Iran Israel War: ईरान पर इसराइल के हमलों की निन्दा से अब तक बच रहे भारत ने ब्रिक्स संगठन के बयान से सहमति जताते हुए हमलों की निन्दा की है। पीएम मोदी मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जाने वाले हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन का फाइल फोटो
भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के समूह के साथ मिलकर ईरान पर हुए सैन्य हमलों पर "गंभीर चिंता" व्यक्त की। इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है। ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान शामिल हैं। ब्रिक्स ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति के बढ़ते तनाव पर चिंता जताई गई और सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने का आह्वान किया गया। हालांकि भारत सरकार ने इस हमले की सीधे निन्दा नहीं की थी। जबकि ईरान ने आग्रह किया था। अलबत्ता पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति को फोन करके सारे हालात पर चिन्ता जताई थी लेकिन निन्दा नहीं की थी।
पीएम मोदी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जाएंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5-6 जुलाई को रियो डी जनेरियो में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए यात्रा करने वाले हैं। इस बयान से ठीक 10 दिन पहले भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के उस बयान से खुद को अलग कर लिया था, जिसमें इसराइल द्वारा किए गए सैन्य हमलों की निंदा की गई थी। भारत ने 13 जून को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि वह संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव को कम करने की वकालत करता है।
ब्रिक्स ने कहा- ईरान पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन
ब्रिक्स के संयुक्त बयान में कहा गया, "हम 13 जून 2025 से इस्लामिक गणराज्य ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हैं, और इसके परिणामस्वरूप मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति का बढ़ता तनाव सामने है।" बयान में मध्य पूर्व को परमाणु हथियारों और अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।भारत की सही कूटनीति
समझा जाता है कि भारत ने ब्रिक्स देशों की ओर से जारी बयान में शामिल होकर ईरान पर हमले के मुद्दे पर अपनी कूटनीति को सही करने की कोशिश की है। अन्यथा जी7 देशों के सम्मेलन की तरह ब्रिक्स में भी भारत को बुलाने पर ऐतराज हो सकता था और मोदी की आगामी विदेश यात्रा खटाई में पड़ सकती थी।
ईरान ने भारत के लोगों, राजनीतिक दलों का शुक्रिया अदा किया
ईरान ने भारत के इस रुख का स्वागत करते हुए दिल्ली में अपने दूतावास के माध्यम से बयान जारी किया। इसमें भारत के "स्वतंत्रता-प्रेमी" नागरिकों, राजनीतिक दलों, संस्थानों और अन्य लोगों को धन्यवाद दिया गया, जिन्होंने इसराइल और अमेरिका द्वारा किए गए सैन्य हमलों के खिलाफ तेहरान का समर्थन किया। दूतावास ने भारत के लोगों, राजनीतिक दलों, सांसदों, गैर-सरकारी संगठनों, धार्मिक और आध्यात्मिक नेताओं, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन की सराहना की।
बयान में यह भी कहा गया कि परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और संरक्षण को हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए, विशेष रूप से सशस्त्र संघर्षों में, ताकि लोगों और पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके। ब्रिक्स ने नागरिकों के जीवन और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पूर्ण अनुपालन में होना चाहिए।
इसके अलावा, भारत ने "ऑपरेशन सिंधु" के तहत युद्ध प्रभावित ईरान से अब तक 3,170 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला है। यात्रियों ने इस ऑपरेशन को सुचारू और अच्छी तरह से प्रबंधित बताया, जिसमें भारतीय दूतावास के अधिकारियों की सहायता की तारीफ की गई।
BIRCS ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने और कूटनीति व शांतिपूर्ण संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एकमात्र टिकाऊ रास्ता है।