एक्टिविस्ट, लेखिका प्रोफेसर मधु पूर्णिमा किश्वर ने पीएम मोदी पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। पिछली बार उन्होंने महिलाओं को लेकर मोदी पर कई आरोप लगाए थे। हालांकि जिनके कोई सबूत वो आज तक नहीं दे पाईं। उसके बाद बीजेपी आईटी सेल और भाजपा के नेताओं ने मधु किश्वर पर जबरदस्त हमला बोल दिया था। अब उन्हीं मधु किश्वर ने फिर से मोदी पर हमला बोला है। इस बार मामला एक कथित गोपनीय फाइल और एक आला अफसर से जुड़ा हुआ है। पूरी खबर पढ़िए कि उस कथित फाइल में क्या था और वो अधिकारी कौन था, जिसके पास मोदी के सारे राज़ थे। यह खबर मधु किश्वर के ट्वीट पर आधारित है। सत्य हिन्दी मधु किश्वर के किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं करता है। 
मधु किश्वर ने गुरुवार को एक्स पर एक लंबे ट्वीट में लिखा है- यह चौंकाने वाली जानकारी मुझे एक ऐसे व्यक्ति से मिली है, जिसके पास प्रधानमंत्री के बारे में अंदरूनी सूचनाओं का अच्छा-खासा भंडार है। मूल तथ्यों की पुष्टि कोई भी व्यक्ति साधारण गूगल सर्च के जरिए कर सकता है। जिस दिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, उसी दिन मनमोहन सिंह के 2011 से कैबिनेट सचिव रहे अजीत कुमार सेठ उनसे मिलने पहुंचे। उनके पास एक मोटी फाइल थी और उन्होंने कहा, “डॉ. साहब (मनमोहन) ने सुझाव दिया है कि आप इस फाइल को ध्यान से देखें।”
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उस फाइल में मोदी के खिलाफ क्या था

मधु किश्वर आगे लिखती हैं कि मोदी जी ने जैसे ही फाइल के पन्ने पलटने शुरू किए, उनका चेहरा फीका पड़ गया, क्योंकि उस फाइल में उनके खिलाफ कई आपत्तिजनक जानकारियां थीं। घबराए हुए मोदी ने सेठ से पूछा, “यह आपके पास कैसे पहुंची?” सेठ ने शांत स्वर में जवाब दिया, “कैबिनेट सचिव होने के नाते, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की सभी महत्वपूर्ण फाइलें मेरे पास आती हैं।” मोदी जी ने चुपचाप फाइल लौटा दी और संकेत समझ गए। इसके बाद अजीत कुमार सेठ को न सिर्फ कार्यकाल विस्तार दिया गया, बल्कि उन्हें मोदी जी का ही कैबिनेट सचिव नियुक्त कर दिया गया।

मधु के मुताबिक इसका मतलब यह हुआ कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री कार्यालय की गतिविधियों और निर्णयों तक पहुंच बनी रही।

उस अधिकारी की नौकरी आगे इस तरह बढ़ाई गई

मधु किश्वर का ट्वीट में कहना है कि अजीत कुमार सेठ को 2014 में विस्तार दिया गया और वे जून 2015 तक इस पद पर रहे। क्या आपने दुनिया में कहीं सुना है कि कोई प्रधानमंत्री अपने कट्टर विरोधी के सबसे भरोसेमंद वरिष्ठ अधिकारी को अपने ही पीएमओ का प्रमुख नियुक्त करे? रिटायरमेंट के बाद भी सेठ को एक और पुरस्कार के रूप में सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड (PESB) का अध्यक्ष बना दिया गया।

मोदी के (कथित) काले कारनामों की जानकारी बहुतों के पास हैः मधु किश्वर

एक्टिविस्ट मधु किश्वर ने उसी ट्वीट में लिखा है कि यह संभवतः इस बात से समझा सकता है कि तमाम तीखी बयानबाजी के बावजूद, तथाकथित “56 इंच की छाती” वाले नेता ने सोनिया गांधी, रॉबर्ट वाड्रा, चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाई। जबकि वे खुद उन पर विदेशी खातों और अन्य आरोप लगाते रहे हैं। यह सिर्फ सोनिया गांधी ही नहीं हैं, बल्कि भारत और विदेशों में कई अन्य लोग भी हैं जिनके पास “महामानव” के कथित काले कारनामों की जानकारी है।

मोदी के 56 इंच सीने का मज़ाकः ट्वीट में मधु लिखती हैं- इसी वजह से मोदी जी को भारत के सबसे असुरक्षित (insecure) राजनेताओं में से एक बताया जाता है, और यही कारण है कि वे बड़े-बड़े दावे और आक्रामक बयानबाजी करते नजर आते हैं। भारत और दुनिया में भ्रष्ट राजनेताओं की कमी नहीं है, लेकिन खुद को संत की छवि में पेश करने की इतनी कोशिश शायद ही किसी ने की हो, जितनी “56 इंच” वाले नेता करते हैं। जनता को संबोधित करते समय उनकी आवाज में लगातार उत्तेजना और खुद को निस्वार्थ महात्मा के रूप में प्रस्तुत करने का दिखावा इसी का हिस्सा बताया जाता है। इसी वजह से मोदी जी को भारत के सबसे असुरक्षित (insecure) राजनेताओं में से एक बताया जाता है, और यही कारण है कि वे बड़े-बड़े दावे और आक्रामक बयानबाजी करते नजर आते हैं। भारत और दुनिया में भ्रष्ट राजनेताओं की कमी नहीं है, लेकिन खुद को संत की छवि में पेश करने की इतनी कोशिश शायद ही किसी ने की हो, जितनी “56 इंच” वाले नेता करते हैं। जनता को संबोधित करते समय उनकी आवाज में लगातार उत्तेजना और खुद को निस्वार्थ महात्मा के रूप में प्रस्तुत करने का दिखावा इसी का हिस्सा बताया जाता है।

मधु किश्वर ने इसी बात का विस्तार करते हुए लिखा है- “रिकॉर्ड के लिए, 2014 के चुनाव अभियान के दौरान जब मोदी जी ने पहली बार “56 इंच की छाती” का जिक्र किया, तो मैंने व्यक्तिगत रूप से उनसे कहा था, “नरेंद्र भाई, ऐसा मत कहिए, यह अशोभनीय लगता है।”
इस पर उनका जवाब था, “आम जनता को यह पसंद है, मधु जी। केवल आप जैसे बुद्धिजीवी ही परिष्कृत भाषण चाहते हैं।” अब, मोदी जी के समर्थकों से सवाल है कि वे अपने “हृदय सम्राट” से पूछें कि उन्होंने मनमोहन सिंह के कैबिनेट सचिव को अपने ही पीएमओ का शीर्ष अधिकारी क्यों नियुक्त किया? और जितना आप झूठे और अशोभनीय आरोपों से उकसाएंगे, उतनी ही और जानकारियां सामने आएंगी, जो आपके “हृदय सम्राट” को उजागर करेंगी। यानी मधु किश्वर ने भविष्य में और भी खुलासे की चेतावनी भी लगे हाथ दे दी है।
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मधु किश्वर का पिछला हमला क्या था

बीजेपी सुब्रह्मण्यम स्वामी ने 25 मार्च को पीएम मोदी पर महिलाओं को लेकर आरोप लगाए थे। स्वामी के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं लेता है। न ही उन आरोपों को किसी ने लिया। लेकिन मधु किश्वर ने उसी दिन स्वामी के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कई सनसनीखेज बातें एक्स पर लिखीं। हालांकि उनमें भी महिलाओं को लेकर आरोप लगाए गए थे, जिसके बारे में किश्वर कोई सबूत नहीं दे पाईं। तब मधु किश्वर ने लिखा था- मई 2014 में सत्ता संभालने के समय से ही मैंने नरेंद्र मोदी से सुरक्षित दूरी बनाए रखी। मैंने तो उन्हें अपनी उन पर लिखी किताब (मोदीनाम) की प्रति भेंट करने भी नहीं गई। सिर्फ उनके पसंदीदा नौकरशाह भरतलाल के माध्यम से एक बिना हस्ताक्षर वाली प्रति भिजवा दी। उन महिलाओं के नाम, जिन्हें मोदी ने उनके साथ कथित निकटता के कारण सांसद और मंत्री बनाया गया, संघी सत्ता नेटवर्क में शुरू से ही धीमी आवाज़ में लेकिन साफ़-साफ़ फुसफुसाए जा रहे थे। इसी वजह से मैंने बहुत पहले ही सावधानी बरत ली थी। ऐसे लोगों के नाम भी दबे स्वर में लिए जा रहे थे, जैसे हरदीप सिंह पुरी, जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें (मोदी को) विशेष सेवाएं दी थीं और जैसे ही हरदीप पुरी और एस. जयशंकर को कैबिनेट में शामिल किया गया, ये चर्चाएं और तेज़ हो गईं। इसी ट्वीट में मधु किश्वर ने मोदी को लेकर कई और गंभीर आरोप महिलाओं को लेकर लगाए थे लेकिन सबूत पेश नहीं होने के कारण उसे यहां प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।