मार्को रूबियो ने चार दिन की भारत यात्रा के दौरान कहा था कि भारत अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा और अब सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है और जल्द हस्ताक्षर हो जाएंगे।
सर्जियो गोर और प्रधानमंत्री मोदी (फाइल फोटो)
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि समझौते की सिर्फ 1 प्रतिशत बातचीत बाकी है और यह अगले कुछ हफ्तों या महीनों में साइन हो सकता है। उनकी यह घोषणा तब हुई है जब तीन दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की चार दिन की भारत यात्रा ख़त्म हुई है और इस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर यानी क़रीब 42 लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जता चुका है। इस बयान को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर फिर से समर्पण करने का आरोप लगाया था। अमेरिकी अदालत द्वारा ट्रंप के टैरिफ़ को रद्द किए जाने से पहले जब फरवरी महीने में भारत अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर फैक्टशीट जारी हुई थी तब भी राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सरकार ने संवेदनशील कृषि और डेयरी बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलकर 'भारत माता को बेच दिया' है। बहरहाल, अब फिर से नये सिरे से ट्रेड डील पर बात हो रही है।
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने आईआईटी दिल्ली में यूएस-इंडिया ट्रस्ट इनीशियटिव कार्यक्रम में कहा, 'पिछले हफ्ते भारत की टीम वाशिंगटन गई थी ताकि आखिरी 1% मुद्दों को सुलझाया जा सके। अगले हफ्ते अमेरिकी टीम भारत आएगी और बातचीत जारी रहेगी।'
दोनों देशों की सकारात्मक बात
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने भी शुक्रवार को ही कहा है अप्रैल में भारतीय टीम अमेरिका गई थी और अब अगले हफ्ते अमेरिकी टीम भारत आने वाली है। उन्होंने कहा कि बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है। व्यापार मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका की एक उच्चस्तरीय टीम 1 से 4 जून के बीच भारत आएगी, जहां बाकी बचे मुद्दों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।रूबियो की भारत यात्रा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की चार दिन की भारत यात्रा 26 मई को ख़त्म हुई। इस यात्रा को राजदूत गोर ने बेहद अहम बताया। रूबियो ने भारत को 'दो वैश्विक प्रभाव वाले देशों का सामरिक गठबंधन' बताया और कहा कि दोनों देश एक स्थायी और दोनों के लिए फायदेमंद व्यापार समझौते की कगार पर हैं।
कुछ दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बड़ा दावा किया है कि भारत अगले पाँच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर यानी क़रीब 42 लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जता चुका है। यह खरीदारी मुख्य रूप से ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्र में होगी। रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था, 'अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और हमारे डिप्लोमैट्स के प्रयासों से भारत ने अगले 5 साल में ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और कृषि क्षेत्र में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने का फैसला किया है।'रूबियो के बयान पर प्रसिद्ध रणनीतिक विशेषज्ञ डॉ. ब्रह्मा चेल्लानी ने इस हालात को लेकर चेताया था कि अमेरिका की व्यापार नीति चीन की व्यापार नीति से भी ज़्यादा ख़राब है।
चेल्लानी ने कहा था, 'रूबियो का यह बयान याद दिलाता है कि ट्रंप प्रशासन के तहत अमेरिका की व्यापार कूटनीति बहुत दबाव वाली है। यह चीन की डेब्ट-ट्रैप डिप्लोमेसी से भी ज्यादा दबाव वाली लग रही है। व्यापार को अब अमेरिका हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।'
चेल्लानी ने आगे कहा, 'व्यापार अब आर्थिक दबाव डालने का अमेरिका का एक बेढंगा औज़ार बन गया है। आर्थिक लाभ उठाने के लिए ट्रंप का सख़्त रवैया अमेरिका के उन गठबंधनों और रणनीतिक साझेदारियों को कमज़ोर कर रहा है, जिन पर आख़िरकार अमेरिकी ताक़त टिकी हुई है।'
पुराना समझौता और बदलाव
फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के बाद जारी फैक्टशीट में शुरू में 'committed' यानी प्रतिबद्ध शब्द का इस्तेमाल किया गया था। बाद में इसे बदलकर 'intends' कर दिया गया जिसका मतलब है कि ऐसा करने का इरादा है। फरवरी में ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ़ किया था कि 500 अरब डॉलर कोई बाध्यकारी लक्ष्य नहीं है।
गोयल ने कहा था, 'हमारा इरादा कुछ उपकरण खरीदने का है, लेकिन हमें ऐसा करना ज़रूरी नहीं है। खरीदारी क़ीमत, गुणवत्ता और ज़रूरत के आधार पर होगी। हर साल 100 अरब डॉलर खरीदने की कोई बाध्यता नहीं है।'टैरिफ़ का मुद्दा
पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ बढ़ा दिया था। रूस से तेल खरीदने के कारण 25% अतिरिक्त सजा वाला टैरिफ भी लगाया गया था, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था। फरवरी में दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौता होने के बाद अमेरिका ने सजा वाली 25% टैरिफ हटा दी और भारतीय सामान पर प्रभावी टैरिफ 18% कर दिया गया। लेकिन इस बीच फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जवाबी टैरिफ लगाने के कानूनी आधार को रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिका ने सभी देशों पर एक समान 10% टैरिफ लगा दिया।
भारत-अमेरिका संबंध पर गोर का बयान
बहरहाल, शुक्रवार को सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों की संभावनाएं अनंत हैं। उन्होंने कहा, 'आज भारत की अहमियत सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर सामरिक रूप से भी बहुत ज्यादा है।' पिछले 20 सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है।
ट्रस्ट इनीशियटिव के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, ऊर्जा और स्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।अमेरिका का भरोसा भारत पर?
राजदूत गोर ने भारत को भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा, 'भारत Pax Silica पहल में शामिल होने वाले दुनिया के पहले 10 देशों में शामिल है। अमेरिका भारत के लोगों, तकनीक और सरकार पर भरोसा करता है। दवाओं के क्षेत्र में अमेरिका अपनी 40% जेनेरिक दवाएं भारत से आयात करता है।' उन्होंने दावा किया कि अमेजन भारत में 2030 तक 35 अरब डॉलर, माइक्रोसॉफ्ट 17.5 अरब डॉलर निवेश करने जा रहा है। इसके अलावा NASA-ISRO का NISAR मिशन, Axiom-4 मिशन और Artemis Accords जैसे कार्यक्रमों में सहयोग बढ़ रहा है।
क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग
उन्होंने कहा कि भारत के नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन का स्वागत करते हुए दोनों देश सप्लाई चेन, प्रोसेसिंग और रिसर्च में साथ काम कर रहे हैं। अमेरिका अब एक्सपोर्ट कंट्रोल नीति में बदलाव कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच हाई-टेक्नोलॉजी क्षेत्र में सहयोग और बढ़ेगा। राजदूत गोर ने जोर देकर कहा कि उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और अमेरिका से बेहतर साझेदारी दुनिया में कोई नहीं है।
भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। जानकारों का मानना है कि अगर यह डील हो गई तो दोनों देशों के व्यापार में और तेजी आएगी और टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा। अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी टीम की भारत यात्रा इस डील के लिए बहुत अहम मानी जा रही है।