जंतर मंतर प्रोटेस्ट के दौरान पुलिसिया दमन पर अब राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश के गृहमंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांगा है। खड़गे ने शाह से पुलिसिया दमन पर चार बड़े सवाल पूछे हैं और कहा कि यदि वह इन सवालों के जवाब नहीं दे सकते हैं तो उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि यदि वह इस्तीफ़ा नहीं देते हैं तो पीएम मोदी को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए। इससे एक दिन पहले राहुल गांधी ने भी छात्रों के दमन को लेकर अमित शाह का इस्तीफ़ा मांगा है और कहा है कि उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ेगा। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी अब शाह के इस्तीफ़े की मांग कर दी है।

संसद के मानसून सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। खड़गे ने आरोप लगाया कि छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे गंभीर सवालों का जवाब सरकार नहीं दे रही है।

'पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया?'

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने राज्यसभा में चार बड़े सवाल उठाए और अमित शाह से जवाब मांगा-
  1. छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत किसने दी?
  2. सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे?
  3. RAF और CRPF किसके आदेश पर काम कर रहे थे? 
  4. इस पूरे घटनाक्रम का सर्वोच्च सूत्रधार कौन था?
खड़गे ने कहा कि देश इन सवालों के जवाब चाहता है। उन्होंने आगे कहा, 'अगर गृह मंत्री इन सवालों के जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वह इस्तीफा नहीं देते तो प्रधानमंत्री को उन्हें पद से हटा देना चाहिए।'

कांग्रेस अध्यक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा, 'इसके लिए जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं। वे बंद कमरे में बैठकर सब सुन रहे होंगे, लेकिन ज्यादा दिन तक छिप नहीं सकते। जनता उनसे जवाब मांगेगी।' खड़गे की इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया, जिसके कारण सदन में कुछ देर तक हंगामा भी हुआ।

100 से ज्यादा छात्र घायल हुए

राज्यसभा में खड़गे ने दावा किया कि दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान 100 से अधिक छात्र घायल हुए और कई छात्रों को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा, 'कई छात्र अस्पतालों में भर्ती हैं। कुछ छात्रों की आंखों में कथित तौर पर पैलेट के छर्रे लगे हैं। यह सब देखकर हमें शर्म आती है। पता नहीं सरकार को शर्म आई या नहीं।' उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों और छोटे शहरों से पढ़ने आए छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।

बिहार में AK-47 के इस्तेमाल पर भी सवाल

खड़गे ने बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान कथित तौर पर AK-47 के इस्तेमाल का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, तो इतनी कठोर कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी। साथ ही उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उनका स्वागत किए जाने पर भी सवाल उठाया और कहा कि छात्रों पर कार्रवाई के आरोपों के बीच ऐसा संदेश गलत जाता है।

सिर्फ जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक नहीं रुकेगा

खड़गे ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार केवल जुर्माना बढ़ा रही है, सजा कड़ी कर रही है, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट बना रही है, लेकिन इससे पेपर लीक जैसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'असल सवाल यह है कि परीक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत कैसे बनाया जाए कि पेपर लीक ही न हो।'

'2024 में हमारी बात नहीं मानी'

खड़गे ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने 2024 में भी सरकार को परीक्षा प्रणाली मजबूत करने के सुझाव दिए थे, लेकिन उस समय सरकार ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा, 'लोकसभा चुनाव सामने थे, इसलिए सरकार राजनीति कर रही थी। राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान लगातार पेपर लीक का मुद्दा उठा रहे थे। सरकार ने जल्दबाजी में कानून बनाया और अब दो साल के भीतर उसी कानून में संशोधन करना पड़ रहा है।'

'मोदी कार्यकाल में 1.25 लाख छात्रों की आत्महत्याएँ'

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लगातार होने वाले पेपर लीक का सबसे बड़ा असर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में छात्रों ने आत्महत्या की है और परीक्षा प्रणाली में बार-बार होने वाली गड़बड़ियां भी छात्रों की निराशा का एक कारण रही हैं। उन्होंने कहा कि मोदी के कार्यकाल में 1.25 लाख छात्रों ने आत्महत्या की।

मनुस्मृति पर टिप्पणी से नया विवाद

अपने भाषण के दौरान खड़गे ने मनुस्मृति का भी ज़िक्र किया, जिस पर बीजेपी सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे की टिप्पणी समाज में विभाजन पैदा कर सकती है और इसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इसके बाद सभापति ने कहा कि मनुस्मृति से जुड़ी विवादित टिप्पणियों को कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।

बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने खड़गे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने मनुस्मृति के बारे में तथ्यात्मक रूप से गलत बातें कहीं और मूल ग्रंथ का सही संदर्भ नहीं दिया। सत्ता पक्ष के सांसदों ने यह भी कहा कि विपक्ष बिना पर्याप्त सबूत के गंभीर आरोप लगा रहा है।
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सरकार का पक्ष

सरकार की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि संशोधित एंटी-पेपर लीक कानून परीक्षा में धांधली रोकने के लिए और अधिक सख्त बनाया गया है। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों के तहत पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा, भारी जुर्माना, फास्ट ट्रैक कोर्ट और संगठित गिरोहों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

वहीं जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पहले भी कह चुकी है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे और विपक्ष के कई आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

खड़गे के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों और मनुस्मृति पर दिए गए बयान को लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। हालाँकि बहस के दौरान विपक्ष ने छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जबकि सरकार ने संशोधित कानून को युवाओं के हित में बताया।