आम जनता की जेब पर एक बार फिर महंगाई की मार पड़ी है। घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में ₹29 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी गई है। पिछले तीन महीनों के भीतर रसोई गैस की कीमतों में यह दूसरी बड़ी वृद्धि है। बढ़ी हुई कीमतें आज (रविवार, 7 जून 2026) से लागू हो गई हैं।

घरेलू कुकिंग गैस रेट बढ़ोतरी की खास बातें

दिल्ली में नई कीमतें: इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹913 से बढ़कर अब ₹942 हो गई है। सभी बढ़ोतरी को ईरान पर थोपे गए अमेरिका-इसराइल युद्ध से जोड़ दिया गया है।
पिछली बढ़ोतरी: इससे पहले इसी साल मार्च में मोदी सरकार ने दिल्ली में रसोई गैस के दाम ₹60 बढ़ाए थे। 
दाम बढ़ने की वजह: सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन की आपूर्ति (Global Supply चेन) बुरी तरह प्रभावित हुई है। यही कारण है कि सरकार ने हाल के दिनों में पेट्रोल, डीजल, हवाई ईंधन (ATF) और कमर्शियल एलपीजी के दामों में भी बढ़ोतरी की है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें गिर रही थीं तो सरकार ने उसका फायदा भारत की जनता को नहीं दिया।
कंपनियों का नुकसान: तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का कहना है कि इस बढ़ोतरी के बावजूद रसोई गैस की बिक्री पर हो रहे घाटे की पूरी भरपाई नहीं हो पाई है। इस नई समीक्षा से पहले, सरकारी तेल कंपनियां प्रति घरेलू सिलेंडर पर लगभग ₹703 का घाटा उठा रही थीं। 

किस एलपीजी पर सबसे तगड़ी मार

  • होटल, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में लगातार कई महीनों से भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
  • 1 जून को ही कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹42 बढ़ाकर ₹3,113 कर दिए गए थे।
  • इससे पहले मई में ₹1,000, अप्रैल में ₹195.5 और मार्च में ₹114.5 की भारी वृद्धि की गई थी।
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एलपीजी महंगी होने से क्या जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा

आम आदमी के बजट पर सीधा असर: घरेलू रसोई गैस की कीमतों में ₹29 की बढ़ोतरी सीधे तौर पर मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक बजट को बिगाड़ेगी। मार्च में हुई ₹60 की बढ़ोतरी के बाद यह दूसरा बड़ा झटका है, जिससे महिलाओं के लिए रसोई का खर्च संभालना और मुश्किल हो जाएगा।
चौतरफा महंगाई (Inflation) की आशंका: यह बढ़ोतरी अकेले नहीं आई है। पेट्रोल, डीजल और कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों के साथ मिलकर यह 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' (चौतरफा असर) पैदा करेगी। माल ढुलाई (Transportation) महंगी होने और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें ₹3,113 पार होने से होटल-रेस्तरां में खाना, टिफिन सर्विसेज और अन्य रोजमर्रा की खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाएंगी।
ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल पर असर: घरेलू सिलेंडर के दाम ₹942 तक पहुंच जाने से ग्रामीण और गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा। ऐसी आशंका है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कई लाभार्थी महंगे रीफिल के कारण दोबारा पारंपरिक और प्रदूषणकारी ईंधनों (जैसे लकड़ी और उपले) की तरफ रुख कर सकते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ेगा।