सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती
CBI की क्लोजर रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि सुशांत की मौत में रिया या किसी अन्य की कोई भूमिका नहीं थी। AIIMS की फोरेंसिक टीम ने भी "हत्या" या "जहर देने" जैसे दावों को खारिज किया था। इसके बावजूद, मीडिया ने चार साल तक इस मामले को सनसनीखेज बनाए रखा। अब जब सच सामने आ गया है, सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या मीडिया अपनी गलती स्वीकार करेगा और रिया से माफी मांगेगा?
कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला "मीडिया ट्रायल" का एक जीता-जागता उदाहरण है, जहां तथ्यों से ज्यादा सनसनी को तरजीह दी गई। पत्रकारिता के नैतिकता पर सवाल उठाते हुए एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, "मीडिया को अपनी सीमाएं समझनी चाहिए। बिना सबूत के किसी को दोषी ठहराना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि अमानवीय भी।"