loader

भारत को कश्मीर में हमलावर बताने की कीमत चुका रहा है मलेशिया?

भारत को हमलावर और कश्मीर पर हमला कर ज़बरन कब्जा करने वाला देश बताने की क़ीमत अब मलेशिया को चुकानी पड़ रही है। मोदी सरकार ने मलेशिया से नाराज़ होकर उससे पाम आयल ख़रीदने पर एक तरह का प्रतिबंध लगा दिया है। मोदी सरकार ने अनौपचारिक तौर भारतीय व्यापारियों को मलेशिया से पाम आयल ख़रीदने से मना किया है।
इस संकट की शुरुआत अनुच्छेद 370 में बदलाव कर कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने के भारत के फ़ैसले से हुई थी। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद ने भारत की आलोचना करते हुए यहाँ तक कह दिया था - 'भारत ने कश्मीर पर आक्रमण कर कब्जा कर लिया था।'
देश से और खबरें
मोदी सरकार ने तब मलेशिया को मुंहतोड़ जवाब दिया था। भारत की तरफ़ से कहा गया था कि महातिर मुहम्मद को इतिहास की जानकारी नहीं है। भारत ने पाम ऑयल खरीद रोकने का संकेत उसी समय दिया था।

कड़ी प्रतिक्रिया

भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया का मलेशिया पर कोई असर नहीं हुआ। संसद से नागरिकता संशोधन क़ानून यानी सीएए के पारित होने के बाद महातिर मुहम्मद ने एक बार फिर भारत को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, 'यह भेदभावपूर्ण है और इससे भारत के मुसलमानों की स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा।'
इसके बाद भारत ने मलेशिया को सबक़ सिखाने के लिये भारतीय व्यापारियों से कहा है कि वे मलेशिया से पाम ऑयल न लें। इंडोनेशिया के बाद मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा पाम ऑयल उत्पादक देश है। भारत उसका सबसे बड़ा खरीददार है और कुल निर्यात का लगभग 30 प्रतिशत पाम ऑयल भारत लेता है। 
अघोषित बॉयकॉट के बाद मलेशिया से पाम ऑयल आयात बुरी तरह गिरा है। साल 2019 में भारत ने उससे 44 लाख टन पाम ऑयल खरीदा था, लेकिन इस साल 10 लाख टन से भी कम खरीद की आशंका है।

कूटनीतिक चूक?

महातिर मुहम्मद के बाद मलेशिया के दूसरे सबसे बड़े नेता अनवर इब्राहिम हैं। उन्होंने यह संकट शुरू होने पर कहा था कि भारत की संवेदनाओं का ख्याल रखना ज़रूरी है। उन्हें अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जाता है। महातिर मुहम्मद इसी साल पद से हट सकते हैं। भारत अनवर इब्राहिम के जरिए मलेशिया पर अपना स्टैंड बदलने के लिए दबाव डाल सकता था।
यही हाल तुर्की के साथ भी है। भारत ने तुर्की को नौसेना के लिए युद्धक पोत बनाने का आदेश दे रखा था। कश्मीर मुद्दे पर तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया तो भारत ने वह ऑर्डर रद्द कर दिया। इसके अलावा भारत ने तुर्की के पड़ोसी और छत्तीस का आँकड़ा रखने वाले देश अर्मीनीया से नज़दीकी बढानी शुरू कर दी। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भाग लेने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्मीनीया के विदेश मंत्री से मुलाक़ात की। दरअसल यह बैठक अर्मीनीया से नज़दीकी नहीं, बल्कि तुर्की को संकेत देने के लिए रखी गई थी। 

अड़ियल मलेशिया

भारत सरकार के कड़े रुख़ के बाद भी प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद समझने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, “हम चिंतिंत ज़रूर हैं क्योंकि भारत को हम ढेर सारा पाम ऑयल बेचते हैं, पर हमें स्पष्टवादी होना चाहिए और यदि कुछ ग़लत हो रहा है तो उसे ग़लत कहना ही चाहिए।”
94 साल के महातिर मुहम्मद को मलेशिया का बड़ा नेता माना जाता है। उनकी दुनिया में काफी साख है। महातिर तुर्की और ईरान के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय मुसलिम बिरादरी में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ इसलामिक कंट्रीज़ के समानान्तर एक संगठन खड़ा करने की कोशिश में हैं। इसके तहत वे मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को आक्रामक रूप से उठा रहे हैं। अगर ये कोशिश कामयाब हुई तो वहाबी आतंकवाद की कमर पर करारी चोट पड़ सकती है। यह भारत के लिए बेहतर स्थिति होगी। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें