भारत ने रविवार को पाकिस्तान के उन आरोपों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कराची में सिंध रेंजर्स के कंपाउंड पर हुए हालिया आतंकवादी हमले का संबंध भारत से जोड़ने की कोशिश की। भारत ने इन दावों को पूरी तरह 'निराधार' बताया और इस्लामाबाद को अपनी ही जमीन से चल रहे आतंकी ढांचे को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।

भारतीय विदेश मंत्रालय का तीखा जवाब

पाकिस्तानी मीडिया और अधिकारियों द्वारा इस हमले के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराए जाने की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक कड़ा बयान जारी किया। रणधीर जायसवाल ने कहा: "हमने कराची की हालिया घटना को लेकर भारत के खिलाफ निराधार आरोप लगाने वाली पाकिस्तानी रिपोर्टें देखी हैं। हम इन आरोपों को पूरी तरह और स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के लिए यही बेहतर होगा कि वह अपने अंदर झांके, अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी बुनियादी ढांचे के खिलाफ सख्त और विश्वसनीय कार्रवाई करे और आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के एक औजार के रूप में इस्तेमाल करने की अपनी पुरानी आदत से खुद को मुक्त करे।

क्या है मामला?

शनिवार को पाकिस्तान के कराची शहर में एक बड़ा आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें सिंध रेंजर्स के एक कंपाउंड को निशाना बनाया गया। अक्टूबर 2024 के बाद से कराची शहर में यह पहला इतना बड़ा और प्रमुख आतंकवादी हमला था। इस हमले के तुरंत बाद, हमेशा की तरह पाकिस्तान ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए बिना किसी सबूत के इसका दोष भारत के सिर मढ़ने की कोशिश की, जिस पर अब भारत सरकार ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है।

कराची हमले में क्या हुआ

पाकिस्तान के कराची शहर में शनिवार, 27 जून 2026 की देर रात को एक बड़ा और भीषण आतंकवादी हमला हुआ। आतंकवादियों ने शहर के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित अर्धसैनिक बल 'सिंध रेंजर्स' के प्रांतीय मुख्यालय (कंपाउंड) को निशाना बनाया। इस हमले की शुरुआत मुख्य गेट पर विस्फोटक से भरी गाड़ी टकराने और एक बड़े धमाके के साथ हुई, जिसके तुरंत बाद आतंकियों ने परिसर में घुसने की कोशिश की और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
इस हमले की जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक भीषण मुठभेड़ चली। पाकिस्तान सेना और सिंध पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATF) ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। इस गोलीबारी में सिंध रेंजर्स के 3 जवान मारे गए और 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 3 हमलावरों को मौके पर ही ढेर कर दिया, जबकि एक घायल आतंकी को जिंदा पकड़ लिया गया, जिसकी पहचान अफगान नागरिक के रूप में हुई है।
प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) के अलग हुए धड़े 'जमात-उल-अहरार' ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। इस संगठन ने दावा किया कि हमले को अंजाम देने के लिए उनके कई लड़ाके परिसर में दाखिल हुए थे। कराची जैसे घने और व्यावसायिक शहर में अक्टूबर 2024 के बाद यह पहला इतना बड़ा और सुनियोजित आतंकी हमला है, जिसने पाकिस्तान के शहरी क्षेत्रों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना ने हमेशा की तरह बिना किसी ठोस सबूत के भारत पर उंगली उठाने की कोशिश की और इसे 'विदेशी प्रायोजित' हमला बताया। इस पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट शब्दों में नसीहत दी है कि वह दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय 'अपने गिरेबान में झांके' और अपनी ही जमीन से संचालित हो रहे आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ ठोस और कड़े कदम उठाए।