पीयूष गोयल ने अमेरिका से व्यापार समझौता के लिए बेहतर टैरिफ दरों की मांग की है। इधर, विपक्ष ने पीयूष गोयल को तब सर्जियो गोर का 'प्राइवेट सेक्रेटरी' बता दिया जब उन्होंने कहा कि अगर वह (गोर) न मिल पाएँ, तो वे केंद्रीय मंत्री गोयल से 'संपर्क' कर सकते हैं।
सर्जियो गोर और पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी BTA को तभी अंतिम रूप दिया जाएगा जब भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ दरें मिलेंगी। दूसरी ओर, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की पीयूष गोयल को लेकर की गई एक हल्के-फुल्के अंदाज की टिप्पणी राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है। विपक्ष ने इस टिप्पणी को लेकर सरकार पर तंज कसते हुए गोयल को अमेरिकी राजदूत का 'प्राइवेट सेक्रेटरी' और 'वीजा ऑफिस का रिसेप्शनिस्ट' तक बता दिया।
पीयूष गोयल ने गुरुवार को लीवरेजिंग एफटीएज आउटरीच प्रोग्राम की एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सरकार का रुख सामने रखा। एएनआई के अनुसार गोयल ने कहा कि जैसे ही अमेरिका भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ दर देने के लिए तैयार होगा, भारत समझौते को अंतिम रूप देकर उसके अंतिम विवरण की घोषणा कर देगा। भारत लंबे समय से अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में इस बात पर जोर देता रहा है कि भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में सही और प्रतिस्पर्धी दरें तय की जाएं।
क्या है भारत-अमेरिका BTA?
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित बाइलेट्रल ट्रेड एग्रीमेंट यानी BTA का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना और व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के बाजारों में उत्पादों की पहुंच बेहतर करने, टैरिफ कम करने और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल बनाने पर बातचीत कर रहे हैं। भारत के लिए अमेरिका एक बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में समझौते में मिलने वाली टैरिफ दरें भारतीय कंपनियों और निर्यातकों के लिए काफी अहम हैं।
अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जुलाई में कहा था कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का टेक्स्ट लगभग अंतिम रूप ले चुका है और अगले तीन से चार महीनों में इस पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। अधिकारी के मुताबिक दोनों देशों के बीच समझौते की रूपरेखा कागज पर तैयार है और देरी मुख्य रूप से प्रक्रियागत वजहों से हो रही है। हालाँकि, अमेरिका की ओर से चल रही सेक्शन 301 ट्रेड इंवेस्टिगेशंस को अभी एक प्रमुख लंबित मुद्दा बताया गया था। ऐसे में अब भारत की ओर से बेहतर टैरिफ़ दरों पर दिया गया जोर यह संकेत देता है कि अंतिम समझौते में शुल्क की दरें बड़ी भूमिका निभाएंगी।
सर्जियो गोर के बयान से बवाल क्यों?
व्यापार समझौते की बातचीत के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की पीयूष गोयल को लेकर की गई टिप्पणी ने अलग राजनीतिक बहस छेड़ दी है। गोर ने बुधवार को ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया के वार्षिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने पीयूष गोयल को अपना 'प्रिय मित्र' बताया।
गोर ने कहा कि दिल्ली आने के बाद उनके दो पसंदीदा मंत्री हैं- विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल। इसके बाद गोर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर लोग उनसे संपर्क नहीं कर पाते हैं तो वे पीयूष गोयल से संपर्क कर सकते हैं और गोयल उनकी मदद कर देंगे।
गोर ने कहा कि गोयल अमेरिका और भारत के रिश्तों की गंभीर चिंता करते हैं और उनके तथा उनकी पत्नी के साथ भी उनकी अच्छी दोस्ती है।
गोयल ने भी दिया मजाकिया जवाब
अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी पर पीयूष गोयल ने भी उसी हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अब उन्हें गोर को अपना दोस्त कहने में डर लग रहा है, क्योंकि अगर गोर ऐसी टिप्पणी कई बार और करते हैं तो उनके कार्यालय में बहुत से लोग अमेरिकी वीजा की अपॉइंटमेंट लेने पहुंच जाएंगे। गोयल ने साथ ही कहा कि उन्हें पता है कि अमेरिकी दूतावास वीजा के मामले में नियम नहीं तोड़ता और इसलिए लोगों को ऐसा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कार्यक्रम में यह बातचीत हल्के-फुल्के माहौल में हुई थी। लेकिन बाद में विपक्षी नेताओं ने इसी टिप्पणी को राजनीतिक मुद्दा बना लिया।
कांग्रेस का तंज- 'विश्वगुरु से वीजा ऑफिस रिसेप्शनिस्ट तक'
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस मामले में केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को अमेरिकी राजदूत के 'सचिव' के तौर पर अतिरिक्त काम करना पड़ रहा है।
खेड़ा ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा- 'विश्वगुरु से वीजा-ऑफिस रिसेप्शनिस्ट तक- क्या गिरावट है!' कांग्रेस ने इस टिप्पणी के जरिए मोदी सरकार की विदेश नीति और अमेरिका के साथ उसके रिश्तों को लेकर भी सवाल उठाने की कोशिश की।
महुआ मोइत्रा ने भी साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सर्जियो गोर के बयान का वीडियो साझा करते हुए पीयूष गोयल पर तंज किया। उन्होंने कहा कि यह 'शर्मनाक' है कि भारत के वाणिज्य मंत्री को अमेरिकी राजदूत के लिए अपॉइंटमेंट तय करने वाले 'प्राइवेट सेक्रेटरी' के तौर पर पेश किया जा रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी भारत और अमेरिका के रिश्तों में शक्ति संतुलन को लेकर सवाल खड़े करती है।
असली मुद्दा टैरिफ़
बहरहाल, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर अंतिम सहमति किस स्तर पर बनती है। भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को अमेरिका में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर स्थिति मिले। इसके लिए टैरिफ दरों में पर्याप्त रियायत जरूरी मानी जा रही है। दूसरी तरफ़, अमेरिका भी भारतीय बाजार में अपने उत्पादों की बेहतर पहुंच चाहता है। ऐसे में दोनों देशों को अपने-अपने आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।
पीयूष गोयल का ताज़ा बयान साफ़ संकेत देता है कि भारत जल्दबाजी में किसी समझौते पर हस्ताक्षर करने के बजाय अपने निर्यातकों के लिए बेहतर शर्तें सुनिश्चित करना चाहता है। अब देखना होगा कि अमेरिका भारत की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और प्रस्तावित BTA को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच टैरिफ पर कब सहमति बनती है।