देश में एलपीजी का संकट कितना बड़ा है? गैस सिलेंडर के लिए कई जगहों पर बड़ी-बड़ी लाइनें लगने और ब्लैक मार्केटिंग की ख़बरें आईं। सिलेंडर की क़ीमत बढ़ी। एलपीजी सिलेंडर बुक करने की न्यूनतम वेटिंग पीरियड को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन किया गया। एलपीजी की कमी से मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई में रेस्तराँ बंद होने लगे। होटल एसोसिएशनों ने विज्ञप्ति जारी कर कह दिया कि गैस की कमी के कारण रेस्तराँ नहीं चलाया जा सकता है। सरकार ने एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लगाया है। और अब इन ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में मध्य पूर्व युद्ध से पैदा हुए एलपीजी संकट पर चर्चा हुई। रिपोर्ट है कि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए रणनीतिक योजना शुरू कर दी है।
प्रधानमंत्री ने यह उच्चस्तरीय बैठक तब बुलाई है जब ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है। यह रास्ता दुनिया के तेल और गैस के लिए बेहद अहम है। भारत अपनी कुल एलपीजी ज़रूरत का 62 फ़ीसदी आयात करता है। इनमें से 85-90 फ़ीसदी सऊदी अरब जैसे देशों से आता है, जो इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है। अब यह रास्ता बंद होने से सप्लाई रुक गई है। भारत सालाना क़रीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी इस्तेमाल करता है। सप्लाई रुकने से अब गैस सिलेंडर को लेकर स्थिति ख़राब होने लगी है।
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सरकार ने आम घरों को बचाने के लिए घरेलू रसोई गैस को प्राथमिकता दी है। इसलिए कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बहुत कम हो गई है। ये सिलेंडर मार्केट रेट पर मिलते हैं। इस संकट से मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में रेस्तराँ और होटल बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इंडिया होटल्स एंड रेस्तराँ एसोसिएशन ने इस पर चिंता जताई है।

सरकार ने कई इमरजेंसी कदम उठाए हैं

  • रिफाइनरी को कहा गया है कि पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन कम करके एलपीजी ज्यादा बनाएं।
  • घरेलू यूजर्स के लिए रिफिल बुकिंग साइकल 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी न हो।
  • आयातित एलपीजी को अस्पतालों और स्कूलों जैसे जरूरी सेक्टर में भेजा जा रहा है।
  • ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की कमिटी बनाई गई है। यह कमिटी होटल, रेस्तराँ और इंडस्ट्री की मांगों की जाँच करेगी और जरूरत, महत्व और उपलब्धता के आधार पर गैस बांटेगी।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी एचपीसीएल ने बयान दिया है कि भले ही भू-राजनीतिक समस्या बड़ी है, लेकिन प्रोडक्शन बढ़ाने के क़दम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह कमिटी ग़ैर-ज़रूरी कमर्शियल सप्लाई का फ़ैसला करेगी।

ईरान से 3000 किमी दूर भारत में असर

ईरान युद्ध के असर अब भारत की किचन और होटल-रेस्तराँ पर पड़ रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से एलपीजी की कमी हो गई है। पिछले कुछ दिनों में एलपीजी एजेंसी के बाहर लंबी कतारें लगी हैं। लेकिन सबसे ज़्यादा मार रेस्तराँ और होटल पर पड़ी है, खासकर मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और लखनऊ में।

भारत 60 फ़ीसदी से ज़्यादा एलपीजी आयात करता है और इनमें से ज़्यादातर होर्मुज से गुजरती है। कुल 31 मिलियन टन सालाना ख़पत में 87 फीसदी घरों में जाता है, बाक़ी होटल-रेस्तरां में।

होटल क्यों सबसे ज़्यादा प्रभावित?

युद्ध दूसरे हफ्ते में है। कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुक गई है। ज़्यादातर रेस्तराँओं में पीएनजी या इलेक्ट्रिक सिस्टम नहीं है, इसलिए वे एलपीजी पर निर्भर हैं। इससे वड़ा पाव, मसाला डोसा जैसी चीजें महंगी हो सकती हैं या मेन्यू से गायब हो सकती हैं।

मुंबई में संकट गहरा

मुंबई होटल एसोसिएशन यानी एएचएआर ने कहा कि 20 फ़ीसदी होटल और रेस्तराँ बंद हो चुके हैं। अगर सप्लाई नहीं सुधरी तो अगले दो दिनों में 50 फीसदी तक बंद हो सकते हैं। दादर और अंधेरी जैसे इलाक़ों में रेस्तराँ मेन्यू छोटा कर रहे हैं और समय कम कर रहे हैं। सरकार ने घरेलू गैस को प्राथमिकता दी है और एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लगाया है। कमर्शियल गैस अस्पतालों और स्कूलों को जा रही है। रेस्तरां मालिक कहते हैं कि रविवार से सप्लाई लगभग बंद है।
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बेंगलुरु में भी हाल खराब

बेंगलुरु होटल एसोसिएशन ने कहा कि 10 मार्च से शहर में ऑपरेशन प्रभावित होंगे। ऑयल कंपनियों ने कहा था कि 70 दिनों तक कोई समस्या नहीं होगी, लेकिन अचानक सप्लाई रुक गई। मशहूर विद्यार्थी भवन अब बंद होने की कगार पर है। इसकी ओर से कहा गया है कि अब पांच सिलेंडर बचे हैं, कल दोपहर तक चलेंगे और उसके बाद बंद करना पड़ेगा। गैस बचाने के लिए दो तवे बंद कर दिए हैं।

सिद्धारमैया का पुरी को खत- एलपीजी की कमी से संकट

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार को केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बेंगलुरु में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी की समस्या बताई है। यह कमी इतनी गंभीर हो गई है कि इससे शहर के होटल, रेस्तरां, पेइंग गेस्ट हॉस्टल, मैरिज हॉल, कम्युनिटी हॉल और अन्य जगहों पर खाना बनाने में बड़ी मुश्किल हो रही है।
सिद्धारमैया ने पत्र में कहा कि 9 मार्च को केंद्र सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें घरेलू एलपीजी को पहले प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। इस आदेश का अच्छा इरादा तो समझ में आता है, लेकिन इससे बेंगलुरु में कमर्शियल गैस की आपूर्ति अचानक बाधित हो गई है। इस वजह से शहर का खाने-पीने का पूरा सिस्टम प्रभावित हो सकता है। होटल-रेस्तरां बंद होने लगें तो लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर बड़ा असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने मंत्री से अनुरोध किया है कि वे जल्दी हस्तक्षेप करें और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दें कि बेंगलुरु में पर्याप्त कमर्शियल एलपीजी उपलब्ध कराई जाए।

चेन्नई में स्टॉक ख़त्म

चेन्नई होटल एसोसिएशन ने पेट्रोलियम मंत्री को पत्र लिखा कि डिस्ट्रीब्यूटर स्टॉक नहीं होने की बात कहकर सप्लाई रोक रहे हैं। कई रेस्तराँ बंद हो गए। पॉपुलर होटल अन्नपूर्णा ने मेन्यू कम कर दिया और ऑपरेशन घटा दिए।

कोलकाता भी प्रभावित

पूर्वी भारत होटल एसोसिएशन ने कहा कि सोमवार तक कुछ सप्लाई थी, लेकिन आज सुबह से पूरी तरह रुक गई। बालाराम मल्लिक जैसे बड़े बेकरी मालिक ने कहा कि उनकी सेंट्रल किचन रोज 40 सिलेंडर इस्तेमाल करती है, लेकिन आज से सप्लाई नहीं है। स्थिति न सुधरी तो बंद करना पड़ेगा।
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सरकार के कदम

सरकार कहती है कि कोई कमी नहीं है, लेकिन रिफाइनरी में प्रोडक्शन बढ़ाया जा रहा है। घरेलू बुकिंग की अवधि 25 दिन की कर दी। घरेलू सिलेंडर 60 रुपये महंगा हुआ। कमर्शियल सिलेंडर 114.5 रुपये महंगा हुआ। कमिटी बनाई गई है कमर्शियल मांग देखने के लिए।
लेकिन नेशनल रेस्तराँ एसोसिएशन यानी एनआरएआई ने कहा है कि जमीन पर स्थिति अलग है। सप्लाई नहीं हो रही, भले सरकार कहे कोई बैन नहीं है। यह संकट दिखाता है कि दूर का युद्ध भारत की रोजमर्रा की जिंदगी को कैसे प्रभावित कर सकता है। सरकार वैकल्पिक स्रोत तलाश रही है, लेकिन फिलहाल घरों को प्राथमिकता है।