दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार, 20 जुलाई को प्रदर्शन कर रहे हजारों छात्रों और युवकों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (Human Rights Watch - HRW) ने भारत सरकार से इस पूरी घटना की निष्पक्ष और फौरन जांच कराने का आग्रह किया है।
ह्यूमन राइट्स वॉच की उप एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने भारतीय अधिकारियों से उन गंभीर आरोपों की जांच करने की अपील की है, जिनमें पुलिस द्वारा निहत्थे और शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागने, पानी की बौछारें करने और लाठीचार्ज करने की बात कही गई है। HRW के अलावा एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने भी सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग को अनुचित और असमान बताते हुए चिंता जताई है।

इंटरनेट बहाल करने की मांग

HRW ने भारत सरकार और दिल्ली पुलिस को नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने कहा है। उसने बहुत ज्यादा बल प्रयोग से बचने की सलाह दी है। एचआरडब्ल्यू ने प्रदर्शन स्थल और सेंट्रल दिल्ली के आसपास बंद की गई मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को तुरंत बहाल करने की मांग की है। मानवाधिकार संगठन ने कहा, दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
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'चलो संसद' मार्च और जंतर-मंतर पर क्या हुआ?

सोमवार (20 जुलाई) को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के आह्वान पर आयोजित "चलो संसद" (March to Parliament) मार्च के दौरान स्थिति बिगड़ी।

भारी भीड़ का जुटना: सोमवार सुबह से ही हजारों की संख्या में छात्र और युवा हाथ में राष्ट्रध्वज और संविधान की प्रतियां लेकर जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे।

मांगें: प्रदर्शनकारी वर्ष 2026 की नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जवाबदेही तय करने, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजे की मांग कर रहे थे।

पुलिस कार्रवाई: संसद भवन की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई स्तर की बैरिकेडिंग की थी। गतिरोध बढ़ने पर सुरक्षा बलों ने पानी की बौछारों (Water Cannons), आंसू गैस के गोलों और लाठीचार्ज का सहारा लिया। जंतर-मंतर स्थित अस्थायी टेंट और मंच को भी हटा दिया गया।

घायलों की संख्या: इस धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज में 50 से अधिक प्रदर्शनकारी छात्र घायल हुए, जिन्हें आरएमएल (RML) व अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। वहीं पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से हुए पथराव और बैरिकेड तोड़ने के प्रयास में 100 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

इंटरनेट पर पाबंदी और मेट्रो स्टेशन बंद

घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए पुलिस ने मध्य दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी थी। इसके साथ ही प्रदर्शन स्थल के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक और जनपथ सहित कई नजदीकी मेट्रो स्टेशनों के निकास द्वार बंद कर दिए गए, जिससे आम यात्रियों और छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

राजनीतिक हलचल और प्रदर्शनकारियों का रुख

पुलिस कार्रवाई की विपक्ष के नेताओं और नागरिक समाज ने कड़ी निंदा की है। विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण संवाद की जगह लाठियों से जवाब देना अनुचित है।
दूसरी तरफ, पुलिस द्वारा टेंट हटाए जाने के बावजूद सोमवार देर रात CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर वापस लौटकर अपना मंच फिर से तैयार कर लिया और कहा कि जब तक मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, उनका शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। उन्होंने मंगलवार 21 जुलाई को फिर से संसद मार्च शुरू करने की घोषणा की है।