ओमान की खाड़ी में तीन नाविकों की मौत और तीन जहाजों पर यूएस के हमले की निन्दा ईरान कर रहा है। भारत के लोग कर रहे हैं। लेकिन भारत सरकार ने अमेरिका का नाम लेने पर चुप्पी साध रखी है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने नाविकों के मारे जाने पर दुख जताया लेकिन बीजेपी सांसद ने इस घटना के जिम्मेदार अमेरिका का नाम नहीं लिया। भारत सरकार की ओर से औपचारिक विरोध जताया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक बार भी अमेरिका का नाम नहीं लिया।

ईरान ने 3 नाविकों के मारे जाने पर क्या कहा

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भारतीय कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी हमलों के आरोपों की कड़ी निंदा की है। 
'X' पर एक पोस्ट में, बघाई ने इन हमलों को "भारतीय कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी हमले" बताया और कहा कि ये "अमेरिका की हथियारबंद लूट और सरकारी समुद्री डकैती की जारी नीति का स्पष्ट सबूत" हैं।

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने नाविकों की मौत पर क्या कहा

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने गुरुवार को एक्स पर लिखा था- यह अत्यंत दुख का विषय है कि मेरे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के हमीरपुर के गलोड़ के 23 वर्षीय होनहार युवा आदित्य शर्मा जी का ओमान तट के निकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हुए जहाज हमले में दुखद निधन हो गया। मर्चेंट शिप में बतौर डेक कैडेट अपना कर्तव्य निभाते हुए आदित्य शर्मा जी का निधन अत्यंत कष्टदायी व हृदय विदारक है। दुख की इस घड़ी में मैं पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ हूँ और मेरी हार्दिक संवेदनाएं आदित्य शर्मा जी के परिजनों के साथ हैं। ईश्वर आदित्य शर्मा जी दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोक संतप्त परिवार को यह दारुण दुःख सहन करने की शक्ति दें। इस मामले को लेकर मैं व्यक्तिगत रूप से विदेश मंत्री एस. जयशंकर व विदेश मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के संपर्क में हैं। आदित्य शर्मा जी के पार्थिव देह को शीघ्र स्वदेश लाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं विदेश मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही व इसके यथासंभव प्रयास किए जा रहे हैं। 
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अनुराग ठाकुर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी और बीजेपी की जबरदस्त निन्दा हो रही है। लोगों ने अपशब्दों तक इस्तेमाल किया है। लोगों के दो सवाल आम हैं- 1. नाविकों को शहीद क्यों नहीं कह रही बीजेपी, मोदी सरकार और अनुराग ठाकुर। 2. अमेरिका का नाम लेने से क्यों बच रही है बीजेपी, मोदी सरकार और अनुराग ठाकुर।

राजनयिक देवयानी का मामला याद दिलाया

वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए अमेरिका में भारतीय डिप्लोमेट देवयानी के साथ हुए बर्ताव का मामला उठाया है। उस समय देश में कांग्रेस की सरकार थी। उमाशंकर सिंह ने लिखा है- मामला भारतीय राजनयिक देवयानी के साथ अमेरिका में हुई बदसलूकी का था। एक अमेरिका प्रतिनिधिमंडल भारत आया था। यूपीए की सरकार थी। विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद मिले क्योंकि नाराज़गी जतानी थी। बदसलूकी के विरोध स्वरूप लोकसभा स्पीकर, गृह मंत्री समेत तमाम नेताओं ने मिलने से मना कर दिया। खुद गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी, जो कि तब तक बीजेपी की तरफ़ से पीएम कैंडिडेट घोषित हो चुके थे, उन्होंने भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मिलने से मना कर दिया। ये ख़बर देख कर सोचता हूँ कि तीन भारतीयों के मारे जाने के बाद भी क्या आज के समय में मोदी सरकार में कोई किसी अमेरिकी से मिलने से मना कर सकता है?

3 नाविकों की मौत पर पीएम मोदी की चुप्पी पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ, विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार डॉ ब्रह्म चेलानी ने एक्स पर लिखा है- अगर किसी हवाई हमले में तीन अमेरिकी व्यापारी नाविक मारे जाते, तो अमेरिका में चौबीसों घंटे चलने वाला राजनीतिक संकट खड़ा हो जाता है। लेकिन मंगलवार को होर्मुज़ के पास अमेरिकी हवाई हमले में तीन भारतीय चालक दल के सदस्यों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम ध्यान आकर्षित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है और मामला विदेश मंत्रालय द्वारा दर्ज कराए गए एक नियमित राजनयिक विरोध तक सीमित रह गया है। यह भी कोई अकेली घटना नहीं थी। इस सप्ताह भारतीय चालक दल वाले टैंकरों पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का यह तीसरा मामला था। सोमवार को अमेरिकी नौसेना के एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने ओमान की खाड़ी में एक अन्य टैंकर पर सटीक निर्देशित हथियारों (प्रिसीजन-गाइडेड म्यूनिशन) का इस्तेमाल किया, जिसके बाद ओमानी अधिकारियों को जहाज पर मौजूद सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकालना पड़ा। इसके बाद आज (गुरुवार 11 जून) ओमान के तट के पास गिनी-बिसाऊ ध्वज वाले एक टैंकर के इंजन कक्ष पर अमेरिकी विमान ने दो हेलफायर मिसाइलें दागीं, जिससे जहाज में भीषण आग लग गई। सौभाग्य से, इस जहाज पर सवार सभी 20 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित बच गए।

सरकार का रुख पहले के रवैए से बिल्कुल अलग क्यों

द हिन्दू की डिप्लोमैटिक अफेयर्स संपादक सुहासिनी हैदर ने एक्स पर लिखा है- अमेरिकी नौसेना द्वारा 3 भारतीयों की हत्या पर सरकार का रुख़ न सिर्फ़ पहले के रवैये से बिल्कुल अलग है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकार होर्मुज़ में नाकेबंदी लागू करने के अमेरिकी कदम को सही मानती है। 2019 से UN-समर्थित कार्रवाइयों और प्रतिबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता में धीरे-धीरे कमी आई है।

परिवार पूछ रहे हैं: आखिर जिम्मेदार कौन?

मृतकों के परिवार केवल शवों की वापसी ही नहीं, बल्कि जवाबदेही भी मांग रहे हैं। आंध्र प्रदेश के सुरेश पटनाला की पत्नी भार्गवी बताती हैं कि हर सुबह उनके पति का "गुड मॉर्निंग" संदेश आता था। हमले वाले दिन वह संदेश नहीं आया। पिछली रात उनका अंतिम संदेश था—"गुड नाइट, बच्चों का ख्याल रखना।" भार्गवी कहती हैं, "हम चार लोग थे, अब तीन रह गए हैं।" सुरेश अपने विवाह की वर्षगांठ से पहले घर लौटने वाले थे। परिवार का कहना है कि उन्हें रिलीविंग लेटर भी मिल चुका था और वे केवल अपने प्रतिस्थापन का इंतजार कर रहे थे।
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर निवासी आदित्य शर्मा के परिवार ने भी सवाल उठाए हैं। उनके दादा अशोक शर्मा पूछते हैं कि यदि जहाज को चेतावनी दी गई थी तो कप्तान ने आगे बढ़ने का फैसला क्यों किया। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। आदित्य के पिता राजेश शर्मा ने यह सवाल भी उठाया कि जब 21 चालक दल के सदस्य बचा लिए गए तो तीन लोगों की जान कैसे चली गई। हालांकि राजेश शर्मा के पीएम मोदी के समर्थन में एक्स पर ढेरों ट्वीट देखे जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी शिवानंद चौरसिया की मौत ने भी उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। छह महीने पहले ही विदेश में पहली नियुक्ति पर गए शिवानंद अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बच्चों और वृद्ध माता-पिता को छोड़ गए हैं। उनके गांव में इस पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है।

नाविक संगठनों का गुस्सा

नेशनल यूनियन ऑफ सीफेयरर्स ऑफ इंडिया (NUSI) ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में काम करने वाले समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकारों और जहाज मालिकों की साझा जिम्मेदारी है। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसैनिक बलों को जहाज पर मौजूद लोगों की राष्ट्रीयता की जानकारी होने की संभावना थी, फिर भी कार्रवाई की गई। 

कांग्रेस का हमला: मोदी-ट्रंप संबंधों पर सवाल

कांग्रेस ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को "लापरवाह" करार देते हुए भारत सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को कूटनीतिक उपलब्धि बताते रहे हैं। ऐसे में जब भारतीय नागरिकों की जान चली गई, तब सरकार केवल औपचारिक विरोध दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
कांग्रेस ने मृतकों के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा, शवों की शीघ्र स्वदेश वापसी और जीवित बचे नाविकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने की मांग की है।

क्या भारतीयों की कीमत कूटनीतिक चुप्पी है?

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और कहा है कि ऐसे हमले बंद होने चाहिए। लेकिन बहस इस बात पर है कि क्या तीन भारतीय नागरिकों की मौत केवल एक राजनयिक नोट से कहीं बड़ा मुद्दा नहीं है? भारत लंबे समय से "रणनीतिक स्वायत्तता" की बात करता रहा है। लेकिन जब भारतीय नागरिकों की जान अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में जाती है, तब क्या केवल औपचारिक विरोध पर्याप्त है? या फिर यह वह क्षण है जब नई दिल्ली को स्पष्ट रूप से यह संदेश देना चाहिए कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा किसी भी रणनीतिक साझेदारी से ऊपर है? यही वह सवाल है जिसका जवाब मृतकों के परिवार, नाविक समुदाय और विपक्ष लगातार मांग रहे हैं।