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हमें इतिहास लिखने से कौन रोकेगा: अमित शाह

जिस इतिहास को दोबारा लिखने की बात बीजेपी और संघ से जुड़े लोग या इनके समर्थक समय-समय पर करते रहे हैं, उसको अब गृह मंत्री अमित शाह ने ही खुले मंच से कह दिया है। उन्होंने क्यों कहा कि कुछ लोगों ने इतिहास को विकृत कर दिया है? उन्होंने क्यों कहा कि सावरकर नहीं होते तो 1857 की क्रांति का सच सामने नहीं आ पाता?

गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को डॉ. ओमेंद्र रत्नू की पुस्तक 'महाराणा: सहस्र वर्षों का धर्मयुद्ध' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। अमित शाह ने कहा कि इतिहास सरकारों द्वारा नहीं रचा जा सकता है। उन्होंने समाज से इतिहास को उसके वास्तविक रूप में पेश करने की पहल करने का आग्रह किया। आक्रमणकारियों के ख़िलाफ़ भारतीय राजाओं द्वारा लड़े गए कई युद्धों को भुला दिए जाने पर दुख व्यक्त करते हुए अमित शाह ने कहा कि असम में अहोम राजाओं और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में शिवाजी के नेतृत्व वाले मराठा जैसी लड़ाइयों ने भारत को वह स्थान दिया है जहां वह आज है।

गृह मंत्री ने कहा, 'यह एक तथ्य है कि कुछ लोगों ने इतिहास को विकृत कर दिया है। उन्होंने जो कुछ भी चाहा, उन्होंने लिखा है। तो हमें कौन रोक सकता है? हमें कोई नहीं रोक सकता। इतिहास सरकारों द्वारा नहीं रचा जाता है, बल्कि यह सच्ची घटनाओं पर रचा जाता है।' 

बता दें कि आरएसएस और बीजेपी दोनों आरोप लगाते रहे हैं कि इतिहास की किताबें वामपंथी इतिहासकारों द्वारा रची गईं और जिन्होंने हिंदू राजाओं और राज्यों के योगदान को नज़रअंदाज़ किया था। अमित शाह लेखकों और फिल्म निर्माताओं से 'इतिहास का सच सामने लाने' पर काम करने का आग्रह करते रहे हैं। 

बहरहाल, अमित शाह ने कहा कि अगली पीढ़ी के लिए इन लड़ाइयों के बारे में लिखने की प्रक्रिया को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने कहा कि इतिहास की नई किताबों के माध्यम से तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करना होगा।

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उन्होंने कहा कि किसी भी समाज को अपना उज्ज्वल भविष्य बनाना है तो अपने इतिहास से प्रेरणा और सीख लेकर आगे का रास्ता प्रशस्त करना चाहिए। शाह ने आगे कहा, 

हमें टीका टिप्पणी छोड़ कर अपने गौरवशाली इतिहास को जनता के सामने रखना चाहिए, जब हमारा प्रयास बड़ा होगा तो झूठ का प्रयास खुद ही छोटा हो जायेगा। इसलिए हमें हमारा प्रयास बड़ा करने में अधिक ध्यान देना चाहिए।


अमित शाह, गृह मंत्री

उन्होंने कहा, 'अगर हम इतिहास पर शोध करना और लिखना शुरू करते हैं, तो इससे बहस शुरू होगी और युवा पीढ़ी चर्चा शुरू कर देगी। लेकिन यह एक लंबी यात्रा है... कई महत्वपूर्ण घटनाओं को भुला दिया गया क्योंकि समय की धूल उन पर जम गई थी। हमें उनका पता लगाना होगा और समाज को जगाने के लिए उन्हें लोगों के सामने लाना होगा।' उन्होंने कहा कि उन राजाओं की लड़ाई जो आक्रमणकारियों को बाहर रखने में सफल रहे थे, उन्हें ठीक से दर्ज भी नहीं किया गया है।

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उन्होंने लेखकों से पांड्य, अहोम, चालुक्य, मौर्य, गुप्त आदि राजवंशों पर किताबें लिखने का आग्रह करते हुए कहा कि इतिहास लिखने वालों ने इन राजवंशों की अनदेखी की। उन्होंने कहा, 'कोई संदर्भ पुस्तकें भी नहीं हैं। मैं कहना चाहता हूँ, इस पर टिप्पणी करना छोड़ कर, लोगों के सामने वास्तविक इतिहास को सामने लाने के लिए उन पर लिखना चाहिए। धीरे-धीरे जिस इतिहास को हम झूठा समझते हैं वह अपने आप मिट जाएगा।'

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गृह मंत्री ने कहा कि हालाँकि सरकार ने "वास्तविक इतिहास" के दस्तावेजीकरण की पहल शुरू कर दी है, लेकिन यह अभ्यास तभी सफल होगा जब समाज इसे एक मिशन के रूप में लेगा। उन्होंने कहा, 'अगर वीर सावरकर नहीं होते तो मैं आपको बता दूँ कि 1857 का सच सामने नहीं आता।'

शाह ने कहा, '... क्रांतियाँ जो उस समय पराजित हो गई होंगी, उनमें समाज और लोगों को जगाने की क्षमता थी। पद्मावती के बलिदान ने महिलाओं और पुरुषों को अपना सिर ऊंचा रखकर जीवन जीने की ऊर्जा दी थी। इतिहास का दस्तावेजीकरण महत्वपूर्ण है क्योंकि घटनाओं या विद्रोहों के परिणाम ठोस नहीं हैं, इसे लोगों पर इसके प्रभाव से तौला जाना चाहिए।'

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