदोलन केवल SIR तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है। ये राउत के राजनीतिक आरोप हैं।
मौजूदा और पूर्व CEC पर भी लगाए गंभीर आरोप
संजय राउत ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और मौजूदा CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में अनियमितताएं और कथित भ्रष्टाचार हुआ है। राउत ने यहां तक कहा कि इन कार्यकालों में हुए चुनावों को रद्द कर नए सिरे से लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराए जाने चाहिए। हालांकि ये राजनीतिक आरोप हैं और इनके समर्थन में कोई न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोपों का मुद्दा भी मुंबई के प्रदर्शन में उठा। संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन आती है, ऐसे में महिला पत्रकार की शिकायत पर केंद्र सरकार का रुख क्या है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कुछ महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं।
दिल्ली में भी जारी है CEC के खिलाफ आंदोलन
मुंबई के साथ दिल्ली में भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है। पिछले दो दिनों में जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इन प्रदर्शनों में AAP, वाम दलों, छात्र संगठनों और नागरिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी रही। शनिवार को भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। करीब 100 प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने के बाद पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी नारे लगा रहे थे-“वोट चोर, गद्दी छोड़” और “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो।”
दिल्ली में अब तक 1,000 से ज्यादा लोग हिरासत में
दिल्ली में पहले के प्रदर्शनों को लेकर करीब 1,100 लोगों की हिरासत की रिपोर्ट सामने आई है। प्रदर्शनकारी SIR के जरिए बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और अपडेट करने के लिए मृत, डुप्लीकेट और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना जरूरी है। आयोग ने पात्र लेकिन छूट गए मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष प्रक्रिया शुरू करने की भी बात कही है।
दिल्ली से मुंबई तक बड़ा अभियान
अब यह विवाद केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रह गया है। दिल्ली में प्रदर्शन, मुंबई में ठाकरे बंधुओं का मार्च और देश के दूसरे हिस्सों में प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम बताते हैं कि CEC ज्ञानेश कुमार और SIR का मुद्दा विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक अभियान बन चुका है। मुंबई में आज का मार्च इस अभियान को एक नया राजनीतिक आयाम दे सकता है। खासकर इसलिए क्योंकि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के साथ कांग्रेस तथा NCP (SP) के नेता भी मंच पर हैं।