संसद में वंदे मातरम् को लेकर उठा विवाद और SIR टिप्पणी पर बढ़ी रार। क्या ये घटनाएँ लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव और तानाशाही प्रवृत्तियों के बढ़ते खतरे का संकेत हैं? देखिए, श्रवण गर्ग की खरी खरी में।
पत्रकारिता में एक लंबी पारी और राजनीति में 20-20 खेलने के बाद आशुतोष पिछले दिनों पत्रकारिता में लौट आए हैं। समाचार पत्रों में लिखी उनकी टिप्पणियाँ 'मुखौटे का राजधर्म' नामक संग्रह से प्रकाशित हो चुका है। उनकी अन्य प्रकाशित पुस्तकों में अन्ना आंदोलन पर भी लिखी एक किताब भी है।


























