पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब को लेकर लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब से 2020 के भारत-चीन संघर्ष पर उद्धरण पढ़ने नहीं दिया गया। इसके विरोध में कांग्रेस, टीएमसी, आप, सीपीआई और सीपीआई-एम जैसे विपक्षी दल राज्यसभा से वॉकआउट कर गए।

सत्र शुरू होते ही खड़गे ने इस पर बोलने की मांग की, लेकिन चेयर ने पहले किसी अन्य सदस्य को जीरो आवर में बोलने का मौक़ा दिया। कांग्रेस सदस्यों ने विरोध किया कि पहले खड़गे को बोलने दिया जाए।

खड़गे ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 4 दिनों से लोकसभा नहीं चल रही है क्योंकि राहुल गांधी को बोलने का मौक़ा नहीं मिल रहा। खड़गे बोले, 'लोकसभा और राज्यसभा दोनों संसद के मज़बूत स्तंभ हैं। लेकिन सरकार अपनी गलतियों को छिपाने के लिए एक सदन को चलने नहीं दे रही। मोदी सरकार देश को धोखा दे रही है और देश का अपमान कर रही है। जब राहुल गांधी इस पर बोलते हैं तो उन्हें रोका जाता है। यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।'
खड़गे ने आगे कहा, 'बीजेपी के लोग बार-बार नेहरू जी और इंदिरा जी पर अपशब्द कहते हैं। विपक्ष के नेता के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों की मैं निंदा करता हूं।'

जब खड़गे ने नरवणे की किताब से उद्धरण देने की कोशिश की, तो सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। हंगामा बढ़ गया। चेयरमैन और बीजेपी नेताओं ने कहा कि लोकसभा के मामलों को राज्यसभा में नहीं उठाया जा सकता। उपराष्ट्रपति ने कहा, 'लोकसभा की कार्यवाही राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती, आप अच्छी तरह जानते हैं।'

नड्डा का पलटवार

बीजेपी के जे.पी. नड्डा ने खड़गे पर पलटवार किया। नड्डा ने कहा, 'सरकार सभी चर्चाओं के लिए तैयार है। पीएम मोदी लोकसभा में जवाब देने को तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने सदन नहीं चलने दिया। लोकसभा में खड़गे को दिए समय से ज्यादा बोलने दिया गया। लोकतंत्र खतरे में है, ऐसा कहना गलत है। कांग्रेस को एक 'अबोध बालक' का गुलाम न बनाएँ।' यह बात राहुल गांधी पर कटाक्ष थी।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन सुचारू रूप से चल रहा था। उन्होंने खड़गे से अपील की कि सदन के नियमों का पालन करें और राहुल गांधी को नियमों का पालन करने की सलाह दें। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खड़गे के 'लिंचिंग' शब्द पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'आप कह रहे हैं कि हम लिंचिंग करते हैं। राजस्थान में कांग्रेस सरकार में एक दर्जी की लिंचिंग हुई, कोई कार्रवाई नहीं हुई। केरल में कांग्रेस सरकार में एक टीचर के हाथ काटे गए, क्या कार्रवाई हुई?'
हंगामा बढ़ने पर विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए। यह विवाद तब और गहरा गया जब विपक्ष ने 2020 के गलवान संघर्ष पर नरवणे की किताब के आधार पर चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार और स्पीकर इसे अनुमति नहीं दे रहे और कह रहे हैं कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

सदन में यह हंगामा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान हो रहा था, जब पीएम मोदी का जवाब होना था। संसद का यह सत्र लगातार बाधित हो रहा है।

लोकसभा में भी हुआ था बवाल

राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान और संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि 2020 के भारत-चीन लद्दाख गतिरोध के दौरान जब चीनी टैंक भारतीय क्षेत्र की ओर बढ़ रहे थे तो जनरल नरवणे ने उच्च अधिकारियों से निर्देश मांगे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए। इसके बजाय संदेश आया- 'जो उचित समझो, वह करो'। रिपोर्टों के अनुसार किताब में नरवणे ने लिखा है कि वे सच में अकेला महसूस कर रहे थे और "entire establishment" ने उन्हें छोड़ दिया था।

राहुल का मुख्य आरोप था कि प्रधानमंत्री ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, फैसला सेना पर छोड़ दिया, और यह राष्ट्रीय सुरक्षा की विफलता को दिखाता है। उन्होंने किताब की कॉपी दिखाई और कहा कि अगर पीएम सदन में आएंगे तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह किताब भेंट करेंगे।

विवाद क्यों हुआ?

यह किताब भारत में अभी प्रकाशित नहीं हुई क्योंकि रक्षा मंत्रालय से क्लियरेंस नहीं मिला। हालांकि कुछ अंश विदेशी संस्करण या लीक के जरिए उपलब्ध हैं, और कारवाँ मैगजीन में इसके उद्धरण छपे थे। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने नियमों का हवाला देकर राहुल को अप्रकाशित किताब या अप्रमाणित, मैगजीन के उद्धरण पढ़ने से रोका, क्योंकि सदन में केवल प्रमाणित, रिकॉर्ड पर रखी सामग्री का हवाला दिया जा सकता है।

सत्तापक्ष का विरोध रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य भाजपा सांसदों ने तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अप्रकाशित, अप्रमाणित सामग्री से राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस नहीं हो सकती, और यह सेना के मनोल को गिराने की कोशिश है। सदन कई बार स्थगित हुआ, हंगामा हुआ, और कुछ विपक्षी सांसदों को निलंबित भी किया गया।